मोदी सरकार ने लिया फटाफट फैसला, अब “हिंदुस्तान जिंक” कंपनी से बेचेगी अपनी हिस्सेदारी !

HINDUSTAN ZINC BECHEGI SARKAAR

सार
गौरतलब है कि Hindustan Zinc जिंक, लेड और सिल्वर उत्पादन करने वाली देश की जानी मानी कंपनी है। रामपुरा आगुचा, चंदेरिया, दरीबा, कायड़ और जावर में कंपनी की उत्पादन ईकाईयां है.

सरकार को विनिवेश के मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में अब सरकार कुछ ऐसी कंपनियों के शेयर बेचने की योजना पर कई दिनों से काम कर रही थी, जिसमें उसकी सीमित हिस्सेदारी है.

CNBC TV 18 की माने तो उसकी रिपोर्ट में बताया कि आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने हिंदुस्तान जिंक की पूरी हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दे दी. यह मंजूरी आज हुई बैठक में दी गई. कंपनी में सरकार के पास अभी 29.5 फीसदी हिस्सेदारी है. सरकार को उम्मीद है कि इस बिक्री से उसे 36 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं.

अभी हिंदुस्तान जिंक में अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता प्रमोटर की हैसियत में है. केंद्र सरकार और वेदांता के बीच चल रहे मुकदमेबाजी को दोनों पक्ष हाल ही में समाप्त करने पर सहमत हुए थे. आज जैसे ही सरकार की पूरी हिस्सेदारी बिकने की खबर बाहर आई, हिंदुस्तान जिंक के शेयर एक झटके में 7 फीसदी चढ़ गए. हिंदुस्तान जिंक में एक समय सरकार के पास ज्यादातर हिस्सेदारी हुआ करती थी. सरकार ने पहले 2002 में वेदांता को इस कंपनी की 26 फीसदी हिस्सेदारी बेची. धीरे-धीरे वेदांता की हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बढ़कर 64.92 फीसदी पर पहुंच गई.

इस वजह से उठाना पड़ा फैसला
पवन हंस (Pawan Hans), शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI), IDBI Bank और भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum) की रणनीतिक बिक्री में देरी और LIC के आईपीओ साइज में कमी की वजह से सरकार को अन्य विकल्पों के बारे में सोचना पड़ा. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 65,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य तय किया है. LIC के आईपीओ से सरकार पहले ही 20,560 करोड़ रुपये जुटा चुकी है.

सितंबर में पूरी हो सकती है प्रक्रिया
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बिक्री के लिए प्रस्ताव (OFS) और विनिवेश की लीमिट डिटेल्स अभी भी तैयार किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि सितंबर तक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। सरकार ने वित्त वर्ष 2013 के लिए 65,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य का अनुमान लगाया है। बता दें कि सरकार ने एलआईसी IPO से महीने की शुरुआत में लगभग ₹20,560 करोड़ जुटाए हैं। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने HZL और आईटीसी में हिस्सेदारी की बिक्री पर इंटरनल चर्चा शुरू कर दी है।

पवन हंस की बिक्री पर रोक
केंद्र सरकार ने हेलीकॉप्टर कंपनी पवन हंस (Pawan Hans) की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. सरकार ने सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी स्टार9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड (Star9 Mobility Pvt Ltd) के बैकग्राउंड पर उठ रहे सवालों के बीच यह बड़ा कदम उठाया है. इससे पहले अप्रैल महीने में सरकार ने इस बिक्री पर मुहर लगाई थी.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Latest News