झारखंड के दिग्‍गज राजनेता समरेश सिंह का निधन, भाजपा को सुझाया था कमल रखें चुनाव चिन्ह का निशान !

Samresh Singh Demise

Samresh Singh Demise: झारखंड के पूर्व मंत्री सह बोकारो के पूर्व विधायक 81 वर्षीय समरेश सिंह का गुरुवार को बोकारो स्थित आवास में निधन हो गया। सुबह करीब चार बजे उन्‍होंने सेक्‍टर चार स्थित अपने आवास में अंतिम सांस ली। झारखंड की राजनीति के दिग्‍गज सह झारखंड सरकार में मंत्री रहे समरेश सिंह को एक दिन पहले ही रांची स्थित मेदांता अस्‍पताल से बोकारो स्थित उनके घर लाया गया था। बोकारो जिले के ही चंदनकियारी प्रखंड, लालपुर पंचायत स्थित देवलटांड़ गांव में समरेश सिंह का पैतृक आवास है। संभावना जताई जा रही है कि अंतिम संस्‍कार की प्रक्रिया वहीं से पूरी होगी।

कैसा रहा राजनीतिक सफर
समरेश सिंह विधानसभा में जनता की मुखर आवाज थे। अपनी बात मजबूती से सदन में रखने के लिए उनकी अलग पहचान थी। साल 1977 में बाघमारा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उन्होंने जीत हासिल की थी। झारखंड गठन के बाद बनी बाबूलाल मरांडी सरकार में उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री का पद संभाला था। कोयलांचल का बड़ा चेहरा माने जाने वाले समरेश सिंह ने राजनीति में कई अहम पारियां खेली। साल 2009 में आखिरी बार झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर झारखंड विधानसभा के लिए चुने गये थे।समरेश सिंह के 2 बेटों हैं एक बेटे की शादी हो गयी है।

भाजपा को सुझाया था चुनाव चिन्ह हो कमल
1980 में भारतीय जनता पार्टी के पहले अधिवेशन में समरेश सिंह ने ही पार्टी का चुनाव चिह्न कमल फूल हो, यह सुझाव दिया था। 1977 में जब समरेश सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते, तो उनका चुनाव चिह्न कमल का फूल ही था। पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक रहे समरेश सिंह पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते थे। आज भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टियों में एक है। पार्टी को मजबूत करने के लिए झारखंड में समरेश सिंह की भूमिका अहम है।
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पार्टी से की थी बगावत फिर लौटे वापस
1985 और 1990 में बीजेपी के टिकट पर समरेश सिंह बोकारो से चुनाव लड़ा। 1985 में एक बार समरेश सिंह ने इंदर सिंह नामधारी के साथ मिलकर अलग राह पकड़ी। उन्होंने संपूर्ण क्रांति दल का गठन किया। कुछ ही समय बाद पार्टी का भाजपा में विलय हो गया था।

पैृतक आवास में ही होगा अंतिम संस्कार
समरेश सिंह का अंतिम संस्कार शुक्रवार सुबह 9:00 बजे उनके पैतृक गांव चंदनक्यारी में किया जाएगा। उनके बड़े पुत्र राणा प्रताप भी अमेरिका से लौट आये हैं। आवास पर लोगों का पहुंचना भी जारी हो गया है. पूर्व मंत्री समरेश सिंह की पत्नी भारती सिंह का देहांत 28 अगस्त 2017 को ही हो चुका था। अंतिम संस्कार में राज्य के कई दिग्गज नेता पहुंच सकते हैं।

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