नूपुर शर्मा पर हेट स्पीच के आरोप सिद्ध हुए तो तीन साल तक हो सकती है सजा, सड़क पर नूपुर शर्मा के पोस्टर !

sadak par nupur sharma ki poster

सार
पैगंबर पर विवादित टिप्पणी करने वाली निलंबित भाजपा नेता नूपुर शर्मा के पैम्फलेट सूरत की सड़क पर लगाए गए हैं। शहर में जिलानी ब्रिज की सड़क पर नूपुर के पोस्टर पर जूतों के निशान भी बने हैं। इनमें नूपुर की गिरफ्तारी की मांग की गई है। ब्रिज पर इस तरह के पैम्फलेट क्यों और किसने लगाए हैं, फिलहाल इसका खुलासा नहीं हो पाया है।

Nupur Sharma Controversy : पैगंबर हजरत मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी करने के बाद बीजेपी की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. नूपुर के खिलाफ कई राज्यों में एफआईआर तक हो गई है. महाराष्ट्र के मुंब्रा इलाके की पुलिस नूपुर को समन जारी किया है. 22 जून को उनसे पूछताछ की जाएगी. अंतरराष्ट्रीय स्तर तक बयान का विरोध किया जा रहा है.

कानून के जानकारों के मुताबिक, आईपीसी की धारा 153 के तहत विभिन्न समुदायों के बीच भावनाएं भड़काने के बयान देने के आरोप में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में केस दर्ज किए गए हैं. इस संबंध में वकील विष्णुशंकर जैन ने बताया कि हेट स्पीच का आरोप तय करने के सिलसिले में अदालत आरोपी की भावना और मंशा की भी जांच करती है.

कानून के मुताबिक आईपीसी की धारा 153 (a) के तहत आरोप सिद्ध होने पर अधिकतम तीन साल कैद की सजा का प्रावधान है. लेकिन ऐसा ही बयान किसी धर्मस्थल के अंदर जाकर दिया जाए तो अधिकतम पांच साल की सजा हो सकती है.
लेकिन पूरे मामले को देखें तो टीवी चैनल पर डिबेट के दौरान दोनों ओर से गरमागरम आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए. इसके बाद नूपुर शर्मा का ये बयान आया. कानून के जानकारों का कहना है कि पूरी डिबेट की रिकॉर्डिंग देखने के बाद अदालत तय करेगी कि आखिर नूपुर शर्मा की टोन और टेरेन क्या थी.

हालांकि, इसी मसले पर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष और पेशेवर वकील आलोक कुमार का कहना है कि अगर ईशनिंदा के लिए या भड़काऊ बयान देने के लिए मुकदमा और सजा है तो सबके लिए होनी चाहिए. मुकदमा और सजा पहले उनको भी हो, जिन्होंने हमारी मान्यता के शिवलिंग को फव्वारा और सड़क किनारे लगाए गए पत्थरों के खंभों को शिवलिंग बताकर उनका मजाक उड़ाया. कानून एकतरफा नहीं ही सकता है. अदालत दोनों पक्षों के कसूर और सजा तय करती है.

कुछ अन्य जानकर तो ये भी आशंका जताते हैं कि हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी को उनके विवादास्पद बयान और उस पर चले मुकदमे के वर्षों बाद कट्टरवाद का शिकार होना पड़ा था. सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ नूपुर शर्मा को भी सारी जिंदगी सतर्क, सजग और सुरक्षित रहने की जरूरत है. क्योंकि कुछ निगाहें उनके पीछे चौबीसों घंटे पड़ी रहेंगी. यानी सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब वो पहले की तरह आजादी और मनमर्जी से कहीं भी आ-जा नहीं सकेंगी?

अदालत और कानून तो मुकदमे की सुनवाई के दौरान दलील, सबूत और परिस्थितियों का आकलन कर उचित समय पर कार्रवाई और सजा तय करेंगे लेकिन हर पल लगातार पीछा करने वाली निगाहों और अगले पल कुछ अनहोनी की आशंका की सजा बहुत सख्त होती है.

भाजपा ने नूपुर के बयान से किनारा कर लिया था
इस मामले में काफी किरकिरी होने के बाद 5 जून को भाजपा ने नुपूर शर्मा को पार्टी से सस्पेंड कर दिया था। सस्पेंशन से पहले भाजपा महासचिव अरुण सिंह ने लेटर जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा- भारत के हजारों वर्षों के इतिहास में प्रत्येक धर्म फला-फूला है। भाजपा किसी भी धर्म के किसी भी धार्मिक व्यक्ति के अपमान की कड़ी निंदा करती है। पार्टी उस विचारधारा के सख्त खिलाफ है, जो किसी भी संप्रदाय या धर्म का अपमान करती है। बीजेपी ऐसी किसी विचारधारा का प्रचार नहीं करती।

पैगंबर पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी
नूपुर शर्मा ने ज्ञानवापी पर हो रहे एक डिबेट के दौरान पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में केस दर्ज किया गया। वहीं नूपुर ने दिल्ली पुलिस में रेप और हत्या की धमकी की शिकायत दर्ज कराई है।

नूपुर के बयान पर इंटरनेशनल बवाल
नूपुर शर्मा के बयान पर इंटरनेशनल बवाल मच गया। कुवैत, अफगानिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों ने बयान पर आपत्ति जताई। वहीं मुस्लिम देशों के संगठन OIC ने बयान जारी कर भारत में मुसलमानों के अत्याचार का आरोप लगाया। हालांकि भारत सरकार ने OIC के बयान को खारिज कर दिया।

बवाल के बाद नूपुर ने बयान वापस लिया
भाजपा से सस्पेंड होने के बाद नूपुर शर्मा ने अपना बयान वापस ले लिया था। उन्होंने कहा था- टीवी डिबेट में मेरे भगवान के खिलाफ विवादित बोल बोले जा रहे थे, जो मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ। इसी रोष में आकर मैंने कुछ आपत्तिजनक कह दिया। मेरी मंशा किसी को दुख पहुंचाने की नहीं थी। मैं अपने शब्द वापस लेती हूं।

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