झारखंड में मिला मंकीपॉक्स का पहला मामला, झारखंड सरकार अलर्ट !

Monkeypox in Jharkhand

Monkeypox in Jharkhand : देश में मंकीपॉक्स के मामले 5 हो गया है. आपको बता दें, यह पांचवां मामला झारखंड के गढ़वा शहर से मिला है. जानकारी केमुताबिक , शहर के टंडवा मोहल्ले की एक 7 साल की बच्ची में इस संक्रमण के लक्षण मिले है. जिसे गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अबतक मंकीपॉक्स के होने की पुष्टि नहीं की है. लेकिन बच्ची के शरीर में मंकीपॉक्स से मिलते-जुलते लक्षण होने की बात कही जा रही है. शरीर पर छाले होने, दर्द और कई अन्य लक्षण होने की बात भी कही जा रही है.

कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं: सिविल सर्जन
गढ़वा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डा.कमलेश कुमार ने कहा कि बरसात में इस तरह की कई बीमारियां सामने आती है और लोग ग्रसित हो जाते हैं. फिलहाल बच्ची को जिला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां इलाज चल रहा है. सिविल सर्जन ने कहा कि इसमें पैनिक होने की जरूरत नहीं है. बच्ची का कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी नहीं है, तो फिर मंकीपाक्स का वायरस उसमें कहां से आएगा. फिर भी सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ स्पष्ट कहा जा सकेगा.

बढ़ते मामलों को देखते हुए झारखंड (Jharkhand) में एहतिहाति कदम उठाए जा रहे हैं. झारखंड में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने सभी जिलों को अलर्ट जारी कर दिया है. सदर अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने को कहा गया है. इसी क्रम में तमाम जिलों में आइसोलेशन वार्ड (Isolation Ward) तैयार करने की कवायद भी शुरू हो गई है. स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इसे लेकर सभी सिविल सर्जन को एडवाइजरी भी जारी की गई है.

रांची सदर अस्पताल में बना आइसोलेशन वार्ड
झारखंड की राजधानी रांची के सदर अस्पातल में मंकीपॉक्स का इलाज करने के लिए ऊपरी तल्ले पर आइसोलेशन वार्ड बना भी दिया गया है. यहां पर करीब 20 बेड रखे गए हैं. मंकीपॉक्स के मरीजों को यहीं रखा जाएगा और 24 घंटे वो डाक्टरों की निगरानी में ही रहेंगे. सदर अस्पातल में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए तीसरे तल्ले पर इलाज के लिए पहले से व्यवस्था की गई है.

क्या है मंकीपॉक्स
मंकीपॉक्स एक वायरस है, जो रोडेन्ट और प्राइमेट जैसे जंगली जानवरों में पैदा होता है. इससे कभी-कभी मानव भी संक्रमित हो जाता है. मानवों में अधिकतर मामले मध्य और पश्चिम अफ्रीका में देखे गए हैं, जहां इस बीमारी की पहचान सबसे पहले वैज्ञानिकों ने 1958 में की थी. मंकीपॉक्स वायरस का इसके नाम के मुताबिक बंदरों से कोई सीधे लेना-देना नहीं है. इंसानों में इस वायरस का पहला मामला मध्य अफ्रीकी देश कांगो में 1970 में मिला था. 2003 में अमेरिका में इसके मामले सामने आए थे. साल 2022 में इसका पहला मामला मई के महीने में यूनाइटेड किंगडम में सामने आया. इसके बाद से ये वायरस यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में पैर पसार चुका है.

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