IRCTC Railway Rule :ट्रेन में बेटिकट सफर कर रही अकेली महिला को नीचे नहीं उतार सकता टीटीई, जानिए क्या हैं रेलवे के नियम

irctc rule

सार
क्या आपको पता है कि जिस दिन भारतीय रेल ने आनलाइन टिकटिंग के लिए आइआरसीटीसी की साइट की लांच की थी उस दिन सिर्फ 27 यात्रियों ने ही बुकिंग की थी। आइआरसीटीसी से जुड़ी ऐसी ही जानकारियों के लिए यहां पढ़िए….

IRCTC Railway Rule : अगर आप भी भारतीय रेल में सफर करते हैं तो आपको रेल के नियमों की जानकारी जरूर होनी चाहिए. अगर आपको रेलवे के नियमों के बारे में पता होगा तो रेलवे का कोई स्टाफ अधिकारी या आपका कोई सहयात्री आपके साथ गलत व्यवहार नहीं कर सकेगा. हम अपनी रेलवे की स्टोरी में आपको लगातार रेलवे के नए नियमों से अवगत करा रहे हैं.

रेल का एक नियम यह कहता है कि अगर कोई महिला रेल यात्री अकेले सफर कर रही है और उसके पास टिकट नहीं है तब भी टीटीई ट्रेन से उसे नीचे नहीं उतार सकता. भारत में रेलवे के लिए नियम कानून बनाने वाले रेल बोर्ड में तीन दशक पुराने इस कानून को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है.

वास्तव में रेलवे के इस कानून के बारे में रेलवे के स्टाफ को भी पता नहीं है. रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार अकेले सफर कर रही महिला यात्री को किसी भी स्टेशन पर उतार देने से अनहोनी की आशंका हो सकती है. अकेली महिला यात्रियों की सुरक्षा के हिसाब से साल 1989 में यह कानून बनाया गया था.

Indian Railways के मैनुअल के अनुसार अकेले सफर कर रही महिला यात्री के पास टिकट नहीं होने के बाद भी किसी स्टेशन पर नहीं उतारा जा सकता. इसके लिए टीटीई को जिला मुख्यालय के स्टेशन पर कंट्रोल रूम को सूचित करना होता है. यहां से उसे दूसरे ट्रेन में टिकट के साथ बिठाने की जिम्मेदारी जीआरपी के महिला कांस्टेबल की होती है.

भारतीय रेल (Indian Railways) ने महिला सशक्तिकरण के लिए पिछले कुछ सालों से काफी प्रयास किए हैं. इनमें महिला यात्रियों के लिए सुरक्षा, संरक्षा व सुविधा को बेहतर बनाना शामिल है. Indian Railways के रेलवे बोर्ड ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई मोर्चे पर एक साथ काम करने का फैसला किया है.

इसमें अकेली महिला यात्री की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने से लेकर कई उपाय किए जाने हैं. रेलवे बोर्ड ने कहा है कि आरक्षित कोच में प्रतीक्षा सूची में नाम होने पर भी अकेली महिला को ट्रेन से नहीं निकाला जा सकता है. यदि अकेली महिला स्लीपर क्लास के टिकट पर एसी कोच में सफर कर रही है तो टीटीई उससे स्लीपर कोच में जाने के लिए अनुरोध कर सकता है. अकेली महिला यात्री से ट्रेन में जोर जबरदस्ती नहीं की जा सकती.

यही नहीं अगर महिला आरक्षित कोच में सफर कर रही है और उसका सीट कन्फर्म नहीं हुआ है और वेटिंग लिस्ट में नाम है। तो वेटिंग टिकट लेकर यात्रा कर रही महिला को भी कोच से बाहर नहीं निकाल सकते हैं। वह भी वेटिंग टिकट पर यात्रा कर सकती है।

अपने महिला यात्रियों को रेलवे ने इतनी ही सहूलियतें नहीं दी है। अगर महिला स्लीपर की टिकट ली है और वह एसी-3 में यात्रा कर रही है तो उससे केवल टीटीई अनुरोध कर सकता है कि वह स्लीपर कोच में जाए। उसके साथ जबर्दस्ती करके दूसरे कोच में नहीं भेजा जा सकता है।
रेलवे ने महिला रेल यात्री के लिए रेलवे मैनुअल में 1989 में यह नियम बनाया था। लेकिन समय के साथ इस नियम को सभी भूल चुकेे हैं। अधिकतर रेलवे कर्मचारियों व अधिकारियों को ही यह याद नहीं। फिलहाल, रेलवे बोर्ड अपने इस नियम को सख्ती से लागू करने की प्रक्रिया में है ताकि महिलाओं के साथ यात्रा में किसी प्रकार का दुव्र्यवहार न होे सके।

महिलाओं का विशेष ख्याल रखता है IRCTC
किसी महिला को ट्रेन में अकेला सफर करना हो तो जरा तनाव हो जाता है। लेकिन भारतीय रेल महिलाओं को विशेष ध्यान रखती है। आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि IRCTC टिकट बुकिंग के समय महिलाओं का खास ध्यान रखती है। यदि कोई महिला IRCTC के जरिए टिकट बुक करती है तो उस महिला को ऐसी जगह ट्रेन में सीट मुहैया कराई जाती है, जहां पहले से ही किसी महिला के नाम पर सीट बुक होगी। IRCTC ऐसा इसलिए करती है कि कोई महिला कई पुरुषों के बीच में बैठकर असहज और असुरक्षित महसूस न करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Latest News