पीएम मोदी की निर्माणाधीन पॉवर प्लांट की समीक्षा बैठक शुरू, जल्द बिजली मिलने की बढ़ी उम्मीदें !

jharkhand power plant news

सार
झारखंड के चतरा जिले में देश का पहला ऐसा पावर प्लांट बनकर तैयार हो गया है जहां 80 फीसद कम पानी की खपत से बिजली तैयार होगी। 3000 आरपीएन पर 72 घंटों तक टरबाइन चलाने की तैयारी कर ली गई है।

Jharkhand Power Plant News :बुधवार को झारखंड सरकार और एनटीपीसी के अफसरों के साथ होने वाली पीएम नरेंद्र मोदी की निर्माणाधीन पतरातू पॉवर प्लांट पर समीक्षा बैठक शुरू हो गई है. पीएमओ के अफसर भी ऑनलाइन जुड़ गए हैं. पीएम नरेंद्र मोदी बैठक ले रहे हैं. मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, ऊर्जा सचिव प्रोजेक्ट भवन से बैठक में शामिल हो रहे हैं, जबकि एनटीपीसी के अफसर पतरातू से पीएम को निर्माण कार्य की जानकारी दे रहे हैं. पीएम को इस समय पॉवर प्लांट में देरी की वजहें बताई जा रहीं हैं. पीएम ने अड़चनों को दूर करने के निर्देश दिए हैं.

वहीँ चतरा नार्थ कर्णपूरा पावर प्लांट देश का पहला ऐसा पावर प्लांट है जो 80 फीसद कम पानी की खपत के बावजूद बिजली उत्पादन में पूरी तरह से सक्षम है। एनटीपीसी टंडवा के उप महाप्रबंधक धीरज कुमार गुप्ता कहते हैं कि इसी विशेषता के कारण यह अनूठा है। झारखंड के चतरा जिले में बनाए गए इस पावर प्लांट में तीन यूनिट से 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। यहां 3000 आरपीएन पर 72 घंटों तक टरबाइन चलाने की तकनीक विकसित की गई है। इससे झारखंड को 500 मेगावाट बिजली मिलेगी। झारखंड का अंधियारा दूर करने में यह मील का पत्थर साबित होगा।

तीनों उत्पादन यूनिट क्रमश: 660 मेगावाट की
यह पावर प्लांट अर्से बाद उत्पादन के लिए बन कर तैयार हो चुका है। यह देश का पहला एयर कूल कंडेनसर प्लांट है। योजना के अनुसार, पहली यूनिट से पहले बिजली उत्पादन शुरू होगा। इसके तीन से चार महीने के भीतर दूसरी यूनिट शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद इतने ही महीनों के अंतराल पर तीसरी यूनिट शुरू कर दी जाएगी। यानी इस वर्ष के अंत तक यहां तीनों यूनिट से बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। तीनों यूनिट क्रमश: 660-660 मेगावाट की हैं।

दिल्ली, बिहार, ओडिशा को भी मिलेगी बिजली
झारखंड के अलावा यहां से उत्पादित बिजली दिल्ली, बिहार, ओडिशा और अन्य राज्यों को आपूर्ति की जाएगी। जब इस परियोजना की नींव रखी गई थी तभी से यहां विवाद भी चलता रहा। यही वजह है कि शिलान्यास के 23 साल बाद यह बनकर तैयार हुआ है। 6 मार्च 1999 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने इसका शिलान्यास किया था। 7 मार्च को यहां जमीन दाताओं यानी रैयतों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी। इसमें 57 वाहनों में लोगों ने आग लगा दी थी। इतना ही नहीं निर्माण कंपनी के एक दफ्तर को भी आग के हवाले कर दिया गया था। लंबे समय तक लोग आंदोलित रहे।

पतरातू में भी 4000 मेगावाट का सुपर थर्मल पावर प्लांट
उधर, रामगढ़ जिले के पतरातू में भी 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए सुपर थर्मल पावर प्लांट बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में इसका आनलाइन शिलान्यास किया था। 4000 मेगावाट के इस सुपर थर्मल पावर प्लांट की पांच इकाइयों में पहले चरण के तहत 800×3 कुल 2400 मेगावाट की तीन इकाइयों का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था। पहली इकाई को 2022 तय चालू करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन दो साल तक कोरोना के कारण प्लांट का निर्माण कार्य धीमी गति से हुआ। अब प्लांट बनकर तैयार हो गया है। करीब 18 हजार करोड़ के इस पावर प्रोजेक्ट को भेल कंपनी ने पूरा किया है। यह झारखंड ऊर्जा निगम और एनटीपीसी का संयुक्त उपक्रम है।

यह है नार्थ कर्णपूरा की कहानी, झारखंड को मिलनी है बिजली
मात्र 5-6 किमी फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण झारखंड कम से कम 500 मेगावाट बिजली से वंचित हो जा रहा है. जिस प्रकार से अभी झारखंड सहित पूरे देश में पावर संकट चल रहा है. ऐसी स्थिति में अगर यह बिजली अभी जेबीवीएनएल को मिल जाती तो बहुत हद तक संकट कम हो सकता था. मगर केवल 5-6 किमी ट्रांसमिशन लाइन का काम अधूरा होने के कारण यह बिजली झारखंड जेबीवीएनएल को नहीं मिल रहा है. दरअसल एनटीपीसी का वर्ष 2012-13 में बिहार और झारखंड सरकार के साथ पावर प्रचेज एग्रीमेंट (पीपीए) हुआ था.पीपीए के तहत कुल उत्पादित बिजली का 50 प्रतिशत बिहार और झारखंड को मिलना है. पीपीए के  बाद वर्ष 2014 में एनटीपीसी ने नॉर्थ कर्णपूरा सुपर पावर प्राजेक्ट के तहत चंदवा 1980 मेगावाट का पावर प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ. जो पिछले वर्ष ही बनकर तैयार है. इसके तहत पावर प्लांट के साथ-साथ चंदवा प्लांट से लेकर टंडवा तक 35 किमी का ट्रांसमिशन लाइन बनना है. जिसमें 5-6 किमी को छोड़कर ट्रांसमिशन लाइन भी तैयार हो चुका है. मगर केवल 5-6 किमी ट्रांसमिशन लाइन का काम अधूरा होने के कारण इससे झारखंड को 500 मेगावाट बिजली नहीं मिल पा रही है. सेंट्री इलेक्ट्रिक ऑथेरिटी ट्रांसमिशन लाइन का काम एजेंसी के माध्यम से करा रहा है. जिसमें 5-6 किमी छोड़कर बाकी लाइन का काम पूरा हो चुका है. मगर महज थोड़े से एरिया के फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण पूरा पावर प्रोजेक्ट ही थमा हुआ है.

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