IAS पूजा सिंघल के पास 150 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति, हो सकती है 10 वर्ष की कैद !

ias puja singh ki property

सार
Jharkhand IAS Pooja Singhal अगर पूजा सिंघल पर आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें दस साल की सजा हो सकती है। ईडी बरामद किए गए संपत्ति के दस्तावेज की स्क्रूटनी के बाद समन जारी करेगा। इसके बाद सबका बयान लिया जाएगा। पूजा सिंघल पर और भी कई आरोप हैं।

Jharkhand News : बहुचर्चित मनरेगा घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने मनरेगा घोटाले के वक्त खूंटी की तत्कालीन उपायुक्त सह वर्तमान में झारखंड सरकार की खान एवं उद्योग विभाग की सचिव आइएएस अधिकारी अधिकारी पूजा सिंघल व उनके सहयोगियों से जुड़े पांच राज्यों के 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। ईडी सूत्रों के अनुसार इस छापेमारी में शुक्रवार की शाम तक 17 करोड़ रुपये नकदी समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं, जिसकी समीक्षा की जाएगी। इधर खदान लीज मामले में मुश्किलों में घिरे झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूजा सिंघल के खिलाफ ईडी की छापेमारी को गीदड़ भभकी बताया है।

पूजा सिंघल के पास मिली 150 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति
प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी में पूजा सिंघल के पास करीब 150 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं, जिसकी छानबीन जारी है। ईडी की टीम मनरेगा घोटाले के साथ-साथ पूजा सिंघल के पूरे कार्यकाल की जांच कर रही है, जिसमें कई जिलों के उपायुक्त के कार्यकाल के वक्त के विवादित मामले भी हैं। झारखंड उच्च न्यायालय में दायर शपथ पत्र में ईडी ने इसका जिक्र भी किया था। ईडी की यह छापेमारी सभी 25 ठिकानों पर शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे एक साथ शुरू हुई है। ये ठिकाने झारखंड के रांची, राजस्थान के जयपुर, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, बिहार के मुजफ्फरपुर व दिल्ली एनसीआर में हैं।

छापेमारी की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ईडी तमाम दस्तावेज की स्क्रूटनी अपने स्तर से करेगा। इसके बाद पूजा सिंघल समेत अन्य को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा। ईडी उनका बयान दर्ज करेगा। अगर जांच के क्रम में यह साबित हो गया कि उन्होंने अवैध तरीके से पूरी संपत्ति अर्जित की है तो उसे अटैच करने की दिशा में कार्रवाई होगी। राज्य में ईडी से जुड़े अन्य मामलों में ऐसा हो चुका है। मुकदमे की प्रक्रिया आरंभ करने के लिए ईडी आरोपपत्र तैयार करेगा। इसमें मनी लौंड्रिंग के तहत भी कार्रवाई संभव है। ईडी के समक्ष बयान दर्ज कराना होगा। अगर आरोप साबित हुआ तो इस मामले में 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है। पूछताछ के बाद आरोपितों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है।

ईडी ने बताया था, जारी है पूजा सिंघल के खिलाफ जांच
झारखंड हाई कोर्ट में अरुण कुमार दुबे नामक व्यक्ति ने जनहित याचिका दायर कर जांच एजेंसी पर अधिकारी पूजा सिंघल को बचाने का आरोप लगाया था। इसी याचिका पर ईडी ने अपने शपथ पत्र में अदालत को जानकारी दी थी कि मनरेगा घोटाले में खूंटी की तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल की भूमिका की भी जांच की जा रही है। तब ईडी ने अदालत को बताया था कि कनीय अभियंता राम विनोद प्रसाद सिन्हा ने प्रोजेक्ट लागत का पांच प्रतिशत कमीशन इंजीनियरिंग शाखा के अपने सीनियर को तथा पांच प्रतिशत कमीशन डीसी कार्यालय को दिया। कमीशन का नकद भुगतान किया गया था। कमीशन की राशि प्रदीप किंडो और तत्कालीन एनडीसी अभय नंदन अंबष्ट ने ली थी। शपथ पत्र के अनुसार तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल ने सीधे तौर पर कमीशन नहीं लिया था। हालांकि, अभय नंदन अंबष्ट ने ईडी को दिए अपने बयान में रिश्वत की राशि लेने संबंधित आरोपों को एक सिरे से खारिज किया था और यह भी कहा था कि राम विनोद प्रसाद सिन्हा का तत्कालीन उपायुक्त के साथ बेहतर संबंध था तो वे उपायुक्त के लिए रिश्वत क्यों लेंगे। शपथ पत्र के अनुसार कनीय अभियंता राम विनोद प्रसाद सिन्हा ने उपायुक्त कार्यालय का सहयोग लेकर खूब भ्रष्टाचार किया, इसके लिए उसने उपायुक्त कार्यालय को कमीशन भी दिया। तब तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल के पास मनरेगा के जिला प्रोग्राम को-आर्डिनेटर का प्रभार फरवरी 2009 से जुलाई 2010 तक था।

चतरा में मनरेगा मद से एनजीओ को दे दिया छह करोड़
पूजा सिंघल चतरा में अगस्त 2007 से जून 2008 तक उपायुक्त थीं। यहां उपायुक्त रहते मनरेगा योजना से दो एनजीओ वेलफेयर प्वाइंट को चार करोड़ व प्रेरणा निकेतन को दो करोड़ रुपये मुसली उत्पादन के लिए दे दिया। मनरेगा योजना में मुसली उत्पादन का काम नहीं आता है। मामला विधानसभा में उठा तो इसकी जांच हुई, लेकिन झारखंड के जांच अधिकारियों ने पूजा सिंघल को क्लीन चिट दे दी थी। ईडी ने अपने अनुसंधान में पूजा सिंघल को इस केस में भी लपेटा और जांच जारी होने संबंधित शपथ पत्र दायर किया।

चर्चा में रहा है पलामू में कठौतिया कोल ब्लाक आवंटन
पलामू में उपायुक्त रहते हुए पूजा सिंघल पर उषा मार्टिन ग्रुप को कठौतिया कोल ब्लाक आवंटन का आरोप लगा था। आरोप है कि कठौतिया कोल ब्लाक के लिए जमीन अधिग्रहण मामले में पूजा सिंघल ने घोटाला किया था। इस मामले में कनीय अफसर ही लपेटे में आए और पूजा सिंघल यहां भी बच निकली थी। ईडी ने इस मामले में भी पूजा सिंघल को पकड़ा है।

इस बीच पूरे घटनाक्रम पर एक बार फिर भाजपा के सांसद डा. निशिकांत दुबे ने CM हेमंत सोरेन और उनसे जुड़े लोगों पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राज्य में लूट चल रही थी। जाहिर है इसकी जानकारी एजेंसियों को मिल रही थी। इसके आधार पर ही कार्रवाई की गई है।

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