गुजरात के मोरबी में पुल टूटने से 141 लोगों की मौत, 177 को बचाया, रेस्क्यू में जुटी सेना-NDRF

gujraat pul collapsed

सार
गुजरात (Gujarat) के मोरबी में कल शाम ब्रिटिश कालीन पुल टूटने (Bridge Collapse) से कम से कम 141 लोगों की मौत (Death) हो गई. जबकि अब तक 177 लोगों को बचाया गया है. वहीं अन्य लोगों की तलाशी के लिए अभियान जारी है.

गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने मोरबी में मीडिया से कहा कि राज्य सरकार ने इस हादसे की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि अंग्रेज़ों के समय का यह ‘‘हैंगिंग ब्रिज” जिस समय टूटा, उस समय उस पर कई महिलाएं और बच्चे मौजूद थे। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि कुछ लोगों को पुल पर कूदते और उसके बड़े तारों को खींचते हुए देखा गया। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि पुल उस पर ‘‘लोगों की भारी भीड़” के कारण टूट कर गिर गया हो।

दीपावली की छुट्टी और रविवार होने के कारण प्रमुख पर्यटक आकर्षण पुल पर पर्यटकों की काफी भीड़ थी। एक निजी संचालक ने लगभग छह महीने तक पुल की मरम्मत का काम किया था। पुल को 26 अक्टूबर को गुजराती नववर्ष दिवस पर जनता के लिए फिर से खोला गया था। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल रविवार रात दुर्घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने सिविल अस्पताल में घायलों से मुलाकात भी की। राज्य सरकार ने इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजन को चार-चार लाख रुपए और घायलों को पचास-पचास हजार रुपए का मुआवजा दिए जाने की घोषणा की है।

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
राज्य की राजधानी अहमदाबाद से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित सस्पेंशन ब्रिज रविवार शाम 6.42 बजे उस समय गिर गया जब छठ पूजा के लिए कुछ अनुष्ठान करने के लिए लगभग 500 लोग उस पर एकत्र हुए थे.

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल या एनडीआरएफ की पांच टीमों के मौके पर पहुंचने के साथ पुल ढहने के बाद बचाव अभियान शुरू किया गया. बाद में सेना, नौसेना और वायु सेना को भी कार्रवाई में लगाया गया.

अधिकारियों ने बताया कि करीब 19 लोगों को गंभीर रूप से घायल होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है और नावों की मदद से बचाव कार्य किया जा रहा है.

चश्मदीदों का कहना है कि करीब 150 साल पुराने पुल पर कई महिलाएं और बच्चे थे. तभी एक दम से पुल की केबल टूट गई, जिससे कई लोग नदी में समा गए और चीख- पुकार मच गई.

मौके से मिले वीडियो में कुछ लोगों को पुल टूटने के बाद सुरक्षित तैरते हुए देखा जा सकता है. कई लोग पुल के टूटे सिरों पर चिपके हुए दिखे.
मच्छू नदी पर बने पुल को जीर्णोद्धार के लिए सात महीने से बंद किया गया था. इसे 26 अक्टूबर, गुजराती नव वर्ष पर जनता के लिए फिर से खोल दिया गया था.

स्थानीय नगर निकाय के प्रमुख संदीप सिंह जाला ने एनडीटीवी को बताया कि गुजरात के मोरबी शहर में टूटे सदी पुराने पुल के मरम्मतकर्ता ने इसे फिर से खोलने से पहले अधिकारियों से फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं लिया था.

गुजरात के श्रम और रोजगार मंत्री बृजेश मेरजा ने एक विशेष साक्षात्कार में एनडीटीवी से कहा कि पिछले सप्ताह नवीनीकरण हुआ. हम भी हैरान हैं. हम इस मामले को देख रहे हैं. सरकार इस त्रासदी की जिम्मेदारी लेती है.

गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गैर इरादतन हत्या और जान बूझकर मौत का कारण बनने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. जो भी जिम्मेदार पाया जाता है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. संघवी ने कहा, “पुल गिरने की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है.

राज्य सरकार ने हादसे में मरने वालों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो गुजरात में हैं, ने भी पीड़ितों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है.

 

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