Nuclear Weapons 2022: एटमी ताकत में भारत से आगे कैसे निकला पाकिस्‍तान? पर भारत उससे शक्तिशाली ऐसे?

Nuclear Weapons In India And Pakistan

सार
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत से ज्‍यादा परमाणु हथियार पाकिस्‍तान के पास हैं। दुनिया के सभी परमाणु शक्ति संपन्‍न देश अपने हथियारों का जखीरा बढ़ा रहे हैं।

हाइलाइट्स
परमाणु शक्ति से लैस हर देश बढ़ा रहा है एटॉमिक हथियारों का जखीरा
स्‍टॉकहोम इंटरनैशनल पीस इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट में चिंताजनक आंकड़े
पाकिस्‍तान के पास 165 न्‍यूक्लियर वॉरहेड, भारत के पास सिर्फ 160
चीन के साथ न्‍यूक्लियर हथियारों की रेस में आगे बढ़ रहा है पाकिस्‍तान

Nuclear Weapons In India And Pakistan: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने 13 जून 2022 को एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा कि भारत अपने परमाणु हथियार बढ़ा रहा है. ये बात पूरी दुनिया को पता है कि पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा एटॉमिक हथियार है. पाकिस्तान के पास 165 परमाणु हथियार है, जबकि भारत के पास 160 परमाणु हथियार. पिछली साल भारत के पास 156 परमाणु हथियार है. लेकिन अगर परमाणु हथियार चलाने की नौबत आती है, तो भारत पाकिस्तान से बेहतर निकले. क्योंकि भारत के पास हथियारों के ट्रांसपोर्टेशन और लॉन्च पैड्स ज्यादा बेहतर हैं.

पाकिस्तान के पास कम दूरी की मिसाइलें – नस्त्र, हत्फ, गजनवी और अब्दाली हैं. इनकी मारक क्षमता 60 से 320 किमी है, जबकि मध्यम दूरी की मिसाइलें- गौरी और शाहीन की मारक क्षमता 900 से 2700 किमी है. अगर इन दोनों मिसाइलों से हमला होता है तो दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, भोपाल, नागपुर, लखनऊ इसकी जद में आ सकते हैं. अब तबाही कितनी होगी यह निर्भर करता है मिसाइल में लगे हथियार पर. पारंपरिक हथियार लगाने पर बर्बादी कम होगी, लेकिन परमाणु हथियार लगाया तो नुकसान बहुत ज्यादा हो सकता है.

भारत के पास ऐसी 9 प्रकार की मिसाइलें हैं, जो इन एटमी हथियारों से तबाही मचा सकती हैं. ये मिसाइलें जमीन, हवा, पानी हर जगह से लॉन्च की जा सकती है. कुछ मिसाइलें तो ऐसी हैं कि उनके हर तरह के वैरिएंट मौजूद हैं. ये मिसाइलें कम दूरी से लेकर आधी दुनिया तक पहुंच कर तबाही मचा सकती हैं. इन मिसाइलों की ताकत उनकी गति, रेंज और हथियार ढोने की क्षमता से पता चलता है.

अमेरिका और रूस अलग ही लीग में
इस सदी की शुरुआत में दुनिया के 34,000 से ज्‍यादा परमाणु हथियार थे। SIPRI के अनुसार, परमाणु ताकत वाले नौ देशों के पास 12,705 वॉरहेड्स हैं। इनमें से लगभग 3,700 वॉरहेड्स ऑपरेशन फोर्सेज के साथ तैनात हैं। करीब 2,000 ऑपरेशनल अलर्ट की स्थिति में हैं, मतलब जरूरत पड़ने पर उन्‍हें फौरन तैनात किया जा सकता है। दुनिया के 90% से ज्‍यादा परमाणु हथियार केवल रूस और अमेरिका के पास हैं। हालांकि परमाणु हथियारों के यह आंकड़े अनुमानित हैं क्‍योंकि ज्‍यादातर देश इस संबंध में खासी गोपनीयता बरतते हैं। और तो और, सिर्फ वॉरहेड्स की संख्‍या गिनाने से खतरा कम नहीं हो जाता।

