कश्मीर में ग्रेनेड हमले में मारे गए बिहार के मोहम्मद मुमताज़, परिवार ने कहा- एक ही दिन में पूरा घर उजड़ गया

supaul mumtaj in kashmir

सार
जमम्मू-कश्मीर में दो महीने टारगेट किलिंग नहीं हुई, क्योंकि ऐसी घटनाओं में वांछित सभी आतंकी या तो मारे जा चुके हैं या फिर जेल में पड़े हैं. लेकिन गुरुवार को आतंकियों ने फिर से प्रवासी लोगों को निशाना बनाया. आतंकियों ने पुलवामा में…

Heighlight
फिर से टारगेट किलिंग?
पुलवामा में बिहारी मजदूरों पर ग्रेनेड अटैक
घायल दोनों मजदूर खतरे से बाहर

सुपौल: जम्मू कश्मीर के पुलवामा में ग्रेनेड हमले ( Grenade Attack In Pulwama) में गुरुवार की रात सुपौल के पीपरा थाना (Pipra Police Station Supaul) इलाके के सखुआ परसा गांव निवासी युवक मो. मुमताज की मौत हो गई. देर रात परिजनों को इसकी जानकारी मिली जिसके बाद कोहराम मच गया. घटना के बाद पूरा परिवार सदमे में हैं. परिवार में जैसे ही उसकी मौत की खबर मिली परिजनों में कोहराम मच गया. वहीं इसी थाना क्षेत्र के रामपुर निवासी 2 व्यक्ति आतंकी द्वारा किये गए ग्रेनेड हमले में जख्मी हुए हैं. जिनका इलाज जम्मू के एक अस्पताल में चल रहा है. घायलों की पहचान मोहम्मद आरिफ और मोहम्मद मजबूल के रूप में की गई है. दोनों की हालत स्थिर है.

घर का एक कमाऊ पुत्र मुमताज ही था : अपनी मां को बचपन में ही खो चुका मुमताज (Mumtaj of Supaul) पहले दिल्ली में रहता था. लेकिन 6 महीने से वो कश्मीर के पुलवामा जाकर रजाई बुनाई का काम करने लगा. उसकी असमय मौत उसके 4 बहन 3 भाई और पिता के लिए बड़ा सदमा है. गांव के लोग भी सरकार से इन कायर आतंकियों पर कड़ी करवाई की मांग कर रहे हैं.

‘हम सरकार से मांग करते हैं कि उसके जिगर के टुकड़े की लाश गांव तक पहुंचा दिया जाय. घर का एक कमाऊ पुत्र मुमताज ही था. जिसकी मौत से यह परिवार टूट चुका है. सरकार पीड़ित परिवार को कुछ आर्थिक मदद भी करें’. – मृतक की चाची

वहीं मृतक के पिता मों जालो ने बताया कि पहले फोन आया कि मुमताज घायल है. लेकिन फिर बीती रात उसके रिश्तेदार ने फोन कर बताया कि मुमताज की मौत इलाज के क्रम में हो गई है. मुहर्रम में पैसे भेजने की बात कही थी. अब मेरा राजा बेटा चला गया. अब कौन मेरे परिवार को देखेगा.

टारगेट कर हत्या कर रहे आतंकी
गौरतलब है कि साल की शुरुआत में आतंकियों ने गैर स्थानीय श्रमिकों पर हमले बढ़ा दिया थे, लेकिन ऐसे लक्षित हमलों में पिछले करीब दो महीने से कमी आयी थी. जम्मू-कश्मीर में यह आतंकी हमला आर्टिकल-370 हटने की वर्षगांठ से एक दिन पहले हुआ है. ये कोई पहली घटना नहीं है, जब बिहार के मजदूरों की आतंकियों ने कश्मीर में हत्या की ह. इससे पहले अक्टूबर 2021 में भी बिहार के तीन मजदूरों की हत्या कर दी गई थी. ये तीनों बिहार के अररिया जिला के रहने वाले थे. बीतें कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर में हिंसक घटनाएं बढ़ गई है, आतंकी लगातार लोगों की टारगेट कर हत्या कर रहे हैं.

मजदूरों की जान जाने की लिस्ट है बहुत लंबी
बिहारी मजदूरों की जान जाने की लिस्ट बहुत लंबी है, कहीं ना कहीं हर दिन बिहारी मजदूर इस तरह के घटनाओं का शिकार होते रहते हैं. ऐसी हर घटनाओं के बाद लोग गम जताते है और सरकार मुआवजे का ऐलान कर देती है. लोग सोशल मीडिया पर शोक संदेश की बाढ़ ला देते है, लेकिन समय बीतने के साथ ही लोग मौत की वजह, पलायन और बेरोजगारी को भुल जाते है.

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