ठेकेदार का कारनामा, दो पटरियों के बीच खड़ा किया बिजली का पोल, रेलवे ने कहा – “सही तो लगा है!”

do patri ke beech electric pol

Sagar News : मध्य प्रदेश के सागर जिले में चल रहा रेलवे (Railway) की थर्ड लाइन का काम एक खंभे की वजह से चर्चा में आ गया है. हुआ ये कि यहां एक रेलवे ट्रैक के बीच में बिजली का खंभा (Electric Poll) का लगा दिया गया. लोग इसे लेकर रेलवे का मजाक उड़ा रहे हैं. हालांकि रेलवे का कहना है कि काम में कोई गलती नहीं हुई है.

सागर। रेलवे ट्रैक के बीचोंंबीच अगर बिजली का खंबा नजर आए तो जेहन में सबसे पहले यह सवाल आएगा कि आखिर इस ट्रैक पर ट्रेन कैसे चलेगी ? काफी माथापच्ची के बाद भी समझ नहीं आएगा कि रेलवे ने आखिर यह किया क्या है. दरअसल, बीना-कटनी रेल लाइन पर तीसरी रेलवे लाइन का काम चल रहा है. नरयावली और ईशरवारा के बीच रेलवे की शानदार इंजीनियरिंग का नमूना देखने मिला है. यहां ट्रैक के बीचोंंबीच तीसरी लाइन में बिजली का खंभा नजर आ रहा है. खास बात ये है कि बिजली के खंभे पर ओएचई लाइन लगा दी गई है. (Sagar Electric pole on railway track) (ohe line construction sagar bina rail route)

अब ये करेगा रेलवे : इस मामले में रेलवे के निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर प्रभात कुमार का कहना है कि जो गड़बड़ी हुई है, वह निर्माण एजेंसी से ही ठीक कराई जाएगी. जो बिजली का खंभा अभी रेलवे ट्रैक के बीच दिख रहा है, वह रेलवे लाइन के शिफ्ट होते ही ट्रैक के बाहर हो जाएगा. ईशरवारा में नई रेलवे स्टेशन की इमारत का काम चल रहा है. नई स्टेशन बनने के बाद पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर लाइन बिछाई जाएगी. तब यह काम निर्माण एजेंसी को करना होगा।

नुकसान का कौन भुगतेगा खामियाजा : रेलवे भले इसके लिए निर्माण एजेंसी को जिम्मेदार ठहरा रहा हो लेकिन जानकारों के मुताबिक ये गलती रेलवे के निर्माण विभाग और विद्युत विभाग के बीच समन्वय न होने के कारण हुई है. अगर दोनों विभागों में परस्पर समन्वय होता तो निर्माण एजेंसी ऐसी गलती नहीं करती और अगर करती तो कोई ना कोई विभाग उसकी गलती में सुधार करवाता. अब इस गलती को सुधारने में रेलवे को अतिरिक्त खर्चा करना होगा और अतिरिक्त समय भी लगेगा, जो तीसरी लाइन के देरी से चालू होने की वजह बनेगा.

विभाग ने क्या कहा?
बहरहाल, रिपोर्ट के मुताबिक विभाग के अधिकारी गलती होने के बाद भी इसे मानने को तैयार नहीं हैं. जबलपुर मंडल के सीपीआरओ राहुल श्रीवास्तव का कहना है,

“ईसरवारा स्टेशन के पास एनआई (नॉन-इंटरलॉकिंग) अभी प्रस्तावित है जहां डबल लाइन बिछनी है. प्लान के अंतर्गत उस लाइन में जो अभी पुराना स्टेशन है, उसकी बिल्डिंग लाइन के रास्ते में आ रही है. जो भी प्लान है वो पहले से तैयार किया हुआ है. उसके हिसाब से ही काम हो रहा है. जब हम डबल लाइन बिछाते हैं, तो उसके लिए पहले मटेरियल की जरूरत होती है, स्लीपर की जरूरत होती है. उसके लिए कुछ टेंपरेरी लाइन बिछानी पड़ती है.”

रेलवे विभाग के नियमानुसार अर्थवर्क के दौरान ही सेंटर ट्रैक के हिसाब से काम शुरू होता है. इसके बाद स्लीपर, गिट्टी और ट्रैक बिछाया जाता है. सेंटर ट्रैक से 3.10 मीटर की दूरी पर फाउंडेशन तैयार कर खंभे लगाए जाते हैं. अब ट्रैक का अलाइनमेंट मिलने के लिए 1 किलोमीटर की लाइन को इलेक्ट्रिक लाइन के हिसाब से शिफ्ट करना होगा। इस काम में लाखों रुपए का खर्च आएगा और तीन से चार हफ्तों का अतिरिक्त समय भी लगेगा.

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