पीड़िता के नाबालिग भाई ने ही किया था रेप, कोर्ट ने 30 हफ्ते की प्रेगनेंट 13 साल की लड़की को अबॉर्शन की इजाजत दी !

bhai ke rape ke baad behan ka abbortion

सार
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायलय के एक फैसले को पलटते हुए अविवाहित महिला को 24 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में अबॉर्शन कराने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि महिला शादीशुदा नहीं है, केवल इस वजह से उसे अबॉर्शन करवाने से नहीं रोका जा सकता।

HC on Abortion : ये मामला केरल हाईकोर्ट की है. कोर्ट में एक 13 साल की रेप पीड़िता के अबॉर्शन से संबंधित याचिका पर सुनवाई चल रही थी. लड़की 30 हफ्ते की प्रेगनेंट थी. हाईकोर्ट ने रेप पीड़िता को अबॉर्शन की अनुमति दे दी है. लेकिन इस दौरान केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई. बता दें कि पीड़िता के भाई ने ही उसका रेप किया था.

पीड़िता के माता-पिता ने कोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात कराने की इजाजत मांगी थी. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सरकारी अस्पताल में गर्भपात कराने के निर्देश दिए हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये भी कहा कि यकीन करना मुश्किल है, लेकिन ये कड़वा सच है कि पीड़िता को उसके भाई ने प्रेगनेंट किया जो खुद एक नाबालिग है.

कोर्ट ने अबॉर्शन की इजाजत देते हुए याचिकाकर्ता को एक अंडरटेकिंग दाखिल करने के भी निर्देश दिए हैं. जिसमें लिखा हो कि नाबालिग रेप पीड़िता के परिवार के जोखिम पर उसका गर्भपात कराया जा रहा है.

कोर्ट ने अबॉर्शन की इजाजत देते हुए एक अंडरटेकिंग दाखिल करने को भी कहा है. अंडरटेकिंग में परिवार को लिख कर देना होगा कि अबॉर्शन के दौरान लड़की को होने वाले जोखिम के बारे में उन्हें पूरी जानकारी है.

पेट दर्द से प्रेग्नेंसी का चला पता 
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता के वकील शमीना सलाहुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि नाबालिग पहले अपनी प्रेग्नेंसी की बात से अंजान थी. हालांकि, दो महीने से उसे पीरियड्स नहीं आए थे. फिर अचानक उसे एक दिन पेट दर्द हुआ. तो लड़की के मां-बाप उसे अस्पताल लेकर गए. जहां मेडिकल टेस्ट में नाबालिग के प्रेगनेंट होने का खुलासा हुआ.

वहीं, इस सुनवाई के दौरान सरकारी वकील एस अप्पू ने अबॉर्शन पर रोक लगाते हुए दलील दी थी कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट 1971 के तहत, गर्भपात कराने की अवधि 24 सप्ताह तक ही सीमित है.

लेकिन, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसले सुनाया. हालांकि, कोर्ट ने इस दौरान कई गंभीर समस्याओं का भी जिक्र किया. जस्टिस वी जी अरुण ने 13 साल की गर्भवती को अबॉर्शन की इजाजत देते हुए कहा,

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 21 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए अविवाहित महिला को 24 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने का आदेश दिया था.

आसानी से मिल जाती है अश्लील सामग्री
बीते गुरूवार को हुई सुनवाई में केरल हाईकोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आसानी से मिलने वाली अश्लील सामग्री के कारण युवाओं को गलत चीज़ें मिल रही हैं। ऐसे में युवाओं को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में बताना बेहद जरुरी है। कोर्ट ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि स्कूलों में दी जाने वाली यौन शिक्षा पर दोबारा विचार किया जाए। 13 साल की एक नाबालिग लड़की को उसके ही नाबालिग भाई ने प्रेग्नेंटकर दिया था। जिसके बाद जस्टिस अरुण ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए 13 साल की इस नाबालिग लड़की को अबॉर्शन की अनुमति दी।

SC ने 24 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में अबॉर्शन की दी थी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायलय के एक फैसले को पलटते हुए अविवाहित महिला को 24 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में अबॉर्शन कराने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि महिला शादीशुदा नहीं है, केवल इस वजह से उसे अबॉर्शन करवाने से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एम्स के डायरेक्शन में 22 जुलाई तक एक पैनल बनाने और अबॉर्शन से जुड़ी हर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।

 

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