स्पेन के न्यूजपेपर ने इंडियन इकोनॉमी का उड़ाया मजाक, ग्रोथ दिखाने के लिए लगाई सपेरे की तस्वीर

Indian Economy in Spanish Newspaper

सार
दुनिया से उपनिवेशवाद के दौर को खत्म हुए 75 साल से ज्यादा हो चुके हैं. इसके बावजूद पश्चिमी देशों के मन से श्रेष्ठता की भावना अब तक गई नहीं है. अब एक स्पेनिश अखबार ने भारत की संस्कृति का मजाक उड़ाया है.

Indian Economy in Spanish Newspaper: स्पेन के एक अखबार में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर छपे कार्टून पर विवाद हो गया है। इस कार्टून में भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को लेकर व्यंग किया गया है। जिसके बाद सोशल मीडिया में लोगों ने इस स्पेनिश अखबार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कार्टून में भारत की आर्थिक विकास को बीन बजाते हुए सपेरे के जरिए दिखाया गया है। इसमें सपेरे के टोकरी में से एक सांप ग्राफ पर उपर चढ़ते हुए नजर आ रहा है, जिसका इस्तेमाल भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास को दिखाने के लिए किया गया है। भारत हाल में ही ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है।

स्पेनिश अखबार ने सपेरे का कार्टून बना उड़ाया मजाक
रिपोर्ट के अनुसार, स्पेनिश अखबार La Vanguardia ने 9 अक्टूबर को अपने सप्लीमेंट Dinero (Money) के फ्रंट पेज पर इस कार्टून को प्रकाशित किया है। इस कार्टून की हेडिंग ‘The hour of the Indian economy’ (भारतीय अर्थव्यवस्था का वक्त) दी गई है। कार्टून के ऊपर लिखा है कि एशियाई महाद्वीप का यह देश एक उभरती हुई शक्ति के रूप में चीन से आगे बढ़ रहा है। इस कार्टून को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया है, जिसमें बीजेपी सांसद पीसी मोहन भी शामिल हैं।

बीजेपी सांसद बोले- मानसिकता बदलना मुश्किल
बीजेपी सांसद पीसी मोहन ने कार्टून को ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘भारतीय अर्थव्यवस्था का वक्त’ एक स्पेनिश साप्ताहिक की टॉप स्टोरी है। जब भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल रही है, तब आजादी के दशकों बाद भी हमारी छवि को सपेरों के रूप में चित्रित करना सरासर मूर्खता है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी मानसिकता को बदलना एक मुश्किल काम है।

Zerodha के सीईओ ने भी जताई नाराजगी
ऑनलाइन स्टॉक ट्रेडिंग कंपनी Zerodha के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत ने भी इस अखबार के कार्टून को शेयर करते हुए आलोचना की है। उन्होंने लिखा कि एक प्रमुख स्पेनिश प्रकाशन La Vanguardia भारतीय अर्थव्यवस्था का समय बता रहा है। यह बहुत अच्छा है कि दुनिया नोटिस कर रही है, लेकिन भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक सपेरे का इस्तेमाल करना अपमान है। आश्चर्य है कि इसे रोकने में क्या कर सकते हैं, शायर वैश्विक भारतीय उत्पाद इसकी तोड़ है।

दुनिया में बज रहा भारत की प्रगति का डंका
बता दें कि पूरी दुनिया में इस वक्त भारत की तेज प्रगति की चर्चा हो रही है. विश्व बैंक ने अनुमान जताया कि अगले दुनिया के कई देशों में वैश्विक मंदी आ सकती है, जिसका असर सभी मुल्कों पर अलग-अलग पड़ेगा. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्पीड इन दिनों अच्छी बनी हुई है और मंदी में इसके प्रभावित होने की ज्यादा आशंका नहीं है. वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुख्य अर्थशास्त्री ने गुरुवार को भारत की तारीफ करते हुए कहा था कि उसमें 5 ट्रिलियन नहीं बल्कि 10 ट्रिलियन अरब डॉलर वाली इकोनॉमी बनने की क्षमता है और अगर कुछ सुधार किए जाएं तो अगले वर्षों में इस लक्ष्य को पाया जा सकता है.

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