Ranchi Violence: मेरे इकलौते बेटे को क्यों गोली मार दी, उसका क्या कसूर था?

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सार
राजधानी में जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के बाद शुक्रवार की रात से लोग हाउस अरेस्ट की स्थिति झेल रहे हैं l एक तरफ घटना के बाद इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई l वहीं दूसरी तरफ शहरी क्षेत्र में धारा 144 लागू है l हालांकि इंटरनेट सर्विस रविवार की सुबह शुरू कर दी गई हैं लेकिन धारा 144 फिलहाल लागू हैl

Ranchi Violence: झारखंड की राजधानी रांची में हिंसक प्रदर्शन के दौरान गोली लगने से 2 लोगों की मौत हुई है। बीते दिन गोली लगने से घायल मुदस्सिर आलम और साहिल की इलाज के दौरान मौत हो गई। गोली लगने के बाद इन दोनों को रांची के रिम्‍स अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। झारखंड पुलिस के प्रवक्ता अमोल वी होमकर ने रांची हिंसा में 2 मौतों की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि रांची हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने भी फायरिंग की है। इस दौरान 12 पुलिसकर्मी और 12 प्रदर्शनकारी घायल हुए। एक पुलिसकर्मी को बुलेट इंज्यूरी है। होमकर के मुताबिक अस्‍पताल में इलाजरत 22 घायलों में से दो-तीन लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक बाकी लोग ठीक हैं। रांची हिंसा में जान गंवाने वाले हिंदपीढ़ी इलाके के मुदस्सिर आलम के सिर में गोली लगी थी। वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। बेटे की मौत के बाद उसके पिता परवेज आलम, उसकी मां निकहत का रो-रोकर बड़ा बुरा हाल है।

मां-बाप ने कहा, मेरा बेटा बहुत मिलनसार था…
रांची हिंसा में जान गंवाने वाले मुदस्सिर के मां-पिता ने बताया कि वह मेरा इकलौता बेटा था। गरीबी के कारण हम उसे ठीक से पढ़ा नहीं पाए लेकिन मेरा बेटा बहुत मिलनसार था। सबसे मिलजुल कर रहता था। उसे क्यों गोली मार दी, उसका क्या कसूर था। मृतक मुदस्सिर के चाचा मोहम्मद शाहिद एआईएमआईएम प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी के जि‍लाध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि उनके भतीजे की मौत के लिए झारखंड सरकार और रांची जिला प्रशासन जिम्मेवार है। आरोप लगाया कि मुदस्सिर की मौत पुलिस की गोली से हुई है। प्रदर्शनकारी न तो आतंकवादी थे, न उग्रवादी। फिर उन पर गोलियां क्यों चलाई गई। आरोप लगाया कि पुलिस एके-47 और पिस्टल से गोली चला रही थी।

रांची हिंसा में साहिल की मौत
रांची हिंसा में मुदस्सिर के अलावा एक और युवक साहिल की भी मौत हुई है। रिम्‍स अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक उसे किडनी में गोली लगी थी, जिसके चलते उसे तमाम प्रयास के बावजूद बचाया नहीं जा सका। साहिल के परिजनों ने बताया कि वह जीवन यापन के लिए मेन रोड, डेली मार्केट की एक दुकान में काम करता था। काम से लौटने के क्रम में उसे गोली लग गई। स्वजनों का आरोप है कि विरोध मार्च में उग्र लोगों पर अश्रु गैस या रबर बुलेट चलाने के बदले सीधे फायरिंग का आदेश दे दिया गया। हेमंत सोरेन सरकार से नाराजगी जताते हुए कहा कि गोली चलाने वाले पुलिस वालों की पहचान कर उन्‍हें गिरफ्तार करवाना चाहिए।

पुलिस ने सूझ-बूझ से कराया दोनों मृतकों के शवों को सुपुर्द ए खाक
पुलिस ने सूझबूझ के साथ रांची हिंसा के दोनों मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार कराया। मृतकों के परिवार व मोहल्ले में आक्रोश के बावजूद पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच कैफी उर्फ मुदस्सिर के शव का अंतिम संस्कार हिंदपीढ़ी स्थित बच्चा कब्रिस्तान में कराया। जबकि साहिल के शव का अंतिम संस्कार कांटाटोली कब्रिस्तान में करवाया गया। शाहिल का शव कर्बला टैंक रोड से तीन बजे निकला। रैफ जवानों और जिला बल की पुलिस स्काट करती हुई कांटाटोली पहुंची और कड़ी सुरक्षा के बीच शव का अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान सिटी डीएसपी दीपक कुमार, सदर डीएसपी प्रभात रंजन बरवार, डीएसपी जीतवाहन उरांव, सदर थानेदार श्यामकिशोर महतो, लोअर बाजार थानेदार संजय कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

घटना की जांच के लिए बनी हाई लेवल कमेटी
वहीं हिसा की घटना की जांच के लिए सीएम हेमंत सोरेन ने एक हाई लेवल कमेटी बनायी है l जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है l दो सदस्यीय कमिटी में सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल और एडीजी संजय लाटकर हैं l दोनों इस मामले के हर पहलु की जांच करेंगे और एक सप्ताह में कमेटी अपनी रिपोर्ट देंगेl

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