कोल इंडिया के बाद BCCL के निजीकरण की ओर बढ़ रही सरकार, सरकार के इस फैसले से से भड़कीं यूनियनें !

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सार
बीसीसीएल का विनिवेश हुआ तो ट्रेड यूनियनें आंदोलन करेंगी। यूनियन नेताओं ने विनिवेश संबंधी खबर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बीसीसीएल के हित में नहीं…

Dhanbad News : कोल इंडिया ने अपनी अनुषंगी कंपनी बीसीसीएल में 25 प्रतिशत विनिवेश करने का फैसला लिया है। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बीसीसीएल में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के फैसले से कोयलांचल की मजदूर राजनीति गरमा गई है। बीएमएस समेत सभी श्रमिक संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। आरोप लगाया है कि सार्वजनिक क्षेत्र को एक-एक कर निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद रमेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार ने पहले कोल इंडिया का शेयर बेचा। अब एक-एक कर अनुषंगी कंपनियों का शेयर बेचेगी। बीसीसीएल समेत पूरे कोल इंडिया को निजीकरण की ओर ले जाया जा रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र को सरकार चलाना नहीं चाहती है। इसी कारण विनिवेश की नीति पर काम कर रही है। इसका विरोध करते हैं। उन्‍होंने कहा कि संयुक्त मोर्चा अस्तित्व में नहीं है। इस कारण अभी संयुक्त लड़ाई नहीं हो सकती है।

सूत्रों की मानें तो केंद्र द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को अपनी सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी का निजीकरण या विनिवेश करने की योजना है। कोल इंडिया की दो सहायक कंपनियों भारत कोकिंग कोल लिमिटेड और कंसल्टेंसी कंपनी सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट में से प्रत्येक में 25% हिस्सेदारी बेचेगी। अब तक इन दोनों कंपनियों में पहले कभी विनिवेश नहीं हुआ है। कहा यहां तक जा रहा है कि विनिवेश पर सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है।

इंटक के राष्‍ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के अध्‍यक्ष सह बेरमो के विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह ने कहा कि कोल इंडिया के इस फैसले से बीसीसीएल निजीकरण की ओर जाएगी। वैसे यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। उन्‍होंने कहा कि कोल इंडिया का निजीकरण कमोबेश सरकार पहले ही कर चुकी है। पहले कोल इंडिया में शेयर बेचा। अब एक-एक कर अनुषंगी कंपनियों की शेयर बेची जाएगी। विरोध कर हम सरकार को फैसला बदलने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। जितना विरोध होगा, सरकार उतनी ही तेजी से कंपनियों को बेचेगी। इसका एक ही रास्ता है, इस सरकार को बदलना।

बीसीसीएल के एक अधिकारी ने बताया कि बीसीसीएल को चालू वित्तीय वर्ष में 191 करोड़ का मुनाफा जरूर हुआ है लेकिन विनिवेश लायक स्थिति नहीं है। बीसीसीएल ने वित्त वर्ष 2011 में 919 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ की तुलना में वित्त वर्ष 2011 में 1209 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। कुल मिला कर देखा जाए तो कंपनी संचित घाटे में ही है। कंपनी के टर्न ओवर में में भी कमी हुई है। हां सीएमपीडीआईएल लगातार मुनाफे में है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि 18 मई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सीपीएसई के बोर्डों को निजीकरण, विनिवेश या अपनी सहायक कंपनियों को बंद करने और संयुक्त उद्यमों में हिस्सेदारी बेचने का अधिकार दिया है। इसी के बाद बीसीसीएल-सीएमपीडीआईएल के विनिवेश की चर्चा है।

सीटू ने भी विनिवेश संबंधी योजना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यूनियन नेता मानस चटर्जी ने कहा कि बीसीसीएल के विनिवेश के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे। किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगी। विनिवेश के रास्ते बीसीसीएल को निजी हाथों में देने की साजिश हो रही है।

इंटक ने भी विरोध किया है। यूनियन नेता एके झा ने कहा कि केंद्र सरकार धीरे-धीरे सार्वजनिक प्रतिष्ठानों का निजीकरण करने की दिशा में बढ़ रही है। कोयला पर सरकार की पहले नजर है। बीसीसीएल कोकिंग कोल के कारण सबसे महत्वपूर्ण कंपनी है। इसलिए बीसीसीएल के विनिवेश को लेकर जलदबाजी की जा रही है। सभी यूनियनों को एक मंच पर आकर इसका विरोध करना होगा।

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