सीएम सोरेन के बाद उनके भाई बसंत सोरेन को चुनाव आयोग का नोटिस, हेमंत सोरेन ने दिया इस्तीफा तो गुरुजी बन सकते हैं झारखंड के सीएम !

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सार
भारत निर्वाचन आयोग ने झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के बाद उनके भाई बसंत सोरेन से भी सदस्यता समाप्त करने के लिए स्पष्टीकरण मांगा है. इसमें चुनाव आयोग ने पूछा है कि कारण स्पष्ट करिए आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए?

Jharkhand News : केंद्रीय चुनाव आयोग के नोटिस के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा पूरी तरह से अलर्ट में है. सूत्रों की माने तो हेमंत सोरेन विकल्प के तौर पर गुरुजी शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री पद पर आसीन करने को लेकर एकमत है. झारखंड मुक्ति मोर्चा पूरी तरह से विकल्प पर भी तैयार कर रही है. हेमंत ने इस्तीफा दिया तो गुरुजी यानि शिबू सोरेन झारखंड के सीएम बन सकते हैं.

बता दें, सरकार द्वारा दिए गए चुनाव आयोग को जवाब से आयोग संतुष्ट नहीं होता है तो आयोग सीएम की सदस्यता खत्म करने की अनुशंसा कर सकता है. ऐसे में हेमंत पहले ही सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं. तब जेएमएम गुरु जी यानी शिबू सोरेन पर दांव खेल सकता है.

जेएमएम के ऐसा करने से पार्टी में भी एकजुट रहेगी और गठबंधन को भी कोई आपत्ति नहीं होगी. पिछले कुछ दिनों से जेएमएम के विधायक लोबिन हेंब्रम 1932 खतियान आधारित नियोजन नीति को लेकर सदन से सड़क तक सरकार पर दबाव बनाया. वहीं दूसरी ओर शिबू सोरेन की बड़ी बहू और दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन हेमंत सोरेन सरकार पर कई तरह के सवाल खड़ी कर रही हैं. अब ऐसे में हेमंत सोरेन सरकार को लेकर विकल्प के तौर पर गुरुजी के नाम पर किसी को अप्पत्ति नहीं हो सकती है.

स्टोन माइनिंग लीज का मामला हुआ बड़ा
मुख्य सचिव को नोटिस मिलने के बाद से ही सरकार को आभास हो गया था कि स्टोन माइनिंग लीज मामला यूं ही खत्म नहीं होने वाला है. इसीलिए सरकार पहले से ही विकल्पों पर विचार करने लगी थी. हालांकि चुनाव आयोग इतनी जल्दी सब कुछ करेगा उसका अंदेशा नहीं था. चुनाव आयोग ने जिस जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 9ए के तहत नोटिस जारी किया है. उससे सीएम हेमंत सोरेन और सरकार भी सशंकित है. यही वजह है कि सरकार और जी में मौजूदा परिस्थिति से निपटने को हर विकल्प में काम कर रही है.

क्या है पूरा मामला: इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने फरवरी में राज्यपाल रमेश बैस से मिलकर शिकायत की थी कि सीएम के पद पर रखते हुए जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने माइनिंग लीज ली है. पाकुड़िया के ग्रैंड माइनिंग कंपनी में बसंत सोरेन की भागीदारी का आरोप लगाते हुए जांच कराने की मांग की थी. इसपर राज्यपाल ने धारा 191 और 192 के तहत अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए शिकायती पत्र को चुनाव आयोग के पास भेजा था. इसके बाद चुनाव आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव से खदान लीज आवंटन रिपोर्ट मांगी थी. चुनाव आयोग द्वारा बसंत सोरेन को भेजे गये नोटिस पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि संवैधानिक संस्था अपना काम कर रही है. यदि दोषी पाये जाते हैं तो निश्चित रुप से विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए.

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