Jharkhand Sand Crisis : राज्य में बालू संकट से 4 लाख मजूदरों की रोजी-रोटी पर आफत, सीएम से मांग काम दो या भत्ता दो !

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सार
सीएम सोरेन द्वारा राज्य में अवैध बालू के उत्खनन एवं परिवहन के खिलाफ रोक लगाने के निर्देश का पालन करते हुए जिला प्रशासन द्वारा छापेमारी की जा रही है. इस कारण झारखण्ड के कई जिले में बालू का संकट उत्पन्न हो गया है. बालू संकट से सीधे तौर पर आधारभूत संरचना से संबंधित निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं. भवन निर्माण से संबंधित प्रोजेक्ट भी अधर में लटक गए हैं जिससे लाखों मजदूर की रोजी-रोटी पर असर पड़ने लगा है !

Jharkhand News : झारखंड में व्याप्त बालू संकट केंद्र और राज्य सरकार की अकर्मण्यता की देन है। केंद्र और राज्य सरकार के गलत फैसले की चक्की में राज्य के निर्माण मजदूर पीस रहे हैं। गरीब मजदूरों की रोजी रोटी पर सरकार बुलडोजर चलाना बंद करे और बालू माफिया पर कार्रवाई करें। उक्त बातें महेंद्र सिंह भवन रांची में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए शुभेंदु सेन ने कही।

उन्होंने कहा कि 13 जून को राज्य भर में मांग दिवस मनाया जाएगा। काम दो या भत्ता दो की आवाज बुलंद की जाएगी। निर्माण मजदूर यूनियन के महासचिव भुवनेश्वर केवट ने कहा कि एनजीटी गाइड लाइन और राज्य सरकार की लापारवाही के कारण बालू संकट, माइंस, क्रसर, ढीबरा मजदूरों के रोजगार का संकट बढ़ा है। जिससे राज्यभर के 4 लाख मजूदरों को रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार संकट में फंसे मजदूरों की रोजगार की व्यवस्था करें या भत्ता भुगतान की गारंटी करें। अन्यथा एक्टू रांची और झारखंड निर्माण मजदूर यूनियन के सदस्य काम दो या भत्ता दो की आवाज बुलंद करेंगे…।

श्रमिक मित्र के नेता पुष्कर महतो ने कहा कि कोविड त्रासदी से परेशान मजूदरों को सरकार रोजगार देने के बजाए रोजगार छीनने का काम कर रही है। राज्य के असंगठित मजदूरों के हित में फैसला ले। सभी मजदूरों को रोजगार नहीं मिलने तक वैकल्पिक बेरोजगारी भत्ता की गारंटी करे।

पूरे राज्य में बालू का संकट गहराया
बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जमशेदपुर शाखा के अध्यक्ष प्रभाकर सिंह ने कहा कि सरकार की अदूरदर्शिता के कारण पूरे राज्य में बालू का संकट उत्पन्न हुआ है. प्रत्येक वर्ष 10 जून से 15 अक्टूबर तक एनजीटी द्वारा बालू उठाव पर रोक लगाई जाती है. इसको लेकर सरकार को पहले से ही तैयारी करनी चाहिए थी. पिछले एक वर्ष से राज्य में बालू घाटों की बंदोबस्ती नहीं किए जाने के कारण ही बिल्डर्स और ठेकेदार बालू संकट से जूझ रहे हैं.

महंगी कीमत पर बिक रहा है अवैध बालू
विभिन्न जिलों में बालू घाटों का टेंडर नहीं किया गया है. आधिकारिक रूप से रांची में ही पिछले दो वर्ष से बालू का खनन बंद है. अवैध उठाव कर बाजार में बेचा जा रहा है. माफिया बालू का उत्खनन कर मुंहमांगी कीमत पर बालू बेच रहे हैं. 15,000 रुपये हाइवा (600 सीएफटी) की कीमत बढ़ कर 22,000 रुपये तक पहुंच गयी है. इसी तरह 3,000 रुपये ट्रक (130 सीएफटी) की कीमत बढ़ कर 5,000 रुपये तक पहुंच गयी है.

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