IIT मद्रास के साथ मिलकर बना रहा है ‘स्वदेशी’ हाइपरलूप ट्रैन, 3,500 KM का सफर सिर्फ 3 घंटे में

what is hyper loop train

सार
हाइपरलूप ट्रेन काफी समय से चर्चा में है। अब इस सुपर स्पीड ट्रेन को स्वदेशी तरीके से देश में ही विकसित किया जाएगा। इसके लिए रेल मंत्रालय ने आइआइटी मद्रास के साथ हाथ मिलाया है। आइए जानें इस दिशा में किस तरह से कदम बढ़ाए जा रहे हैं…

Indian Railway HYPERLOOP Project: देश में रेल के सफर को फास्‍ट, आसान और आधुनिक बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक और पहल की है. हाईस्‍पीड, बुलेट ट्रेन के बाद अब रेलवे ‘स्वदेशी’ हाइपरलूप (HYPERLOOP) पर काम कर रहा है. आईआईटी मद्रास के तकनीकी सहयोग के साथ मिलकर रेलवे यह प्रोजेक्‍ट डेवलप कर रहा है. इस पर सरकार की ओर से 8.4 करोड़ रुपये की मदद देगी.

2017 में शुरू हुई चर्चा
देश में हाइपरलूप तकनीक की चर्चा पहली बार नहीं हो रही है. इससे पहले, देश में साल 2017 में तत्‍कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने हाइपरलूप को लेकर चर्चा शुरू की थी. तब से रेलवे और हाइपरलूप वन के बीच प्रस्तावित परियोजना पर कई दौर की बातचीत हुई.

क्या है HyperLoop?
हाइपरलूप ऐसी तकनीक है जिसमें कम दबाव वाली ट्यूब में चुंबकीय क्षेत्र का इस्‍तेमाल किया जाता है. इसकी मदद से बिना friction के लोगों और मालको तेज गति से लाया-ले जाया जा सकेगा. रेलवे मंत्रालय का कहना है कि भारत के Carbon Neutral और कम ऊर्जा खपत के लक्ष्य में इससे मदद मिलेगी.

क्या है टीम आविष्कार हाइपरलूप: आविष्कार हाइपरलूप आइआइटी छात्रों की एक टीम है, जिसमें 70 सदस्य हैं। ये छात्र इंजीनियरिंग के 11 अलग-अलग विषयों से जुड़े हैं। आइआइटी-मद्रास ने दावा किया है कि टीम आविष्कार द्वारा प्रस्तावित हाइपरलूप माडल 1,200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की टाप स्पीड प्राप्त कर सकती है। संस्थान ने कहा कि टीम भारत में हाइपरलूप ट्यूब अनुसंधान का नेतृत्व कर रही है और पहले से ही ट्यूब डिजाइन पेटेंट करा चुकी है। यह टीम 500 मीटर लंबी हाइपरलूप परीक्षण सुविधा का भी निर्माण कर रही है, जिसे 2022 के अंत तक चेन्नई के बाहरी इलाके में संस्थान के डिस्कवरी परिसर में पूरा होने की उम्मीद है। वैक्यूम ट्यूब विकसित होने पर यह अमेरिका में वर्जिन हाइपरलूप वन की परीक्षण सुविधा के बराबर होगा।

हाइपरलूप ट्रेन की तकनीक?: हाइपरलूप तकनीक पर इस समय दुनिया के कई देशों में कार्य हो रहा है। हालांकि इस तकनीक का कांसेप्ट लाने वाले एलन मस्क थे। इसे हाइपरलूप इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें ट्रैवलिंग एक लूप के जरिए होता है और हवाई जहाज की स्पीड से चीजों को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाया जा सकता है। कैप्सूल की तरह दिखने वाली हाइपरलूप ट्रेन मैग्नेटिक प्रभाव के जरिए चलती है। इसमें यात्रा के लिए खास तरीके से तैयार किए गए कैप्सूल या पाड्स का उपयोग होता है। ये पाड्स इन पाइपों में इलेक्ट्रिक चुंबकीय प्रभाव की वजह से ट्रैक से थोड़ा ऊपर उठकर चलते हैं, जिससे ज्यादा गति मिलती है और घर्षण भी कम होता है। पाड्स के अंदर वैक्यूम जैसा वातावरण होता है और हवा की गैरमौजूदगी में पाड्स को 1,000 से लेकर 1,300 किमी/घंटा की स्पीड से चलाया जा सकता है।

 

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