देश की पहली रैपिड ट्रेन हवाई जहाज जैसी, ऐसे आने हैं और 39 ट्रेन सेट, मेट्रो से तीन गुना रफ्तार!

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सार
दावा है कि रैपिड रेल के सभी कोच अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे. इसकी सीटें हवाई जहाज जैसी होंगी. इस साल के अगस्त तक रैपिड रेल का फुल स्पीड पर ट्रायल होने की उम्मीद है.

Rapid Rail: दिल्ली-मेरठ रूट पर चलाई जाने वाली देश की पहली रैपिड ट्रेन भारत सरकार को सौंप दी गई है। इसका रनिंग रूट भी तैयार कर लिया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम यानी NCRTC ने इसका ट्रायल रन अगस्त में तय किया है।

180 किमी/घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली ये ट्रेन फेज-1 में साहिबाबाद से दुहाई डिपो तक 17 किमी एरिया में चलाई जाएगी। महज 62 मिनट में दिल्ली से गाजियाबाद होते हुए ये मेरठ पहुंचेगी। यानी कुल-मिलाकर इसे हम बुलेट ट्रेन का ट्रेलर मान सकते हैं।

ऐसे आने हैं और 39 ट्रेन सेट
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर 82 किलोमीटर लंबा है। रीजनल रैपिड रेल का पहला स्टेशन दिल्ली के सराय काले खां में है। आखिरी स्टेशन मेरठ के मोदीपुरम में होगा। इस प्रोजेक्ट पर करीब 40 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। रैपिड रेल के सभी कोच गुजरात के सांवली में एल्सटॉम कंपनी के प्लांट में तैयार किए गए हैं।

रैपिड रेल की मेट्रो से 3 गुना रफ्तार

रैपिड रेल, मेट्रो रेल से तीन गुना रफ्तार (180 किलोमीटर प्रति घंटा अधिकतम) से चलने वाली है. शुरुआत में गाजियाबाद के दुहाई डिपो में ट्रायल ट्रैक तैयार हुआ है. यह करीब एक किलोमीटर लंबा ट्रैक है. इसी ट्रैक पर मॉडल कोच को गुजरात से लाकर खड़ा किया गया है. रैपिड रेल के ब्रेक सिस्टम अत्याधुनिक हैं. ब्रेक लगने पर पटरियों पर करीब 30 फीसदी ऊर्जा पैदा होगी, जिसे इस्तेमाल में लिया जाएगा. मॉडल कोच की विंडो पर यह पोस्टर लगाया गया है कि यह देश की पहली रैपिड रीजनल रेल है जो दिल्ली से मेरठ के बीच चलेगी.

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