Gyanvapi Masjid: ज्ञानवापी मामले पर फैसला सोमवार को; वाराणसी में निषेधाज्ञा लागू

Gyanvapi Masjid controversy

सार
वाराणसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पोषणीयता पर सवाल उठाया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज को सुनवाई पूरी कर फैसला देने के लिए कहा था।

Gyanvapi Masjid controversy: ज्ञानवापी परिसर के मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग को लेकर दायर याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं इस पर वाराणसी की अदालत सोमवार को अपना फैसला सुनाएगी. इसके मद्देनजर नगर में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. सभी पुलिस अधिकारियों को अपने क्षेत्रों के धर्म गुरुओं के साथ संवाद करने का निर्देश दिया गया है. संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च और पैदल गश्त का निर्देश दिया गया है.

गौरतलब है कि ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग को लेकर वाराणसी के जिला जज ए. के. विश्वेश की अदालत में चल रहा मुकदमा सुनवाई योग्य है या नहीं, इस पर हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी हो गयी है। अदालत ने इस मामले में आदेश को सुरक्षित रख लिया है। अदालत सोमवार 12 सितंबर को इस पर आदेश सुनाएगी।

दिल्ली की राखी सिंह तथा वाराणसी की निवासी चार महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित हिंदू देवी देवताओं की प्रतिदिन पूजा अर्चना का आदेश देने के आग्रह वाली एक याचिका पिछले साल सिविल जज सीनियर डिविजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में दाखिल की थी। उसके आदेश पर पिछली मई में ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराया गया था।

इसी बीच, मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे को उपासना अधिनियम 1991 का उल्लंघन करार देते हुए इस पर रोक लगाने के आग्रह वाली एक याचिका उच्चतम न्यायालय में दाखिल की थी। हालांकि न्यायालय ने वीडियोग्राफी सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, मगर मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।

ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट पिछली 19 मई को जिला अदालत में पेश की गई थी। सर्वे के दौरान हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया था जबकि मुस्लिम पक्ष ने उसे फव्वारा बताया था।

मुस्लिम पक्ष ने इस मामले को उपासना स्थल अधिनियम के खिलाफ बताते हुए कहा था कि यह मामला सुनवाई के योग्य नहीं है। जिला जज ने इस सिलसिले में दायर याचिका पर पहले सुनवाई करने का निर्णय लिया था। इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुस्लिम पक्ष बहुत पुराने दस्तावेज पेश कर रहा है जो इस मामले से संबंधित नहीं है। बहरहाल अदालत ने यह मामला सुनवाई योग्य है या नहीं इस पर 12 सितंबर को निर्णय सुनाने का फैसला किया है।

 

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