राजधानी रांची में गोली लगने से दो लोगों की मौत, MLA इरफान अंसारी ने ₹50 लाख और सरकारी नौकरी माँगी !

mla irfan ansari on ranchi hinsa

Jharkhand Violence: भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा TV डिबेट में दिए गए एक जवाब के बाद शुक्रवार को कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए। इनमें दिल्ली, UP, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, कर्नाटक आदि प्रमुख हैं।

राजधानी राँची में पुलिस पर हमले किए गए, जिसको लेकर पुलिस ने फायरिंग की और उसमें 2 लोग मारे गए। हिंसा को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों में धारा 144 लगा दी गई और इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई। कई स्थानों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। आरोपितों के पहचान के लिए CCTV फुटेज, वीडियो आदि खँगाले जा रहे हैं।

झारखंड में जामताड़ा से कॉन्ग्रेस विधायक इरफ़ान अंसारी (Congress MLA Irfan Ansari) ने दंगाइयों की बजाय पुलिस पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने गोली चलाने पर पुलिस की निंदा करते हुए राँची SP सिटी पर कार्रवाई और मरने वालों के परिवार को 50 लाख रुपए तथा सरकारी नौकरी की माँग की है।

अब तक किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक घोषणा पुलिस की ओर से नहीं की गई है। सूत्र दावा कर रहे हैं कि पुलिस ने अराजक तत्वों की तलाश के लिए टीम गठित कर छापेमारी शुरू कर दी है। इंटरनेट सेवा को अभी बंद ही रखा गया है।

पुलिस की पहली प्राथमिकता विधि-व्यवस्था कायम रखने पर है। प्रभावित इलाकों के साथ-साथ कई संवेदनशील इलाकों में भी पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। रांची जिले के प्रशासनिक सूत्रों की माने तो राजधानी को अशांत करने की साजिश रामनवमी के समय से ही रची जा रही थी। नूपुर शर्मा को लेकर पैदा हुए ताजा विवाद से अराजक तत्वों को मौका मिल गया।

वहीँ एक ट्वीट में पुलिस की करवाई में विधायक ने सवाल खड़े किये हैं , ट्वीट में कहा रांची की घटना ने प्रदेश को शर्मसार कर दिया दिया।पुलिस का काम रक्षा करना है,गोली चलाना नहीं।
रांची में सिटी एसपी की कार्यशैली पहले से ठीक नहीं रही है।इनके कण कण में नफ़रत और भेदभाव बसा है। मेरे लाख मना करने के बाद भी इनकी पोस्टिंग कैसे रांची में कर दी गई ये सोचने का विषय है।
प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का निर्देश किसके कहने पर दिया गया।सिटीएसपी पहले से संदेह के घेरे में रहे हैं,आज की घटना उसी का परिणाम है।

अराजक तत्वों की पहचान करने में जुटी पुलिस
सूत्र दावा कर रहे हैं कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने में पुलिस जुट गई है। इसके लिए मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है। कैमरे में कैद हुई तस्वीरों की मदद से हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।

अब तक की पड़ताल में यह भी पता चला है कि भीड़ के आगे-आगे चलने वाले अधिकांश युवाओं की उम्र 16 से 25 वर्ष के करीब थी। यह लोग कुछ स्थानीय नेताओं के बहकावे में जुलूस में शामिल होने के लिए ही आए थे।

 

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