Gyanvapi Survey: बाबरी छीनी, लेकिन अब ज्ञानवापी नहीं छीन पाओगे…मस्जिद के सर्वे पर बोले ओवैसी

owaisi on gyanwapi masjid

सार
हैदराबाद के एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर मुंह खोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1991 के कानून के तहत अब किसी भी मस्जिद-मंदिर का विवाद कोर्ट में नहीं लाया जा सकता है। ओवैसी ने ज्ञानवापी में सर्वे को तमाशा बताया।

हाइलाइट्स
ज्ञानवापी मस्जिद में अदालत द्वारा नियुक्त सर्वे टीम ने जायजा लिया
इधर, AIMIM सांसद असदुद्दीनन ओवैसी ने सर्वे को तमाशा करार दिया
ओवैसी ने मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दखल देने की गुहार लगाई

Asaduddin Owaisi On Gyanwapi Mosque Survey Issue:  AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ज्ञानवापी सर्वे किस आधार पर हो रहा है? ओवैसी ने जनता को अपने संबोधन में कहा, ‘पीएम मोदी को चुप्पी तोड़नी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के 1991 के आदेश के बारे में बात करनी चाहिए जिसमें कहा गया है कि मस्जिद और मंदिर की प्रकृति और चरित्र को नहीं बदला जा सकता है।’

सदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘मैं सरकार को बताना चाहता हूं कि हमने एक बाबरी मस्जिद को खोया है, दूसरी मस्जिद को बिलकुल नहीं खोएंगे। तुमने मक्कारी और अय्यारी से इंसाफ को कत्ल करके हमारी मस्जिद को छीना। दूसरी मस्जिद नहीं छीन पाओगे, याद रखना।’

उन्होंने कहा कि अधिनियम कहता है 15 अगस्त, 1947 को मौजूद पूजा स्थल का धार्मिक स्वरूप वैसा ही बना रहेगा, जैसा उस तारीख को था, यह कहते हुए कि वह एक और मस्जिद नहीं खो सकते हैं।

ओवैसी ने कहा कि अधिनियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी भी वर्ग के पूजा स्थल को एक ही धार्मिक संप्रदाय के एक अलग वर्ग या एक अलग धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी भी वर्ग के पूजा स्थल में परिवर्तित नहीं करेगा।

AIMIM प्रमुख ने यह बात गुरुवार को वाराणसी की एक अदालत द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के पास ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर सर्वेक्षण के जारी रखने और रिपोर्ट 17 मई तक सौंपे जाने के बाद कही। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बाबरी छीनी, ज्ञानवापी नहीं छीन पाओगे। ज्ञानवापी मस्जिद थी और रहेगी।

उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टियां अधिक हिंदुत्व दिखाने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। कांग्रेस और आप ज्ञानवापी सर्वेक्षण के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे, इसलिए मुझे यह करना होगा।

धोखा देकर छीनी गई बाबरी मस्जिद
ओवैसी में मीडिया से बातचीत में बाबरी मस्जिद के मुकदमे का भी जिक्र छेड़ा। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद को लेकर भी इसी तरह की शुरुआत हुई और आखिरकार उसे धोखे से मुसलमानों से छीन लिया गया। ओवैसी ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कानून का शासन तो कमजोर हुआ ही, एक देश के रूप में भारत भी कमजोर हुआ। ओवैसी ने कहा, ‘मैं इसीलिए कह रहा हूं कि हमने बाबरी मस्जिद को इन्हीं हथकंडों और धोखे से खोया था। हुआ क्या- भारत कमजोर हुआ। कानून का शासन कमजोर हुआ।’

ओवैसी बोले- अब अतीत के पन्ने नहीं पलटना
ओवैसी ने कहा कि अब बाबरी मस्जिद जैसी घटनाएं दुहराने नहीं पाए, इसलिए दोबारा अतीत में जाने की जरूरत नहीं है। हैदराबाद सांसद ने कहा कि 1991 के पूजा स्थल कानून अंतिम है और उसका ही पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें दुबारा पलटकर अतीत में नहीं जाना। 1991 के कानून का लिहाज रखिए और उसी पर देश चलता रहे।’ ओवैसी पहले भी मंदिर-मस्जिद मामलों पर मुखर रहे हैं। वो बार-बार दावा करते हैं कि केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी आम नागरिकों को महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विवादित मुद्दों को हवा देती रहती है।

शनिवार दोबारा शुरू हुआ सर्वे का काम
ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे-वीडियोग्राफी कार्य शनिवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक बार फिर शुरू हो गया और यह रविवार को भी जारी रहेगा। शनिवार को 1,500 से अधिक पुलिसकर्मियों और पीएसी जवानों को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की सुरक्षा में तैनात किया गया था।

पक्षपात का आरोप भी खारिज
वाराणसी की अदालत ने ज्ञानवापी-शृंगार गौरी परिसर का सर्वे-वीडियोग्राफी कार्य कराने के लिए नियुक्त अधिवक्ता अयुक्त अजय मिश्रा को पक्षपात के आरोप में हटाने की मांग संबंधी याचिका गुरुवार को खारिज कर दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर भी वीडियोग्राफी कराई जाएगी। दीवानी अदालत के न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) दिवाकर ने अधिवक्ता आयुक्त मिश्रा को हटाने संबंधी याचिका को नामंजूर करते हुए विशाल सिंह को विशेष अधिवक्ता आयुक्त और अजय प्रताप सिंह को सहायक अधिवक्ता आयुक्त के तौर पर नियुक्त किया था। उन्होंने संपूर्ण परिसर की वीडियोग्राफी करके 17 मई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए थे।

 

 

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