श्रीलंका का जिक्र कर बोले राजन, अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाया तो देश बंट जाएगा !

RAGHURAM RAJAN ON MINORITIES

सार
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने रायपुर में कहा कि देश के अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश देश के लिए ठीक नहीं है. राजन ने कहा कि भू-राजनीतिक विकास के इस युग में यह हमें कमजोर बना देगा और विदेशी दखल को आमंत्रित करेगा. इस बात को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने श्रीलंका का उदाहरण दिया.

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए रघुराम राजन ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने का कोई भी प्रयास देश को विभाजित करेगा और आंतरिक दरार पैदा करेगा। ये देश के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

पूर्व गवर्नर के मुताबिक ये बहुसंख्यकवाद और सत्तावाद का सामना करने का समय है। ऐसे में वो अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे के नागरिकों में बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध करते है। उनका मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो भू-राजनीतिक विकास के इस युग में ये हमें कमजोर बना देगा और इससे विदेशी दखल बढ़ सकती है। अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने श्रीलंका की मौजूदा स्थिति का उदाहरण लिया।

रघुराम राजन ने कहा कि आप दक्षिण में स्थित पड़ोसी देश श्रीलंका को देखिए, जब भी कोई देश रोजगार पैदा करने में विफल रहता है और अल्पसंख्यकों पर हमला करने की कोशिश करता है, तो ये उसके लिए अच्छा नहीं साबित होता। हमारा भविष्य उदार लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं को मजबूत करने में है, ना कि इसे कमजोर करने में। वहीं उदारवाद की अवधारणा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मुझे इस बात पर जोर देना चाहिए कि उदारवाद धर्म विरोधी नहीं है। प्रत्येक धर्म का सार प्रत्येक में अच्छाई तलाशना है। ये उदार लोकतंत्र का सार भी है। इसे सभी को समझना चाहिए।

धर्म विरोधी नहीं है उदारवाद: राजन
उदारवाद की अवधारणा पर उन्होंने कहा, “उदारवाद धर्म विरोधी नहीं है. प्रत्येक धर्म का सार सभी में अच्छाई तलाशना है. यह उदार लोकतंत्र का सार भी है.” राजन ने कहा कि वह इस विचार का विरोध करते हैं कि भारत को विकास के लिए सत्तावादी नेतृत्व की आवश्यकता है. साथ ही कहा कि यह “विकास के पुराने मॉडल पर आधारित है जो वस्तुओं और पूंजी पर जोर देता है, न कि लोगों और विचारों पर.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News