Ticket Cancellation: ट्रेन, हवाई जहाज टिकट और होटल बुकिंग कैंसिल करने पर भरना पड़ेगा जुर्माना

ticket cancellation charge

सार
सैर-सपाटे की प्‍लानिंग कर रहे हैं और मन बदल जाए तो जीएसटी का चक्‍कर आपको भारी पड़ सकता है। होटल के रूम की बुकिंग और ट्रेन का टिकट कैंसिल करने पर आपको जीएसटी देना पड़ेगा। सरकार ने इसे लेकर स्थिति साफ की है। उसने यह भी बताया है कि सरायों पर किसी तरह का जीएसटी नहीं लगाया गया है।

हाइलाइट्स
सर्कुलर पर सर्कुलर जारी कर सरकार ने साफ की है स्थिति
होटल की बुकिंग कैंसिल करने पर देना होगा जीएसटी
सरायों पर किसी तरह का जीएसटी नहीं, सरकार ने किया साफ

Ticket Cancellation Penalty: अब पर्यटकों को अपनी हवाई (Air), रेल (Train) और होटल (Hotel) की बुकिंग कैंसिल (Cancell) करने पर अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी. दरअसल, अगर कोई व्यक्ति होटल, ट्रेन और हवाई जहाज की टिकट बुक कराने के बाद उसे कैंसिल करता है तो उसे टैक्स (Tax) भरना पड़ेगा. सरकार ने इसे लेकर पूरी स्थिति साफ कर दी है. गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स (GST) के नियमों के मुताबिक, बुकिंग कैंसिल (Booking Cancellation) करना एक प्रकार से डील से मुकरने जैसा है. डील कैंसिल करने पर जुर्माना भरना पड़ता है. यानी अब ग्राहक को जुर्माने (Penalty) पर टैक्स देना होगा.

इसके मुताबिक, होटल और टूर ऑपरेटरों के जरिए की गई बुकिंग को कैंसिल कराने पर जीएसटी टैक्स अदा करना अनिवार्य होगा. बता दें कि ग्राहक ने बुकिंग से समय जो जीएसटी दर अदा किया था, कैंसिल करने पर उसे उसी दर से कैंसिलेशन चार्ज पर जीएसटी टैक्स देना होगा. गौरतलब है कि काफी समय से इसे लेकर लोगों के मन में कई प्रकार के सवाल थे, जिन्हें लेकर विवाद भी चल रहा था. अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने कई ऐसे मामलों में स्पष्टीकरण जारी किया है.

सरकार ने सर्कुलर जारी कर दी जानकारी

आपको बता दें कि वित्त मंत्रालय की टैक्स रिसर्च यूनिट (TRU) ने इस संबंध में एक सर्कुलर भी जारी किया है. जिसमें अलग-अलग स्थितियों को समझाया गया है. यह जीएसटी कानूनों संदर्भ में है. इसके तहत किसी अनुबंध को लेकर सहमत होना सेवा की आपूर्ति है. लिहाजा, यह टैक्‍सेबल है. इन्‍हीं में से एक सर्कुलर में अलग-अलग स्थितियों में कैंसिलेशन चार्ज पर जीएसटी लागू करने की बात को स्‍पष्‍ट किया गया है.

बता दें कि टैक्स रिसर्च यूनिट द्वारा जारी सर्कुलर में बताया गया है कि फर्स्ट क्लास या एसी कोच टिकट के लिए कैंसिलेशन चार्ज पर 5 फीसदी जीएसटी देना होगा, जो टिकट पर लगाया जाने वाला रेट है. इसी प्रकार से हवाई यात्रा या होटल की बुकिंग को कैंसिल करने पर ग्राहक उस दौरान दिए गए जीएसटी दर के समान टैक्स अदा करना होगा.

नोटिस के बदले भुगतान
सर्कुलर में एक और स्थिति को समझाया गया है। वह है नोटिस अवधि से पहले कर्मचारी के नौकरी छोड़ने की। अगर कोई इंप्‍लॉयर नोटिस पीरियड से पहले कर्मचारी के जाने पर वेतन की जब्ती या बॉन्‍ड राशि की वसूली करता है, तो यह कंसिडरेशन में नहीं आएगा। केपीएमजी-इंडिया में इनडायरेक्‍ट टैक्‍स पार्टनर हरप्रीत सिंह इस बारे में एक अहम बात कहते हैं। उनके मुताबिक, अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग, गुजरात ने एमनील फार्मास्यूटिकल्स के मामले में कहा था कि नोटिस पे रिकवरी जीएसटी के दायरे में आती है। सर्कुलर में कहा गया है कि यह टैक्‍सेबल नहीं है। इससे कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां जो रिकवरी पर जीएसटी का भुगतान न करने के कारण पचड़े में फंसी हैं, उन्‍हें राहत मिल सकती है।

सराय पर नहीं जीएसटी
सरकार ने सरायों पर जीएसटी को लेकर भी स्थिति साफ की है। उसने कहा है कि मीडिया और सोशल मीडिया में एक वर्ग यह बात फैला रहे हैं कि 18 जुलाई, 2022 से धार्मिक/धर्मार्थ ट्रस्टों की ओर से चलाए जाने वाले सरायों पर भी जीएसटी लागू किया गया है। यह सच नहीं है। अलबत्‍ता, 47वीं GST काउंसिल की सिफारिशों के आधार पर बैठक में 1000 रुपये तक के होटल कमरे पर जीएसटी छूट दी गई है। अब उन पर 12 फीसदी टैक्स लगेगा। हालांकि, एक और एग्‍जेम्‍पशन है। इसके तहत धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्ट की ओर से धार्मिक परिसर में कमरे किराये पर लेने से छूट मिलती है। यह 1,000 रुपये से कम के किराये वाले कमरों पर लागू है। यह छूट बिना किसी बदलाव के कायम है। रिपोर्टों में ऐसा कहा गया है कि कुछ सरायों ने 18 जुलाई 2022 से जीएसटी देना शुरू कर दिया है। इन सरायों में गुरु गोबिंद सिंह एनआरआई निवास, बाबा दीप सिंह निवास और माता भाग कौर निवास शामिल हैं। इस संदर्भ में साफ किया गया है कि इन सरायों को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। इन सरायों ने अपने मन से जीएसटी देने का विकल्‍प चुना है।

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