हेमंत सोरेन के भाई बसंत की विधायकी पर भी छाए संकट के बादल, राजभवन पर टिकीं JMM की निगाहें

hemant soren and basant soren

सार
झारखंंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बाद उनके भाई बसंत सोरेन की सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चुनाव आयोग ने सीलबंद लिफाफे में अपना मंतव्य राज्यपाल रमेश बैस को भेज दिया है।

Jharkhand Political Crisis : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बाद उनके भाई और दुमका से विधायक बसंत सोरेन की विधायकी का मामला भी राजभवन पहुंच गया है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने अपनी राय बंद लिफाफे में राजभवन को भेज दी है। अब इस पर गवर्नर को निर्णय लेना है। इससे पहले 25 अगस्त को ही निर्वाचन आयोग ने हेमंत सोरेन की सदस्यता पर अपना फैसला झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को भेज दिया था, जिस पर 17 दिन बाद भी राज्यपाल की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

बसंत सोरेन के मामले में 29 अगस्त को आयोग में सुनवाई हुई थी। इस दौरान बसंत के अधिवक्ता ने आयोग से कहा कि उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने से जुड़े इस मामले में सुनवाई उचित नहीं है। यह राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

इस दौरान भाजपा के अधिवक्ता ने बताया था कि बसंत जिस माइनिंग कंपनी से जुड़े हैं, वह राज्य में खनन का काम करती है। ऐसे में यह संविधान के अनुच्छेद 191 (1) के तहत राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में है। बीजेपी ने उनके खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की थी। बीजेपी का आरोप है कि बसंत सोरेन ने चुनाव के समय दिए गए शपथ पत्र में खनिज लीज लेने से जुड़े तथ्य छिपाए थे।

बसंत सोरेन पर आरोपः भारतीय जनता पार्टी ने राज्यपाल से मिलकर यह शिकायत की थी कि मुख्यमंत्री के छोटे भाई और दुमका के विधायक बसंत सोरेन पश्चिम बंगाल की कंपनी चंद्रा स्टोन के मालिक दिनेश कुमार सिंह के बिजनेस पार्टनर है. बसंत सोरेन पार्टनरशिप में मैसर्स ग्रैंड माइनिंग नामक कंपनी भी चलाते हैं. पाकुड़ में चल रही माइनिंग के काम में भूपेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह और बसंत सोरेन पार्टनर के रूप में है. यह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का बनता है. राजभवन को मिली शिकायत के बाद इसकी जानकारी भारत निर्वाचन आयोग को दी गई थी जिसके बाद चुनाव आयोग नई दिल्ली के द्वारा बसंत सोरेन को 5 मई 2022 को नोटिस दी गई थी बसंत सोरेन ने लगभग डेढ़ सौ पन्नों का जवाब आयोग को सौंपा था और अपने आप को निर्दोष बताया था.

इलेक्शन कमीशन ने भेजा था बसंत सोरेन को नोटिस
राज्यपाल की ओर से परामर्श मांगने पर आयोग ने बसंत को नोटिस भेजा था। इस मामले में सोरेन को आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए 5 मई 2022 को नोटिस दी गई थी तब बसंत सोरेन ने 138 पन्नों में अपना जवाब चुनाव आयोग को सौंपा था। अपने जवाब में उन्होंने दावा किया था कि उनके खिलाफ ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का कोई मामला नहीं बनता है।

सीएम की सदस्यता मामले पर अभी तक संशय बरकरार
वहीं सीएम सोरेन से जुड़े ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले को लेकर भी अभी संशय बरकरार है। इस संबंध में इलेक्शन कमीशन ने 25 अगस्त को अपना मंतव्य राजभवन भेज दिया है। उस पर गवर्नर को फैसला नहीं सुनाया है। झारखंड में सियासी उठापटक के चलते हेमंत सोरेन को यूपीए गठबंधन के विधायकों को टूट से बचाने के लिए रायपुर ले जाना पड़ा था। फिर उन्होंने बहुमत दिखाने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विश्वास मत हासिल किया।

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