अरब देशों के सुपर मार्केट में इंडियन प्रोडक्ट बैन, मालदीव में हंगामा; नाराजगी दूर करने में जुटा भारत !

ARAB COUNTRY ME INDIAN PRODUCT BANNED

सार
रविवार को कतर कुवैत ईरान ने अपने यहां भारतीय राजनयिकों को समन कर अपने देश की नाराजगी से अवगत कराया था। इसके बाद सऊदी अरब बहरीन ने तल्ख टिप्पणी जारी कर अपनी नाराजगी जताई।

Hate Religious Comments : पैगंबर मोहम्मद पर भाजपा नेता नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के बयान पर खाड़ी देशों ने कड़ी आपत्ति की है। कतर, कुवैत और ईरान ने भारतीय राजदूतों को तलब कर विरोध जताया है। कतर-कुवैत ने भारत सरकार से इस बयान पर माफी की मांग की है। वहीं, सऊदी अरब ने भी इस बयान पर ऐतराज जताया है। इसके अलावा सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और अन्य अरब देशों ने अपने सुपर स्टोर्स में इंडियन प्रोडक्ट्स को बैन कर दिया है।

57 मुस्लिम देशों के इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी निंदा की है। संगठन ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा- भारत में बीते दिनों में मुस्लमानों के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़े हैं। कई राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब में बैन के साथ मुस्लिमों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।

भारत सरकार ने टिप्‍पणियों को “अनुचित” और “संकीर्ण मानसिकता वाली” करार दिया है. विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “नई दिल्ली सभी धर्मों के प्रति सर्वोच्च सम्मान का भाव रखती है.” उन्‍होंने कहा, ‘‘कुछ व्यक्तियों द्वारा एक पूजनीय हस्ती के खिलाफ आक्रामक ट्वीट एवं अमर्यादित टिप्पणी की गई. ये टिप्पणियां किसी भी रूप में भारत सरकार के विचारों को प्रदर्शित नहीं करती हैं.”उन्होंने कहा कि संबंधित निकायों द्वारा इन लोगों के खिलाफ पहले ही कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है.

ओआइसी की टिप्पणी अनुचित और संकुचित
इसी तरह से ओआइसी की टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि भारत सरकार ओआइसी की अनुचित और संकीर्ण सोच वाली टिप्पणी को सिरे से खारिज करती है। जिन टिप्पणियों का जिक्र किया गया है वह व्यक्तिगत स्तर पर किया गया है और वह भारत सरकार का किसी भी तरह से विचार नहीं है। इन व्यक्तियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जा रही है। यह दुर्भाग्य की बात है कि ओआइसी सचिवालय कुछ स्वार्थी तत्वों के जरिए विभेदकारी एजेंडे को बढ़ावा दे रहा है। हम ओआइसी से आग्रह करते हैं कि वो सभी धर्मों को एक समान आदर दे।

पार्टी पदाधिकारियों पर कार्रवाई का स्वागत
विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि जिन देशों ने भारत सरकार के समक्ष अपनी बात रखी है, उनका ही जवाब दिया जा रहा है। कुछ देशों की तरफ से पार्टी विशेष का नाम लेकर उनकी प्रवक्ताओं की टिप्पणियों की ¨नदा की है, इस बारे में विदेश मंत्रालय कुछ नहीं कर सकता। अच्छी बात यह है कि इस मामले में पार्टी विशेष ने जो फैसला किया है, उसका सभी ने स्वागत किया है। ओआइसी की टिप्पणी भारत के लिए कोई ज्यादा ¨चता की बात नहीं है क्योंकि यह संगठन पाकिस्तान के इशारे पर कई बार इस तरह का काम कर चुका है। यही वजह है कि हाल के महीनों में यह कभी कश्मीर पर तो कभी यासीन मलिक को सजा देने पर टिप्पणी करता रहा है जिसका भारत माकूल जवाब देता रहा है।

इन देशों से जुड़ा है व्यपारिक हित
संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन मुख्य तौर पर खाड़ी के देश जाने जाते हैं. इराक के छोड़कर छह देश गल्फ कॉपरेशन कांउसिल (GCC) के सदस्य हैं. 2021-22 का कुल व्यापार गल्फ कॉपरेशन कांउसिल (GCC) के सदस्य देशों के साथ 154.7 अरब डॉलर का रहा था. जो कोरोना पूर्व वर्ष 2019-20 से 28 फीसदी ज्यादा है. संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक भारत के टॉप पांच ट्रेडिंग पार्टनरों में शामिल है. भारत ने गल्फ कॉपरेशन कांउसिल (GCC) देशों को 43.9 अरब डॉलर का निर्यात किया था. वहीं इन देशों के साथ व्यापार घाटा करीब 66.8 अरब डॉलर का है. फरवरी 2022 में भारत और संयुक्त अरब अमीरत के साथ एफटीए ( Free Trade Agreement)पर हस्ताक्षर किया है. जिसमें 97 फीसदी भारतीय उत्पादों को वहां का बाजार उपलब्ध होगा. तो यूएई के 90 फीसदी उत्पादों को भारतीय बाजार अगले 10 वर्षों के उपलब्ध हो सकेगा. दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार संधि 1 मई 2022 से लागू हो चुका है.

अरबों डॉलर इन देशों से आता है भारत
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कुल 34 लाख भारतीय रहते हैं जिनसे 13.8 अरब डॉलर रेमिटेंस ( Remittance) 2017 के डाटा के मुताबिक हासिल हुआ था. सऊदी अरब में 26 लाख भारतीय रहते हैं जिनसे 11.2 अरब डॉलर रेमिटेंस ( Remittance) आया था. कुवैत में रहने वाले 10 लाख भारतीयों से 4.6 अरब डॉलर, कतर में 7.46 लाख लोगों से 4.1 अरब डॉलर, ओमान में रहने वाले 7.81 लाख लोगों से 3.3 अरब डॉलर और बरीन में रहने वाले 3.26 लाख लोगों से 1.3 अरब डॉलर रेमिटेंस ( Remittance) भारत 2017 में आया था. इन खाड़ी के देशों में काम करने वाले भारतीय अपने वतन पैसे घरवालों को पैसे भेजते हैं जिसे इनवार्ड रेमिटेंस कहा जाता है.

अगर सत्ताधारी दल ने अपने दोनों नेताओं के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की होती है तो भारत को इसका बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता था. इन देशों के साथ कूटनीतिक रिश्तों से लेकर व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता था जिसकी बड़ी कीमत भारत तो और वहां रहने वाले भारतीयों को उठानी पड़ती जो अपनी आजीविका के लिए इन देशों में गए हुए हैं.

 

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