फर्जी TTE बनकर यात्रियों से कर रहे थे उगाही, नकली जॉइनिंग लेटर और आईकार्ड भी बरामद !

farzi tte arrested

सार
दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर ड्यूटी कर रहे 11 फर्जी टीटीई को गिरफ्तार किया गया है। ये 15 दिनों से प्लटफॉर्म पर ड्यूटी कर रहे थे। आरपीएफ ने इन्हें रेलवे पुलिस के हवाले कर दिया है।

Delhi Police Action Against Fake TTEs: दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की रेलवे यूनिट (Railway Unit) ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो रेलवे विभाग (Railway Department) के समकालीन काम कर रहा था और जनता के साथ ठगी (Cheating) कर रहा था. पुलिस (Police) ने फिलहाल इस रैकेट के दिल्ली मॉड्यूल (Delhi Module) के सरगना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, साथ ही छह लोगों को हिरासत में लिया है.

पुलिस को आरोपियों के पास से रेलवे के फर्जी आईकार्ड (Fake ID Card), अपॉइंटमेंट लेटर आदि बरामद हुए हैं. दिल्ली पुलिस का दावा है कि यह ग्रुप ट्रेन (Train) में फर्जी टीटीई (Fake TTE) बनकर उगाही करता था. पुलिस को मामले में गिरोह के पंजाब मॉड्यूल (Punjab Module) की तलाश है. गिरफ्तार आरोपियों के नाम मोहम्मद रिजवान, भूपेंद्र चौरसिया, गगनदीप सिंह, गौरव कुमार और अमनदीप हैं.

डीसीपी रेलवे ने यह जानकारी दी

डीसीपी रेलवे हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि 30 अगस्त को कानपुर शताब्दी में एक फर्जी टीटीई को पकड़ा गया था. उसके पास से मोबाइल में रेलवे का एक आईकार्ड भी बरामद किया गया था, जो कि जांच में फर्जी पाया गया. आरोपी की पहचान भूपेंद्र चौरसिया के रूप में की गई. भूपेंद्र चौरसिया ने पुलिस को बताया कि उसने रेलवे में नौकरी पाने के लिए प्रशांत शुक्ला नाम के एक व्यक्ति को पैसे दिए थे. प्रशांत ने ही उसे ये फर्जी आईकार्ड दिलवाया था. भूपेंद्र ने पुलिस को यह भी बताया कि उसे कहा गया है कि उसकी ट्रेनिंग चल रही है और उस जैसे कई अन्य लड़के भी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेनिंग कर रहे हैं.

जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि रिजवान नाम का एक व्यक्ति इन लोगों की अटेंडेंस लेता है और वही दिल्ली मॉड्यूल का सरगना भी है. पुलिस ने अजमेरी गेट साइड से रिजवान को पकड़ा, जिसने टीटीई की ड्रेस पहनी हुई थी. उसके मोबाइल से भी एक फर्जी आईकार्ड बरामद किया गया.

ट्रेनिंग कर नाम पर की जा रही थी उगाही
पूछताछ में रिजवान ने पुलिस को बताया कि उसने रेलवे में नौकरी पाने के लिए संदीप नाम के एक व्यक्ति को दो लाख रुपये दिए थे. संदीप के कहने पर ही वह अन्य लड़कों की अटेंडेंस लगा रहा था. पुलिस ने रिजवान की निशानदेही पर तीन अन्य युवकों को पकड़ा. जिनके नाम गौरव कुमार, गगनदीप सिंह और अमनदीप हैं. ये तीनों पंजाब के रहने वाले हैं. इन तीनों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि इन्होंने रेलवे में नौकरी के नाम पर सुखदेव सिंह नामक एक व्यक्ति को लगभग 23 लाख रुपये दिए थे. सुखदेव सिंह पंजाब के होशियारपुर का रहने वाला है. पुलिस को इन लड़कों के पास से फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर भी मिले.

पुलिस ने छह अन्य लड़कों को भी पकड़ा लेकिन उनके पास से अब तक किसी प्रकार का कोई दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है. इनके नाम देवेश कुमार, सिद्धार्थ शर्मा, मनोज कुमार, विनय कुमार, परमिंदर सिंह और आशीष कुमार हैं. इन लोगों ने पुलिस को बताया कि किसी मिश्रा नामक व्यक्ति ने इन्हें रेलवे में नौकरी दिलाने का वादा किया था और उसके एवज में पैसे मांग थे जो कि अब तक नहीं दिए हैं.

आरपीएफ के सीनियर डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर अपूर्व अग्निहोत्री के अनुसार आरपीएफ की नई दिल्ली क्राइम टीम और कमर्शियल स्टाफ की संयुक्त टीम ने इस फर्जीवाड़े को स्टेशन पर पकड़ा है। स्टेशन से कुल 11 लोगों को पकड़ा गया, जिनमें से पांच के पास फर्जी नियुक्ति पत्र और आई कार्ड मिले हैं। इस मामले को लेकर आईपीसी की धारा 419,420,468,471 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस का कहना है कि मास्टरमाइंड ने पकड़े गए लोगों को शक नहीं होने दिया कि उन्हें दिए गए दस्तावेज फर्जी हैं। उसने जान बूझकर इन्हें ऐसी ड्यूटी दी जिससे वे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पकड़े न जाएं। उन्हें टिकट जांच की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। उन्हें केवल ट्रेन से संबंधित जानकारी नोट करने के लिए कहा गया था। पुलिस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है।

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