झारखण्ड,यूपी, एमपी, गुजरात, असम में सबसे ज्यादा क्रॉस वोटिंग, यशवंत सिन्हा को कांग्रेस व राजद से केवल 9 वोट मिले !

JHARKHAND PRESIDENT ELECTION CROSS VOTING

RANCHI : देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने जा रहीं द्रौपदी मुर्मू के चेहरे के आधार पर BJP ने विपक्षी एकता में बड़ी सेंधमारी की है। मुर्मू के पक्ष में 13 राज्यों के 119 विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने का दावा किया जा रहा है। खासतौर पर उन राज्यों में क्रॉस वोटिंग ज्यादा हुई है, जहां पर कांग्रेस सत्ता पक्ष या विपक्ष में है। इसके अलावा 17 सांसदों ने भी इस राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग की है।

2022, 2023 और 2024 में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के संदर्भ में कांग्रेस के लिए यह खतरे की घंटी है। दिलचस्प यह है कि मुर्मू की जीत के जश्न को जिस तरह से देशभर में भाजपा मना रही है, यह भी एक बड़ा राजनीतिक मैसेज है।

यह है चुनावी गणित
राज्य में कुल 80 विधायकों ने वोट डाले

चुनाव के वक्त ये था एनडीए का आंकड़ा

भाजपा 25

झामुमो 30

आजसू 02

एनसीपी 01

निर्दलीय 02

सरयू राय व अमित यादव

कुल- 60 विधायकों का वोट

द्रौपदी ने सत्ता पक्ष के विधायकों से भी मांगे थे वोट :
एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का राज्यपाल रहते हुए झारखंड से संपर्क था. इसका भी फायदा श्रीमती मुर्मू को मिला. उन्होंने कांग्रेस व झामुमो के विधायकों को फोन कर वोट की अपील की थी. सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने बताया कि श्रीमती मुर्मू का फोन उनके पास आया था.

चुनाव में यूपीए के यशवंत सिन्हा के पक्ष में जो आंकड़ा था
कांग्रेस 18

राजद 01

माले 01

कुल 20 विधायकों का वोट

(इसी वोट में सेंधमारी हुई)

एनडीए ने यूपीए के 20 वोट में आधे झटक लिये
रांची. यूपीए के पास 20 विधायकों के ही ही थे. एनडीए ने इस वोट में भी सेंधमारी कर दी. एनडीए ने आदिवासी महिला को उम्मीदवार बनाया और राजनीतिक दांव चला. भाजपा के नेताओं ने विपक्ष से आदिवासी के नाम पर वोट देने की अपील की थी. कांग्रेस के आदिवासी विधायकों पर भरोसा था. इसके साथ ही महिला प्रत्याशी श्रीमती मुर्मू के लिए कांग्रेस की महिला प्रत्याशी से भी संपर्क किया गया था. राजद से मंत्री सत्यानंद भोक्ता भी भाजपा नेताओं के संपर्क में थे. विधायक भानु प्रताप शाही ने तो सोशल मीडिया पर लिखा था कि झारखंड में द्रौपदी मुर्मू को 70 से 71 वोट मिलेंगे.

पहले प्रत्याशी के नाम पर विपक्षी एकता में पड़ी थी फूट
सबसे पहले विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा के नाम का ऐलान राष्ट्रपति प्रत्याशी के तौर पर किया गया था। बाद में भाजपा ने ट्रंप कार्ड के तौर पर द्रौपद्री मुर्मू का नाम घोषित किया। मुर्मू आदिवासी समाज से आती हैं। द्रौपदी का नाम सामने आते ही विपक्षी एकता में फूट पड़ गई गई। सबसे पहले BJD और YSR कांग्रेस ने समर्थन देने का ऐलान किया था। उसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने समर्थन किया, जबकि झारखंड में कांग्रेस के साथ मिलकर हेमंत सोरेन सरकार चला रहे हैं।

जबकि, विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा भी झारखंड से ही चुनाव लड़ते रहे हैं। बाद में शिवसेना के उद्धव ठाकरे के गुट ने आदिवासी महिला के नाम पर समर्थन दिया था। बड़ी बात यह है कि कांग्रेस के विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग की है।

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