फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर के समर्थन में आया एडिटर्स गिल्ड, कहा- दुष्प्रचार करने वाले ऑल्ट न्यूज़ के ख़िलाफ़

editor guild mohammad zubair

सार
ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक और फैक्ट चेकर मोहम्मद ज़ुबैर को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किए जाने की निंदा करते हुए एडिटर्स गिल्ड ने उनकी फ़ौरन रिहाई की मांग की है. वहीं, ऑनलाइन प्रकाशकों के संगठन डिजिपब ने पत्रकारों के ख़िलाफ़ क़ानून के इस तरह इस्तेमाल को अनुचित बताते हुए पुलिस से मामला वापस लेने का आग्रह किया है.

New Delhi : ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर और फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं. कांग्रेस, सपा समेत अन्य राजनीतिक दलों के बाद अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का बयान सामने आया है. प्रेस नोट के जरिए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा की और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर को धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया है. दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने सेक्शन 153 ए और 295 ए के तहत उन्हें अरेस्ट किया है. ये गिरफ्तारी सोमवार (27 जून) की गई जिसके बाद कोर्ट से एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया.

एक यूजर ने जुबैर पर लगाए थे आरोप

जुबैर की गिरफ्तारी पर कानूनी प्रक्रिया से लेकर अन्य पहलुओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं. अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बयान जारी किया है. इसमें 2018 के एक ट्वीट के लिए मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा की गई है.

एडिटर्स गिल्ड ने अपने प्रेस स्टेटमेंट में कहा- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 2020 के एक केस में जुबैर को पूछताछ के लिए बुलाया था. इस मामले में पहले से ही दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से गिरफ्तारी पर रोक लगी है. हालांकि, जब जुबैर ने समन का जवाब दिया तो उन्हें 2018 के एक धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. ये आरोप एक गुमनाम ट्विटर हैंडल के यूजर ने लगाए थे.

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने सोमवार, 27 जून को जुबैर की अचानक गिरफ्तारी के बाद इन पहलुओं को ट्विटर पर साझा किया था. प्रतीक सिन्हा ने ट्वीट कर बताया, ‘दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आज (सोमवार) सुबह मोहम्मद जुबैर को 2020 में दर्ज एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था. इस मामले में उन्हें हाईकोर्ट से पहले ही गिरफ्तारी से संरक्षण मिला हुआ था.’

उन्होंने आगे लिखा था, ‘हालांकि शाम 6:45 बजे हमें बताया गया कि उन्हें एक अन्य एफआईआर के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसके लिए कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था, जो उन धाराओं के ​तहत जरूरी है, जिनके तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया है. इतना ही नहीं बार-बार आग्रह के बाद भी हमें एफआईआर कॉपी नहीं दी गई है.’

इस बीच दिल्ली पुलिस ने बताया कि वर्तमान मामला ट्विटर पर हनुमान भक्त @balajikijaiin हैंडल द्वारा एक पोस्ट के आधार पर दर्ज किया गया है, जिसमें मोहम्मद जुबैर के एक ट्वीट को लेकर आपत्ति जताई गई है. इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था, ‘2014 से पहले: हनीमून होटल और 2014 के बाद: हनुमान होटल.’

दिल्ली पुलिस के अनुसार, (ट्वीट में) एक तस्वीर दिखाई गई थी, जिसमें ‘हनीमून होटल’ के साइनबोर्ड को बदलकर ‘हनुमान होटल’ किया गया है. हनुमान भक्त @balajikijaiin ने ट्वीट किया, ‘हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है, क्योंकि वह ब्रह्मचारी हैं. कृपया इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करें.’

हालांकि, सोशल मीडिया पर लोगों ने पाया कि पुलिस के दावे के मुताबिक 2018 की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली जुबैर की पोस्ट असल में हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘किसी से न कहना’ के एक दृश्य का स्क्रीनशॉट है.


इस पोस्ट ने खड़ा किया था विवाद
जुबैर ने फिल्म निर्माता ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म किसी से ना कहना का एक क्लिप शेयर किया था। इसमें एक होटल के बाहर बोर्ड नजर आ रहा है, जिस पर हिंदी में हनुमान होटल लिखा हुआ था। हालांकि उस बोर्ड पर पेंट के निशान से पता चलता है कि इसे पहले हनीमून होटल कहा जाता था और फिर हनीमून को बदलकर हनुमान कर दिया गया। जुबैर ने इस पोस्ट के कैप्शन में लिखा था बिफोर 2014 हनीमून होटल, आफ्टर 2014 हनुमान होटल।

नूपुर के खिलाफ प्रदर्शनों के पीछे जुबैर का हाथ
भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा और निष्कासित नेता नवीन कुमार जिंदल द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित विवादास्पद टिप्पणी को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे, इसके साथ ही कुछ जगहों पर हिंसा भड़क गई थी। कथित तौर पर इन प्रदर्शनों को भी ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने हवा दी थी।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल भी उठे
AltNews के को-फाउंडर प्रतीक सिन्हा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। सिन्हा का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने अन्य मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन गिरफ्तारी दूसरे मामले में हुई है। उन्होंने कहा कि जुबैर को दूसरे मामले के लिए किसी तरह की नोटिस भी नहीं दी गई। बार-बार अनुरोध के बावजूद हमें FIR की कॉपी भी नहीं दी जा रही है।

प्रतीक ने दावा किया है कि मेडिकल जांच के बाद जुबैर को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा है। पुलिस वालों ने अपने नाम का टैग भी नहीं लगाया है। जुबैर के वकीलों को इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है। प्रतीक के मुताबिक, पुलिस वैन में वे भी हैं।

राहुल गांधी ने की गिरफ्तारी की निंदा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट में कहा कि BJP की नफरत, कट्टरता और झूठ को जो भी उजागर करता है, ऐसा हर शख्स उनके लिए खतरा हो जाता है। उन्होंने कहा कि अत्याचार पर हमेशा सत्य की विजय होती है। सच की आवाज उठाने वाले एक शख्स को गिरफ्तार करने पर हजार और सामने आएंगे।

ओवैसी ने गिरफ्तारी का विरोध किया
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी अत्यंत निंदनीय है। उन्हें बिना किसी नोटिस के किसी अज्ञात FIR में गिरफ्तार किया गया है। यह कानून का उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा कि नफरती नारे लगाने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस कोई कदम नहीं उठाती है, लेकिन सच्चाई को सामने लाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है।

एडिटर्स गिल्ड ने गिरफ्तारी को गलत बताते हुए मांग की है कि दिल्ली पुलिस मोहम्मद जुबैर को तुरंत रिहा करे.

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