सूखे के चलते गहरा सकता है चावल का संकट, महंगे चावल खाने के लिए रहिए तैयार !

India's Rice Production

सार
पिछले दो महीने में ही देश में चावल करीब 30 फीसदी महंगा हो गया है। स्थिति यह है कि 25 रुपये किलो मिलने वाला टूटा चावल भी 30 से 35 रुपये किलो मिलने लगा है। साबुत चावल की भी कीमत इसी तरह से बढ़ी है। बासमती चावल के तो भाव कुछ ज्यादा ही बढ़े हुए हैं।

India’s Rice Production: आने वाले दिनों में गेंहू (Wheat) के बाद देश में चावल के उत्पादन (Rice Production) में भी बड़ी गिरावट आ सकती है. जिसके चलते मौजूदा खरीफ सीजन ( Kharif Season) में चावल के उत्पादन में 10 से 12 मिलियन टन की कमी आ सकती है. यही वजह है कि केंद्र सरकार ने गैर-बासमती चावल ( Non-Basmati Rice) के एक्सपोर्ट पर 20 फीसदी एक्सपोर्ट टैक्स ( Export Tax) लगा दिया है तो टूटे हुए चावल ( Broken Rice) के एक्सपोर्ट पर पूरी तरीके से रोक लगा दी गई है. खाद्य सचिव ( Food Secretary) सुधांशु पांडे ( Sudhanshu Pandey) ने कहा कि चार राज्यों में सूखे ( Drought) की समस्या के साथ दूसरे फसलों की तरफ किसानों के रुझान के चलते खरीफ सीजन में 10 से 12 मिलियन उत्पादन कम रह सकता है.

ये प्रारम्भिक अनुमान है. देर से अगर अच्छी बारिश हुई तो आंकड़ो में परिवर्तन देखने को मिल सकता है. पहले आधिकारिक अनुमान के मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में खरीफ फसल की बुआई पर असर पड़ा है. 2021-22 खरीफ सीजन में 111 मिलियन टन चावल का उत्पादन हुआ था.

सुधांशु पांडे ने कहा कि धरल्ले से एक्सपोर्ट के चलते देश के टूटे हुए चावल की कमी होने लगी थी. इससे रेट भी लगातार बढ़ रहे थे. जिसके चलते टूटे चावल के एक्सपोर्ट पर पूरी तरीके से बैन लगाने का फैसला किया गया है.

टूटे हुए चावल के दामों में साल 2022 के दौरान 38 फीसदी का उछाल आया है तो अप्रैल से जून के बीच 2.13 मिलियन टन चावल का एक्सपोर्ट किया गया है दो एक साल पहले 1.58 मिलियन टन रहा था. हालांकि उन्होंने कहा कि बारत में अभी भी चावल का सरप्लस उत्पादन हो रहा है.

गुरुवार को सरकार ने गैर-बासमती चावल निर्यात पर 20 फीसदी एक्सपोर्ट टैक्स लगा दिया था. 9 सितंबर, 2022 यानि आज से ये फैसला लागू हो चुका है. वित्त मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू ने ये जानकारी दी है. खाद्य आपूर्ति मंत्रालय के सिफारिशों के बाद सरकार ने ये फैसला लिया है. खाद्य आपूर्ति मंत्रालय ने पीडीएस और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लिए प्रर्याप्त स्टॉक रखने के लिए चावल के एक्सपोर्ट पर टैक्स लगाने की सलाह दी थी.

भारत में घटा है धान की बुवाई का रकबा
भारत में इस साल धान की बुवाई का रकबा घटा है। बीते 29 जुलाई तक के आंकड़े बताते हैं कि इस साल बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल जैसे धान उत्पादक राज्यों में रकबा घटा है। तभी तो धान की कुल बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 13.3 फीसदी घटी है। 29 जुलाई तक पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत के छह राज्यों में धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले 37.70 लाख हैक्टेअर घटा था। यदि एक हैक्टेअर में औसत 2.6 टन उपज भी जोड़ा जाए तो धान की उपज में 100 लाख टन की कमी।

भारत के कौन है चावल उत्पादक राज्य
अपने यहां वैसे तो लगभग सभी राज्यों में चावल खाया जाता है। लेकिन जिन राज्यों में चावल ज्यादा खाया जाता है, वहीं इसकी खेती भी ज्यादा होती है। इसके अपवाद पंजाब और हरियाणा हैं। उन राज्यों में मुख्य खाना तो रोटी है, लेकिन ज्यादा आमदनी के लिए वहां के किसान धान की खेती करते हैं। इस वजह से वहां भूजल का भी ज्यादा दोहन हो रहा है। भारत में प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम और हरियाणा हैं।

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