IRCTC घोटाला के बिहार के डिप्टी सीएम की बढ़ी मुश्किल! CBI जल्द कर सकती है Tejashwi की गिरफ्तारी !

tejasvi yadav ki giraftari

Bihar News : बिहार के उप मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के छोटे बेटे तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सीबीआई ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) से जुड़े कथित घोटाले में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को मिली जमानत को चुनौती दी है. सीबीआई ने अब दिल्ली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल जज गीतांजलि गोयल ने मामले में तेजस्वी यादव से जवाब मांगने वाली सीबीआई की याचिका पर नोटिस जारी किया है. आरजेडी नेता और उनकी मां राबड़ी देवी को 2018 में इस मामले में जमानत दी गई थी. अब सीबीआई ने इस मामले में तेजस्वी यादव की जमानत रद्द करने की मांग की है. सीबीआई का कहना है कि तेजस्वी यादव जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में अगर कोर्ट ने याचिका मंजूर कर ली और जमानत याचिका रद्द कर दी तो तेजस्वी यादव को जेल जाना पड़ सकता है.

जिस वक्त सीबीआई ने ये चार्जशीट दाखिल की थी उस वक्त लालू पहले ही चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे थे और उनका एम्स में इलाज चल रहा था. बता दें, साल 2004 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने रेलवे के दो होटलों को आईआरसीटीसी को ट्रांसफर किया गया था. उन्होंने इनकी देखभाल करने के लिए टेंडर भी जारी किए गए थे. इस दौरान पता चला कि टेंडर देने में गड़बड़ियां हुई हैं. जांच में पाया गया कि लालू ने रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के पुरी और रांची स्थित दो होटलों का आवंटन कोचर बंधु की कंपनी सुजाता होटल को दिया था. इसके वितरण में नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था. इस आवंटन के एवज में लालू प्रसाद यादव को पटना में करोड़ों की जमीन एक शेल कंपनी डिलाइट मार्केटिंग द्वारा ट्रांसफर की गई थी. इस कंपनी को अब लारा प्राइवेट कंपनी के नाम से जाना जाता है.

ये बात आई थी सामने
उस वक्त सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के हाथ में इस केस की जिम्मेदारी आई. सीबीआई के मुताबकि प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि होटल आवंटन में गड़बड़ियां हुई हैं. होटल लीज पर देने के बदले जमीन ली गई. 65 लाख में 32 करोड़ की जमीन ली गई. दूसरी ओर, यह भी कहा जा रहा था कि अगर तेजस्वी पर आरोप सिद्ध हो जाता, तो उन्हें 7 साल की सजा हो जाती. ऐसे में तेजस्वी एक भी चुनाव नहीं लड़ पाते. कानूनी जानकारों के अनुसार अगर किसी भी व्यक्ति को 6 महीने से जयादा की सजा होती है तो रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट के तहत प्रावधान है कि वह व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता.

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