बालू की किल्लत से बंद हुए कई निर्माण कार्य, आम आदमी के साथ-साथ 11 मंत्रियों के बंगले का काम बंद !

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सार
सरकार के द्वारा अवैध खनन पर सख्ती बरतने के निर्देश के बाद जिले में बालू की किल्लत हो गई है। एक सप्ताह तक असानी से 700 रुपए से 1000 रुपए तक प्रति…

Jharkhand News : सरकार के द्वारा अवैध खनन पर सख्ती बरतने के निर्देश के बाद जिले में बालू की किल्लत हो गई है। एक सप्ताह तक असानी से 700 रुपए से 1000 रुपए तक प्रति ट्रैक्टर मिलने वाला बालू अब आम लोगो की पहुंच से दुर हो गया है। लोगों को निजी कार्य के लिए बालू नहीं मिल रहा है। हांलांकि सरकारी एवं सामुदायिक कार्य के लिए जिले में कैटेगिरी वन के पांच बालू घाट चालू है। जहां संबंधित बीडीओ के आदेश से बालू का उठाव हो रहा है। लेकिन निजी कार्य के लिए बालू नहीं मिल रहा है। बालू की किल्लत से जिले में कई निर्माण कार्य ठप हो गए है। जिसमें कई सरकारी कार्य भी शामिल है।

झारखंड के 11 मंत्रियों के बन रहे बंगला का काम रूक गया है। कांटाटोली ईओवर का भी काम रूक गया है। इसके अलावा बालू नहीं होने की वजह से स्मार्ट सिटी में कोई काम नहीं हो रह है। बालू खत्म होने की जानकारी स्मार्ट सिटी ने जुडको को दिया है। जुडको के द्वारा रांची के उपायुक्त छवि रंजन को पत्र भेजकर बालू उपलब्ध कराने की बात कही है। लेकिन उपायुक्त के द्वारा किसी प्रकार का जवाब नहीं मिल पाया है। जुडको फिर से उपायुक्त को पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है।

मंंत्रियों का बंगला और स्मार्ट सिटी को तैयार करने वाली कंपनी ने कई दिन पहले ही बालू की समस्या पर पत्र भेजकर जुडको से कहा था कि समय पर बालू नहीं मिला तो काम बंद हो सकता है। लेकिन जुडको के द्वारा इसपर ध्यान नहीं दिया गया और बालू खत्म होने पर काम बंद हो गया।

चोरी छिपे बिक रहे है बालू लोग दे रहे है दुगना से तीगुना दाम
जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कही कहीं चोरी छिपे बालू की बिक्री हो रही है। निजी निर्माण कार्य करा रहे लोग बालू के लिए दुगना से तीगुना रेट दे रहे है।हांलकि बालू के कालाबाजारी की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन की सख्ती और लगातार छापामारी के बाद जिले अधिकांश जगहों पर बालू की बिक्री पुरी तरह से बंद है।

निर्माण कार्य बंद होने से मजदूरो को हो रही परेशानी
बालू के किल्लत के कारण निजी निर्माण कार्य लगभग बंद है। निजी कार्य बंद होने से निर्माण कार्य से जुडे राज मिस्त्री, मजदूर आदि बेरोजगार हो गए है। मजदूरो को काम नहीं मिलने से उनके समक्ष गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। मजदूर अनसेलम, राजेश्वर, अंतु, रामू ने कहा कि निर्माण कार्य नहीं होने से काम बंद हो गया है। जिसके कारण पिछले एक सप्ताह से उन्हें कोई काम नहीं मिला है।

क्या कहते है डीएमओ
डीएमओ अजीत कुमार ने बताया कि जिले में फिलहाल कैटेगरी वन के पांच बालू घाट जिसमें ठेठईटांगर के दो, बांसजोर के दो और केरसई के एक बालू घाट चालू है। इन बालू घाटो से सामुदायिक एवं सरकारी कार्य के लिए बीडीओ की सहमति से बालू का उठाव हो सकता है। उन्होने बताया कि दस जून के बाद एनजीटी के निर्देश से बालू उठाव पुर्ण रुप से बंद हो जाएगा। डीएमओ ने बताया कि सरकार के निर्देश पर विभाग के द्वारा बालू घाट की बंदोबस्ती की जाती है।

इस बार स्टॉकिस्ट लाइसेंस भी जारी नहीं, अब 15 अक्टूबर तक नहीं मिल पाएगा बालू

कमी के 3 बड़े कारण

1. 2.8% घाटों से उठाव- कैटेगरी-टू के 608 बालू घाट हैं, लेकिन 17 घाटों से उठाव हो रहा है। इससे राज्यभर में बालू सप्लाई मुश्किल है।

2. घाटों की नीलामी नहीं- राज्य में 2017 से बालू घाटों का टेंडर नहीं हुआ। माफिया चोरी-छिपे बालू महंगे दाम पर बेच रहे हैं।

3. स्टॉकिस्ट लाइसेंस नहीं- हर साल स्टॉकिस्ट लाइसेंस जारी होता था। लोगों को बालू मिल जाता था। इस बार लाइसेंस जारी नहीं हुआ।

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