Edible Oil: सरकार ने दे दी बड़ी छूट, जानिए कितना सस्ता होगा खाना पकाने का तेल

khane ka tail hoga sasta

हाइलाइट्स
अब खाना पकाने का तेल होगा सस्ता
सरकार ने क्रूड सोयाबीन तेल और क्रूड सनफ्लावर तेल के आयात पर शुल्क खत्म कर दिया है
इससे ये दोनों तेल हर लीटर 6 रुपये तक सस्ता हो सकता है
हालांकि विदेशी बाजार में यदि इनकी कीमत चढ़ी तो फिर यहां मामूली सस्ता होगा

Edible Oil: कुकिंग ऑयल के दाम कम होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने खाने के तेल पर बड़ा फैसला लिया है। दो साल के लिए सरकार ने कस्टम ड्यूटी हटा दी है। सोयाबीन और सनफ्लावर तेल के आयात पर कस्टम ड्यूटी को खत्म की गई है। कृषि और बुनियादी शुल्क और विकास सेस को भी शून्य कर दिया है। सरकार का यह फैसला 24 मई को आधी रात से प्रभावी हो गया है।

वित्त मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार क्रूड सोयाबीन तेल और क्रूड सूरजमुखी ऑयल के दो वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 के लिए प्रति वर्ष 20 लाख मीट्रिक टन का आयात मुफ्त किया गया है। सरकार ने कहा, ‘कस्टम्स ड्यूटी, एग्रीकल्चरल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट सेस को समाप्त किया गया है। इन टैक्सों की अदायगी के बिना कुकिंग ऑयल को आयात करने की अनुमति रहेगी।’

फैसले से मिलेगी राहत
वित्त मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को जारी अधिसूचना के अनुसार सालाना 20 लाख टन कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 में इंपोर्ट टैक्स नहीं लगाया जाएगा।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने एक ट्वीट में लिखा, यह फैसला उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करेगा।

मालूम हो कि सरकार ने तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पिछले सप्ताह पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाया था। साथ ही इस्पात और प्लास्टिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कुछ कच्चे माल पर आयात शुल्क भी हटाने का निर्णय लिया था।

चीनी निर्यात को किया जाएगा सीमित
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार अब चीनी निर्यात को भी सीमित कर सकती है। चालू सीजन 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) में 75 लाख टन चक्कर का निर्यात हो चुका है। इसे 100 लाख टन तक सीमित किया जा सकता है। फिलहाल चीनी की खुदरा कीमत 41.50 रुपये प्रति किलोग्राम है। अगले कुछ महीनों में 40-43 रुपये प्रति किलोग्राम तक रह सकती है। निर्यात बढ़ने पर इस कीमत में और इजाफा हो सकता है। खुदरा महंगाई को मापने में कपड़ों को भी शामिल किया जाता है। इसलिए कपड़ों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार कॉटन के आयात को शुल्क मुक्त कर सकती है। जिसे घरेलू गारमेंट निर्माताओं को सस्ती दरों पर कॉटन यार्न मिल सके। दो तिमाही पहले घरेलू बाजार में कॉटन की कीमत 55,000 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) थी। जो अभी 1.10 लाख रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गई है।

घरेलू बाजार में कितना सस्ता होगा तेल
खाद्य तेल क्षेत्र की शीर्ष संस्था सेंट्रल आर्गनाइजेशन ऑफ ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (COOIT) के अध्यक्ष सुरेश नागपाल का कहना है कि यदि विदेशी बाजार में क्रूड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सनफ्लावर ऑयल की कीमतें यथावत रही तो निश्चित रूप से कीमतें घटेंगी। कितनी घटेंगी कीमतें, इस पर उनका कहना है कि प्रति लीटर छह रुपये तक कीमतें नरम होंगी।

अक्टूबर-नवंबर में और घटेंगी कीमत
देश में सोयाबीन की नई फसल अक्टूबर-नवंबर तक आती है। उससे पहले यदि 40 लाख टन खाद्य तेलों का शुल्क मुक्त आयात होगा तो इससे कीमतें काबू में रहेंगी। 40 लाख टन का मतलब है कि हर महीने 3.7 लाख टन सोयाबीन और सूर्यमुखी के तेलों का शुल्क मुक्त आयात होगा। इसके अलावा हर महीने करीब 3.5 लाख टन घरेलू सरसों का तेल भी बाजार में आ रहा है। इससे भी दाम काबू में रखने में काफी हद तक मदद मिलेगी। घरेलू क्रॉप आने के बाद इसकी कीमतें और घटेंगी।

इस बार भी कुछ उसी तरह का सीन
भारत सरकार ने कल रात में दो तेलों पर ड्यूटी खत्म करने की अधिसूचना जारी की। लेकिन इससे पहले ही खबर तेल के कारोबारियों तक पहुंच गई थी। तभी तो कल शाम में ही मलेशिया एक्सचेंज में खाद्य तेलों के दाम में 3.25 प्रतिशत की तेजी दिखी थी। वहां खाद्य तेल के दाम में प्रति टन 80 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी दिखी। इसी तरह शिकागो एक्सचेंज में भी लगभग एक प्रतिशत की तेजी दिखी थी। यदि इसी तरह तेजी कायम रही तो घरेलू बाजार में मामूली कमी आने की संभावना है। दूसरी ओर, इससे देश को राजस्व का नुकसान ही होगा।

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