खाद्य मंत्री के जिले में ही सड़ गया 12 हजार बोरी चावल, गरीबों को बंटने वाला था!

food minister ke paas sad gaya 2 crore ka chawal

सार
एमपी की शिवराज सरकार में खाद्य मंत्री बिसाहुलाल सिंह के गृह जिले में फ़ूड इंस्पेक्टर ने वेयर हाउस का निरीक्षण किया. फूड इंस्पेक्टर सीमा सिन्हा ने बताया कि करीब 12 हजार बोरियां खराब हुई हैं.

मध्य प्रदेश के खाद्य मंत्री के जिले में ही 12 हजार बोरी चावल रखे-रखे सड़ गया. चावल की ये बोरियां अनूपपुर के एक गोदाम में तीन साल से स्टॉक में रखी थीं. ये अनाज पीडीएस के तहत गरीबों के लिए रखा गया था. मध्य प्रदेश के खाद्य मंत्री बिसाहूलाल सिंह हैं. आजतक से जुड़े रविंद्र शुक्ला की रिपोर्ट के मुताबिक जांच करने पहुंचीं फूड इंस्पेक्टर सीमा सिन्हा ने बताया कि गोदाम में रखा करीब 640 टन चावल खाने योग्य नहीं हैं. शिकायत मिली थी कि इस खराब हो चुके चावल को भी गरीबों में बांटे जाने की तैयारी की जा रही थी.

अनूपपुर कलेक्टर ने जांच टीम बनाई
रिपोर्ट के मुताबिक शिकायत मिलने के बाद अनूपपुर के कलेक्टर ने मामले की जांच के लिए टीम गठित की थी. टीम ने निरीक्षण के बाद चावल को सड़ा हुआ बताया. इसके बाद जिला प्रशासन ने वेयर हाउस को सील कर दिया. कार्रवाई का आदेश भी दिया गया है. जिस गोदाम में चावल सड़ गए, उसका नाम शुभ वेयर हाउस है.

वेयर हाउस और नागरिक आपूर्ति निगम इस लापरवाही के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. हालांकि फूड इंस्पेक्टर सीमा सिन्हा ने बताया कि इसमें वेयर हाउस और नागरिक आपूर्ति निगम दोनों की लापरवाही दिख रही है. समय से स्टॉक यहां से नहीं निकालने के कारण यह खराब हो गया. उन्होंने कहा कि अभी मार्केट रेट करीब 32-33 रुपये प्रति किलो है. इस हिसाब से अगर देखें तो 2 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में लगातार मनमानी और गुणवत्ता विहीन चावल को जमा कराने के कारनामे किसी से छिपे नहीं हैं. यहां मिलरों के साथ मिलीभगत कर गरीबों की थाली में अमानक चावल की खेप पहुंचा कर गड़बड़ी की जा रही है. बताते हैं कि केंद्र प्रभारी और ट्रांसपोर्टर के बीच विवाद में ये चावल सड़ गया है.

इस चावल को केंद्र प्रभारी कोतमा ने समय पर उठान नहीं करवाया. इसके पीछे नॉन के केंद्र प्रभारी और उस समय के ट्रांसपोर्टर के बीच की निजी झगड़ा बताया जा रहा है. तत्कालीन वेयर हाउस कोतमा के शाखा प्रबंधक ने भी गोदाम में भंडारित चावल की देखरेख नहीं की.

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