यशवंत सिन्‍हा ने मुख्‍यमंत्री से कहा… शराफत से पेश आइए, मैं सीएम बन सकता हूं, लेकिन आप IAS नहीं

Yashwant Sinha President Election

सार
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति के उम्मीदवार होंगे। मंगलवार को विपक्ष की बैठक के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसका एलान किया। तमाम उठापठक के बाद विपक्ष ने आखिर यशवंत सिन्हा पर ही क्यों दांव लगाया? चुनाव में क्या होगा? यशवंत के पक्ष में कितनी पार्टियां देंगी वोट? आइए जानते हैं….

Yashwant Sinha, President Election: अटल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे यशवंत सिन्हा को विपक्ष का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया गया है। मंगलवार को शरद पवार के घर पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में यह फैसला लिया गया। अब उनका मुकाबला NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू से होगा।

1958 में पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बनने से लेकर 2022 में राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने तक के पॉलिटिकल सफर में कई बार यशवंत सिन्हा बगावती तेवर देखने को मिले हैं।

ऐसे में चलिए आज हम यशवंत सिन्हा के राजनीतिक सफर से जुड़े दिलचस्प और बगावती किस्सों को जानते हैं…

तब बिहार के मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा थे। यशवंत सिन्हा उस वक्त संताल परगना (अब बिहार का हिस्सा) में तैनात थे। दौरे के क्रम में महामाया बाबू से जब वे मुखातिब हुए तो वहां मौजूद लोगों ने युवा आइएएस अधिकारी यशवंत सिन्हा की शिकायत आरंभ कर दी। हर शिकायत पर उन्हें मुख्यमंत्री झिड़की लगाते और स्पष्टीकरण पूछते। कमरे में मौजूद एक मंत्री ने आगे बढ़कर जब इन्हें डपटना चाहा तो इन्होंने तत्काल कहा कि मैं इस व्यवस्था का आदी नहीं हूं। इतना कहने के बाद सिन्हा कमरे से बाहर निकल गए।

यशवंत सिन्हा ने कहा था मैं शरीफ आदमी, शराफत से पेश आइए
राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के साझा प्रत्याशी घोषित किए गए यशवंत सिन्हा ने अपनी आत्मकथा ‘रीलेंटलेस’ में उन घटनाओं का जिक्र किया है जिससे उनके राजनीतिक जीवन में आने की पृष्ठभूमि बनी। संताल परगना में हुई घटना के बाद बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री उनसे बहुत नाराज हुए। तत्काल उन्होंने यशवंत सिन्हा को दूसरे कमरे में वापस बुलाकर ताकीद की कि इस प्रकार बात मत कीजिए।

मंत्री से आपको ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था। यशवंत सिन्हा ने पलटकर कहा – मंत्री को भी ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था। इसपर महामाया बाबू बहुत नाराज हो गए। उन्होंने कहा – आपकी इस प्रकार सीएम से बात करने की हिम्मत कैसे हुई। आप दूसरी नौकरी खोजिए। सिन्हा ने भी पलटते हुए कहा कि मैं शरीफ आदमी हूं। मुझसे शराफत से पेश आया जाए। यह भी कहा कि मैं सीएम बन सकता हूं, लेकिन आप आइएएस नहीं बन सकते।

कैबिनेट की जगह राज्यमंत्री बनाया तो 10 सेकेंड में छोड़ा पद
जेपी यानी जयप्रकाश नारायण से बेहद प्रभावित होकर यशवंत सिन्हा ने रिटायरमेंट से 12 साल पहले ही IAS की नौकरी छोड़ दी। कुछ महीनों बाद ही वो जनता दल में शामिल हो गए और चंद्रशेखर के करीबी हो गए। बोफोर्स घोटाले पर घमासान के बीच 1989 में वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने यशवंत को राज्यमंत्री बनाने का ऑफर दिया।

तब के कैबिनेट सचिव टीएन सेशन ने यशवंत को मंत्री बनाए जाने की चिट्ठी भी सौंप दी, लेकिन 10 सेकेंड के अंदर उन्होंने इस पद को ठुकरा दिया था। दरअसल, सिन्हा कैबिनेट मंत्री बनना चाहते थे। सिन्हा का तब कहना था कि उनकी सीनियरिटी और चुनाव प्रचार में काम को देखते हुए वीपी सिंह ने राज्यमंत्री का पद देकर उनके साथ अन्याय किया है।

वीपी सिंह की सरकार 343 दिन चली। इसके बाद नवंबर 1990 में जब चंद्रशेखर PM बने तो उन्होंने सिन्हा को वित्त मंत्री बना दिया। यह सरकार भी महज 223 दिन चली थी। सरकार गिरने के कुछ दिनों बाद यशवंत सिन्हा BJP में शामिल हो गए। अटल सरकार में वे वित्त मंत्री और विदेश मंत्री भी बने।

इतना ही नहीं यशवंत सिन्हा ने मंत्री पद का ऑफर ठुकरा दिया था। वो पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बहुत करीब थे। जब विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) की सरकार थी तो उन्होंने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री के रूप में सिन्हा को जगह दी थी लेकिन उन्होंने इस पद को स्वीकार नहीं किया। इसे ठुकरा दिया था।

 

 

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