न्‍यूक्लियर सुपरपावर बनना चाहता है चीन
SIPRI ने रिपोर्ट में कहा कि चीन अपने परमाणु हथियारों के जखीरे में ‘व्‍यापक विस्‍तार’ कर रहा है। सैटेलाइट तस्‍वीरें दिखाती हैं कि ड्रैगन ने 300 से ज्‍यादा नए मिसाइल सिलोज बनाए हैं। पिछले एक साल में चीन ने नए मोबाइल मिसाइल लॉन्‍चर्स और एक सबमरीन को ऑपरेशन बनाया है। एक दिन पहले ही, चीन के विदेश मंत्री वेई फेंगे ने सिंगापुर में शांगरी ला डायलॉग में नए परमाणु हथियार बनाने पर छाती ठोक रहे थे। उन्‍होंने कहा कि चीन ने ‘प्रभावशाली प्रगति’ दिखाई है।

परमाणु ताकत: भारत से आगे कैसे निकला पाक?
पाकिस्‍तान की बढ़ती परमाणु ताकत के पीछे चीन की दोस्‍ती है। दोनों देशों के बीच 1986 में ही परमाणु क्षेत्र में नॉलेज शेयरिंग शुरू हो गई थी। SIPRI की रिपोर्ट भी इस बात की तस्‍दीक करती है। इंस्टिट्यूट ने कहा है कि पाकिस्‍तान भी चीन की तर्ज पर परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। सितंबर 2021 में चीन और पाकिस्‍तान के बीच नया परमाणु समझौता हुआ था। यह समझौता 10 साल तक वैध रहेगा। दोनों देश न सिर्फ न्‍यूक्लियर टेक्‍नोलॉजी का ट्रांसफर करते हैं, बल्कि ईंधन की सप्‍लाई से लेकर रिसर्च रिएक्‍टर्स बनाने पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। पाकिस्‍तान में बनने वाले सभी न्‍यूक्लियर पावर प्‍लांट्स में चीन की अहम भूमिका रहती है।

चीन और पाकिस्तान के मुकाबले भारत कहां?
भारत अपने परमाणु जखीरे को आधुनिक बना रहा है। 36 राफेल लड़ाकू विमानों के शामिल होने से हवा में न्‍यूक्लियर ग्रेविटी बम डिलिवर कराने की क्षमता खासी बढ़ गई है। अबतक इसके लिए सुखोई-30 MKIs, मिराज-2000s और जगुआर विमानों को मॉडिफाई किया जा रहा है। 5,000 किलोमीटर रेंज वाली अग्नि-V इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का इंडक्‍शन भी चल रहा है। यह मिसाइल पूरे एशिया को कवर कर सकती है, साथ ही साथ यूरोप और अफ्रीका के हिस्‍से भी इसकी जद में रहेंगे।
स्‍ट्रैटीजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के पास पहले ही पृथ्‍वी-II (350 KM), अग्नि-I (700 KM), अग्नि-II (2000 KM), अग्नि-III (3,000 KM) और अग्नि-IV (4,000 KM) मिसाइल यूनिट्स हैं। अग्नि-V और अग्नि-प्राइम (1,000 – 2,000 KM) जैसी नईं अग्नि मिसाइलों ने सेना को ऑपरेशन फ्लेक्सिबिलिटी दी है। इन्‍हें जरूरत पड़ने पर रेल या सड़क से ट्रांसपोर्ट कर सकते हैं और कहीं से भी फायर किया जा सकता है।
नेवी की न्‍यूक्लियर ताकत को बढ़ाने की जरूरत है। भारत के पास केवल परमाणु शक्ति से लैस एक ही पनडुब्‍बी (INS अरिहंत) है। इसपर 750 किलोमीटर रेंज वाली K-15 मिसाइलें तैनात हैं। अमेरिका, रूस और चीन के पास 5,000 किलोमीटर से ज्‍यादा रेंज वाली मिसाइलें हैं। भारत परमाणु ताकत वाली तीन पनडुब्बियां बना रहा है। इसके अलावा 3,500 किलोमीटर रेंज वाली K-4 मिसाइलों का डिवेलपमेंट ट्रायल भी पूरा हो चुका है।

 

 

 

 

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