मिलिए रावण के भक्त से, 47 साल से कर रहा निरंतर लंकेश की पूजा, घर पर गूंजती है जय लंकेश की गूंज

rawan ki puja

MP News : भगवान राम या हिंदू देवी देवताओं को पूजने वाले कई लोगों को आप जानते होंगे, लेकिन कोई रावण की पूजा करता हो तो सुनकर थोड़ा अटपटा सा लगता है. लेकिन यह हकीकत है, जबलपुर के पाटन इलाके में रहने वाले संतोष नामदेव को लोग लंकेश के नाम से जानते हैं. जब लोग सुबह उठकर भगवान राम को याद करते हैं, तो वे रावण की पूजा कर रहे होते हैं. हर साल नवरात्रि पर संतोष रावण की प्रतिमा भी स्थापित करते हैं. जिसमें परिवार के साथ-साथ इलाके के लोग भी उनका सहयोग करते हैं.

पेशे से टेलर लंकेश की रावण भक्ति से हर कोई प्रभावित है.कई सालों से संतोष रावण की पूजा करते आ रहे हैं,जिसके कारण उनकी पहचान भी लंकेश के रूप में ही बन चुकी है. संतोष नामदेव की रावण भक्ति के पीछे एक दिलचस्प कहानी है. जब ये छोटे थे, तो रामलीला में रावण की सेना में सैनिक का किरदार निभाते थे. कुछ सालों बाद इन्हें रावण का किरदार निभाने का मौका मिला. बताते हैं कि उस किरदार से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने रावण को ही अपना गुरू और इष्ट मान लिया. तब से वह रावण भक्ति में लीन हैं.

‘रावण बहुत बुद्धिमान और ज्ञानी’
संतोष नामदेव का मानना है कि रावण बहुत बुद्धिमान और ज्ञानी था. उसके अंदर कोई भी बुराई नहीं थी. उसने जो भी किया, वह अपने राक्षस कुल को तारने के लिए किया था. रावण ने सीता का अपहरण करने के बाद उन्हें अशोक वाटिका में रखा, जहां किसी भी नर पशु पक्षी, जानवर या राक्षस को जाने की अनुमति नहीं थी. यह उसकी सीता के प्रति सम्मान की भावना को व्यक्त करता है. रावण भक्त संतोष ने अपने दोनों बेटों का नाम भी मेघनाद और अक्षय रखा है. जो रावण के पुत्रों के नाम थे. उनके बच्चों को भी उनकी रावण भक्ति से कोई ऐतराज नहीं है बल्कि वे भी उनके साथ रावण की पूजा करते हैं और रावण को अपना आराध्य मानते हैं

41 वर्षों से संतोष कर रहे हैं रावण की भक्ति
पिछले 41 वर्षों से संतोष रावण की भक्ति कर रहे हैं और संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनका मानना है कि जो कुछ भी उनके पास है, वह सब रावण की भक्ति से ही मिला है. उनकी इस अनोखी भक्ति से आसपास के लोग काफी प्रभावित हैं. नवरात्रि के समय पर जब वे रावण की प्रतिमा रखते हैं तो क्षेत्र के लोग उन्हें पूरा सहयोग करते हैं और धूमधाम से रावण की शोभायात्रा भी निकालते हैं. वैसे तो हिंदुस्तान में कई धर्म और समुदाय के लोग रहते हैं और सभी अपने अपने धर्मों के अनुसार इष्ट देव की पूजा करते हैं लेकिन संतोष नामदेव की रावण भक्ति अपने आप में अनूठी है. संतोष नामदेव की अनूठी भक्ति ने उन्हें समाज में अलग पहचान जरूर दी है.

बेटे का नाम मेघनाद
लंकेश उर्फ संतोष नामदेव का मानना है कि रावण बहुत बुद्धिमान और ज्ञानी था. उसके अंदर कोई भी दुर्गण नहीं था. उसने जो भी किया वह अपने राक्षस कुल को तारने के लिए किया था. रावण ने सीता का अपहरण करने के बाद उन्हें अशोक वाटिका में रखा, जहां किसी भी नर, पशु, पक्षी या राक्षस को जाने की अनुमति नहीं थी. यह उसकी सीता के प्रति सम्मान की भावना को व्यक्त करता है. रावण भक्त लंकेश ने अपने दोनों बेटों का नाम भी मेघनाद और अक्षय रखा है, जो रावण के पुत्रों के नाम थे.

रावण की अराधना से मिला सबकुछ
यहां बता दे कि संतोष पिछले कई सालों से रावण की भक्ति कर रहे हैं और संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनका मानना है कि जो कुछ भी उनके पास है वह सब रावण की भक्ति से ही मिला है. उनकी इस अनोखी भक्ति से आसपास के लोग काफी प्रभावित हैं. नवरात्रि के समय पर जब वे रावण की प्रतिमा रखते हैं तो क्षेत्र के लोग उन्हें पूरा सहयोग करते हैं और धूमधाम से रावण की शोभायात्रा भी निकालते हैं. वैसे तो हिंदुस्तान में कई धर्म और समुदाय के लोग रहते हैं और सभी अपने अपने धर्मों के अनुसार ईष्ट देव की पूजा करते हैं लेकिन संतोष नामदेव की रावणभक्ति अपने आप में अनूठी है.

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