‘अग्निपथ’ के खिलाफ हिंसा भड़काने के पीछे कोचिंग सेंटर? DM ने किया चौंकाने वाला दावा

agnipath yojna ke peeche coaching center ka haath

सार
अग्निपथ योजना का पूरे बिहार में विरोध (agneepath protest in bihar) हो रहा है. इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं इसकी जानकारी प्राप्त करने में प्रशासन जुट चुका है. आरआरबी प्रोटेस्ट से जोड़कर भी इसे देखा जा रहा है. पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने कहा है कि अग्निपथ भर्ती योजना के विरोध में हिंसक प्रदर्शन करने वालों से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा. आगे पढ़ें पूरी खबर…

Protest Against Agnipath Scheme: भारत सरकार की योजना अग्निपथ को लेकर देश में फैली हिंसा के मामले में बिहार का नाम सबसे आगे आ रहा है. यहां पर प्रदर्शनकारियों ने खूब उत्पात मचाया और ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया. इस अग्निपथ की आग के पीछे अब कोचिंग सेन्टर्स का नाम सामने आ रहा है. इस मामले पर पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह का कहना है कि जिन लोगों को हिंसा के मामले में गिरफ्तार किया गया उनके फोन खंगालने पर पता चला है कि व्हाट्एप के जरिए कोचिंग सेंटर्स ने हिंसक प्रदर्शन और उकसाने के मैसेज और वीडियो भेजे हैं.

उन्होंने कहा कि बिहार में हिंसक प्रदर्शन के पीछे कई कोचिंग सेंटर्स की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. उन्होंने कहा कि हिंसक प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में भी ये बात सामने आई कि 7 से 8 कोचिंग सेंटर्स ने इन लोगों के फोन पर हिंसक मैसेज व्हाट्सएप के जरिए भेजे हैं. उन्होंने कहा कि हम लोग पूरी तरह से अलर्ट पर हैं. इस मामले में 170 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है जिसमें से 46 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

विरोध प्रदर्शन को लेकर बिहार पुलिस अलर्ट पर
अग्निपथ के विरोध में हो रहे प्रदर्शन को लेकर बिहार में पुलिस अलर्ट पर है. रेलवे स्टेशनों पर अधिक संख्या में पुलिस बल को लगाया गया है. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह ने कहा है कि उपद्रव करने वालों ने खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. ऐसे लोगों को ट्रेस किया जा रहा है जो इसमें शामिल हैं. अब तक दो दर्जन से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी है. सैकड़ों उपद्रवियों की पहचान कर गिरफ्तारी भी की जा रही है.

700 नंबरों को ट्रेस करने में जुटी पुलिस : पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मोबाइल टॉवर के करीब 700 डंप डाटा लिया गया है, जो प्रदर्शन के दौरान पटना जिला में प्रदर्शन के दौरान एक्टिव था. यह 700 वैसे नंबर हैं जो RRB प्रोटेस्ट के दौरान पटना, समस्तीपुर, गया, जहानाबाद समेत दूसरे जिलों में सक्रिय था. अब इन नंबरों की जांच कर सम्बंधित मास्टरमाइंड तक पहुंचने की तैयारी में बिहार पुलिस जुटी है.

अंग्निपथ स्कीम’ से क्यों नाराज है छात्र : दरअसल, 2020 से आर्मी अभ्यर्थियों की कई परीक्षाएं हुई थी. किसी का मेडिकल बाकी था तो किसी का रिटेन. ऐसे सभी अभ्यर्थियों की योग्यता एक झटके में रद्द कर दी गई. पहले ये नौकरी स्थाई हुआ करती थी. मतलब सरकारी नौकरी का ख्वाब इससे नौजवान पूरा करते थे. नई स्कीम की तहत बताया गया कि अब चार साल की नौकरी होगी. इसमें सिर्फ 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थाई किया जाएगा. 75 प्रतिशत चार साल बाद रिटायर हो जाएंगे. उनको पेंशन समेत बाकी सुविधाएं नहीं मिलेंगी. बिहार जैसे राज्य में जहां ज्यादातर युवाओं का एक ही लक्ष्य कह लीजिए या सपना सरकारी नौकरी होता है, ऐसे में सपना टूटता देख छात्र सड़कों पर उतर गए.

युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील
हालांकि, बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि स्थिति फिर से सामान्य हो रही है और प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की. प्रसाद ने कहा कि स्थिति फिर से सामान्य हो रही है. तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं. केंद्र ने युवाओं के लिए एक अच्छी योजना बनाई है, इससे उन्हें कई लाभ होंगे. हम बिहार के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं.

‘युवाओं के हित में कदम उठाएं’
इस बीच, अखिल भारतीय छात्र संघ के नेतृत्व में बिहार में छात्र संगठनों ने सरकार द्वारा इस सप्ताह शुरू की गई सेना में नई भर्ती योजना को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए 24 घंटे के बिहार बंद का आह्वान किया है. राजद ने बंद के आह्वान को अपना समर्थन दिया है. इतना ही नहीं भाजपा के सहयोगी दल हिंदुस्तान आवाम मोर्चा-सेक्युलर (HAM-S) के अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांजी ने कहा कि उनकी पार्टी ने हिंसा का समर्थन नहीं किया, लेकिन वह बिहार बंद का समर्थन करेगी. युवाओं के हित में कदम उठाएं.

भाजपा नेताओं के घर पर हमला
प्रदर्शनकारियों ने इससे पहले बिहार की उपमुख्यमंत्री रेणु देवी और बिहार भाजपा अध्यक्ष और पश्चिम चंपारण के सांसद संजय जायसवाल के घरों पर कथित तौर पर हमला किया था. बिहार में रेलवे यातायात भी अवरुद्ध कर दिया गया था और उत्तर प्रदेश, हरियाणा और तेलंगाना जैसे कई राज्यों में ट्रेन के डिब्बों को आग लगा दी गई थी. रेलवे द्वारा अब तक 200 से अधिक ट्रेनों को रद्द करने से ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं.

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