22 साल बाद भी झारखंड-बिहार के 900 करोड़ के Assets का नहीं हुआ बंटवारा, क्या है टकराव की वजह !

Jharkhand And Bihar Assets Not Divided

सार
बिहार राज्य पुनर्गठन कानून 2000 के मुताबिक 5 कारखाने झारखंड के हो चुके हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर परिसंपत्तियों और देनदारियों का बंटवारा नहीं होने के कारण मामला लटका हुआ है.

Jharkhand And Bihar Assets Not Divided: झारखंड के सरकारी कारखानों की परिसंपत्तियों का 22 साल बाद भी बिहार के साथ बंटवारा नहीं हो पाया है। लगभग 900 करोड़ के पेच के कारण बंटवारा टलता जा रहा है। अधिकारियों के स्तर की अब तक एक दर्जन बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन किसी बैठक में नतीजा नहीं निकलता है। बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के पांच कारखाने (इकाइयां) झारखंड में अवस्थित हैं।

बिहार राज्य पुनर्गठन कानून 2000 के मुताबिक पांचों कारखाने झारखंड के हो चुके हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर परिसंपत्तियों और देनदारियों का बंटवारा नहीं होने के कारण मामला लटका हुआ है। पिछले सप्ताह रांची में बिहार और झारखंड के अधिकारियों की हुई बैठक में परिसंपत्तियों के बंटवारे पर कोई फैसला नहीं हो पाया। दरअसल झारखंड की परिसंपत्तियों के सर्किल रेट और औद्योगिक रेट में भारी अंतर है।

जानें कहां फंसा है पेंच
गौरतलब है कि, झारखंड की परिसंपत्तियों के सर्किल रेट और औद्योगिक रेट में भारी अंतर है. यही अंतर बंटवारे की प्रक्रिया में सबसे बड़ा पेंच है. झारखंड के 5 कारखानों की जमीन और कारखानों की परिसंपत्तियों का औद्योगिक रेट 218 करोड़ 28 लाख आंका गया है. जबकि, इसी परिसंपत्ति का सर्किल रेट 1162 करोड़ 49 लाख 18 हजार 832 रुपए आंका गया है. दोनों दरों के बीच बड़े अंतर ने ही परिसंपत्तियों के बंटवारे का पेंच फंसा दिया है.

198 करोड़ की हैं देनदारियां
बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के झारखंड में 5 कारखाने हाइटेंशन इंस्युलेटर फैक्ट्री, मैलेबुल कास्ट आयरन फाउंड्री, स्वर्णरेखा घड़ी कारखाना, (सामलौंग), श्रीराम इलेक्ट्रोकास्ट झारखंड, इलेक्ट्रिक इक्वीपमेंट फैक्ट्री, (टाटीसिलवे) और बिहार सुपर फॉस्फेट फैक्ट्री सिंदरी (धनबाद) में अवस्थित हैं. ये सभी कारखाने बंद पड़े हैं. इनके कामगारों को वर्षों से वेतन-भत्ता भी नहीं मिला है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद किस्तों में वेतन का भुगतान होता है, इनकी देनदारियां 198 करोड़ हैं.

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