Dumka Murder Case : राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने हेमंत सरकार पर लगया जांच में बाधा डालने का आरोप !

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सार
झारखंड की उपराजधानी दुमका में दो नाबालिग किशोरियों की निर्मम हत्या किए जाने के मामले की जांच के लिए सोमवार को दुमका पहुंची राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने झारखंड सरकार पर जांच में असहयोग व रुकावट पैदा करने का गंभीर आरोप लगाया है।

Dumka Murder Case : झारखंड के दुमका में दो नाबालिग लड़कियों की मौत के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिका संरक्षण आयोग की टीम अपनी जांच-पड़ताल कर रही है। इस बीच आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दावा किया है कि झारखंड सरकार जांच में अड़चने पैदा करने की कोशिश कर रही है। प्रियंक कानूनगो ने कहा कि उन्होंने सरकार को अपने दौरे के बारे में बताया था लेकिन इन मामलों की जांच के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किये गये।

बता दें कि दुमका में 14 साल की एक आदिवासी लड़की की लाश बीते शुक्रवार को पेड़ से लटकी हुई मिली थी। आरोप यह लग रहे हैं कि शांदी का झांसा देकर युवक ने लड़की का यौन उत्पीड़न किया और फिर उसकी हत्या कर दी। लड़की की मां ने आरोप लगाया था कि रेप के बाद उनकी बेटी की हत्या की गई है। इस मामले के आरोपी को पकड़ लिया गया है।

इस घटना से कुछ ही दिनों पहले 23 अगस्त को दुमका में ही 16 साल की नाबालिग लड़की को पेट्रोल डाल कर जिंदा जला दिया गया था। बुरी तरह झुलस चुकी लड़की ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस मामले में पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) के अध्यक्ष ने एक ट्वीट कर कहा, ‘मैं दो केसों की जांच के लिए दुमका आया हूं। झारखंड सरकार को इस दौरे के बारे में काफी पहले ही बता दिया गया था। आयोग की एक टीम उस बच्ची के परिजनों से मिलना चाहती है जिसे रेप के बाद पेड़ पर टांग दिया गया। कलेक्टर ने इसकी अनुमति दी थी। गांव में आने के बाद हालांकि, लड़की के परिजन नहीं मिले। पड़ोसियों ने टीम के सदस्यों को बताया कि कोई उन्हें अपनी कार में लेकर चला गया। सरकार सहयोग नहीं कर रही, वो जांच में अड़चने पैदा कर रही है।’

बाहरी कर रहे क‍िशोर‍ियों को टारगेट
ऐसी संभावना है कि बाहर से आकर लोग यहां की किशोरियों को टारगेट कर रहा है। सोशल मीडिया के पोस्ट की गहनता से भी जांच होनी चाहिए थी क्योंकि इन घटना के बाद देश के बाहर से भी पोस्ट हुए हैं। स्थानीय पुलिस इसकी जांच करने में अक्षम है। ऐसे में मामले में उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है। टीम में दो अन्य सदस्य कंसल्टेंट कल्पेंद्र परमार और निकेत कुमार शामिल थे। जांच के बाद टीम वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गई।

आयोग की स्‍वजनों से मुलाकात नहीं
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की टीम से मृतका आदिवासी किशोरी के स्जवनों से मुलाकात नहीं कराए जाने पर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने ट्विट कर हेमंत सरकार पर प्रहार किया है। बाबूलाल ने कहा कि नाबालिगों के हितों की सुरक्षा मामले में देश की सर्वाेच्च संस्था एनसीपीसीआर है। इस संस्था के जांच में बाधा डालना पूरी तरह से अनैतिक व असंवैधानिक है। झारखंड सरकार सच्चाई को सामने देना क्यों नहीं चाहती है।

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