Covid में अनाथ बच्ची को LIC ने भेजा 29 लाख का कर्ज चुकाने का नोटिस, वित्त मंत्री ने दिया दखल तो …

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सार
वनिशा पाठक को भारतीय जीवन बीमा निगम की तरफ से कानूनी नोटिस जारी कर ब्याज के साथ जुर्माना चुकाने को कहा है. दरअसल उनके माता और पिता की कोविड के दौरान मौत हो गई थी, जिन्होंने एलआईसी से 29 लाख रुपये का होम लोन लिया था.

भोपाल में रहने वाली 17 साल की अनाथ लड़की को बड़ी राहत मिलने वाली है. निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर ट्वीट करके यह इशारा दिया है. इस लड़की ने कोविड काल में अपने माता-पिता खो दिये थे. लेकिन अब इसपर मुसीबतों का नया पहाड़ टूट पड़ा है. लड़की को 29 लाख रुपये का लोन चुकाने का नोटिस मिला है.

खबर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान आया है. उन्होंने ट्वीट किया कि डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशल सर्विस (DFS) और LIC इंडिया कृपया इस मामले को देखें. मुझे इसकी ताजा स्थिति भी अपडेट करें.

कौन हैं वनिशा पाठक?

17 साल की वनिशा पाठक इन दिनों सुर्खियों में हैं. वह दसवीं बोर्ड में टॉपर रही थीं. उनके माता-पिता की कोरोना की घातक दूसरी लहर में मौत हो गई थी. वनिशा ने पहले ही इतना कुछ झेला है. वहीं अब आईआईटी की तैयारी कर रही वनिशा को लोन रिकवरी के नोटिस ने चिंता में डाल दिया है.

वनिशा पाठक भोपाल में ही रहती है और कोरोना की वजह से माता-पिता दोनों को खोने के बावजूद दसवीं में 99 फीसदी मार्क्स लाकर टॉप कर चुकी है. माता-पिता को खोने के बाद वनिशा और उनका छोटा भाई अपने मामा और उनके परिवार के साथ रहते हैं.

माता-पिता की मौत के बाद वनिशा को सरकार की तरफ से करीब 2 लाख रुपए मिले और इसके अलावा शिवराज सरकार की तरफ से हर महीने दोनों भाई-बहन को 5 हज़ार रुपए भी मिलते हैं.

वनिशा बहुत मुश्किल से खुद को संभाल रही थी. अभी 11वीं में भी उसने 97 फीसदी अंक हासिल किए. फिलहाल वनिशा आईआईटी जाने के लिए जेईई परीक्षा की तैयारी कर रही है लेकिन इसी बीच उसके पिता के बकाया लोन का एक नोटिस झटके के रूप में आया जिसने इस नाबालिग टॉपर को परेशान कर दिया है.

वनिशा के पिता जीतेंद्र पाठक एलआईसी एजेंट थे और उन्होंने ऑफिस से होम लोन लिया था. लेकिन मई 2021 में वंशिका की मां और पिता दोनों कोरोना से जंग हार गए और चल बसे. इसके बाद से जो होम लोन वनिशा के पिता ने लिया था उसकी किश्त नहीं दी जा सकी क्योंकि वनिशा नाबालिग है, इसलिए एलआईसी ने उसकी सारी बचत और हर महीने मिलने वाले कमीशन को रोक दिया.

वनिशा ने LIC को लिखा पत्र

वनिशा को झटका तब लगा जब फरवरी 2022 में उसके पिता के लिए होम लोन के ब्याज समेत 29 लाख 29 हज़ार रुपए का नोटिस मिला. वनिशा ने LIC को पत्र भी लिखा है. कहा गया है कि वो अभी नाबालिग है अगले साल बालिग होगी तब तक उन्हे किश्त चुकाने का समय दिया जाए क्योंकि वह नाबालिग है और पिता की पॉलिसी का क्लेम और मासिक कमीशन रुके होने की वजह से सभी आर्थिक और वित्तीय आय स्रोत बंद हो चुके है.

वनिशा के मुताबिक उसके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है ऐसे में वह लोन तभी चुका सकेगी जब वह 18 साल की हो जाए. इसके अलावा लोन पर लिया जा रहा ब्याज माफ किया जाए.

वनिशा की मां का 4 मई 2021 को कोरोना से निधन हो गया था और 15 मई को पिता ने भी कोरोना की वजह से दम तोड़ दिया था. विडंबना देखिए कि जिस घर के लिए वनिशा के पिता ने होम लोन लिया था उसका गृह प्रवेश भी वह नहीं कर सके और दुनिया से चले गए.

इस बारे में आजतक ने एलआईसी के विकास अधिकारी संजय बर्नवाल से फोन पर बात की थी. उन्होंने आश्वासन दिया कि वनिशा को यह नोटिस फरवरी 2022 में मिला था और जैसे ही उनके संज्ञान में यह आया को एलआईसी के वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया गया और नोटिस को ब्लॉक कर दिया गया.

तब से लेकर अब तक वनिशा को कोई नोटिस नहीं मिला और उसके बालिग होने तक उसे नोटिस नहीं मिलेगा. हालांकि कोरोना की विभीषिका में अपने माता-पिता को खो चुकी वनिशा बालिग होने के बाद भी इतनी बड़ी राशि कैसे चुकाएगी यह एक बड़ा सवाल है.

नाबालिग हैं वनीशा और उनका भाई
वनीशा और उनका भाई दोनों ही नाबालिग हैं, इस वजह से कंपनी ने उनके पिता को मिलने वाली बचत राशइ को भी ब्लॉक कर दिया है. इस मामले में वनीशा ने कंपनी से लोन चुकाने के लिए समय देने की गुजारिश भी की है.

वित्त मंत्री ने दिया दखल
अब इस मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एलआईसी को इस मामले का संज्ञान लेने के लिए कहा है. वनीशा की कहानी के बारे में TOI में छपे एक न्यूज आर्टिकल को ट्वीट करते हुए निर्मला सीतारमण ने एलआईसी से यह मामला देखने के लिए कहा है. उन्होंने एलआईसी इंडिया के फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट को टैग भी किया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अब इस मामले में वनीशा को एलआईसी से राहत मिल चुकी है और उन्हें एलआईसी की तरफ से अब नोटिस नहीं भेजा जाएगा.

कोविड ने माता-पिता को छीना
उनकी माता सीमा पाठक और पिता जीतेंद्र पाठक की मृत्यु कोरोना के दूसरी लहर के दौरान हुई थी. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार वनिशा के पिता जीतेंद्र पाठक एलआईसी के एजेंट थे, और उन्होंने अपने कार्यालय से 29 लाख रुपये का होम लोन लिया था. वनिशा फिलहाल 17 साल की हैं, और उनका एक छोटा भाई भी है. जिसकी देखरेख वे स्वंय कर रही हैं.

 

 

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