पाकिस्तान की जेल में सालों बंद रहे सरबजीत सिंह की पत्नी की सड़क हादसे में मौत, इसी साल बहन का भी हुआ था निधन

sarabjit singh wife death

सार
सरबजीत सिंह की पत्नी सुखप्रीत कौर की मौत सोमवार देर रात पंजाब के अमृतसर में हुआ। सुखप्रीत कौर बाइक में पीछे बैठी थी लेकिन फतेहपुर के पास वह चलती गाड़ी से गिर गईं और इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

Sarabjit Singh Wife Death: पाकिस्तान की जेल में जासूसी के आरोप में मारे गए सरबजीत सिंह (Sarabjit Singh) की पत्नी सुखप्रीत कौर (Sukhpreet Kaur) की सड़क हादसे में मौत हो गई. बीते दिन सुखप्रीत कौर अपनी बेटी स्वप्नदीप से मिलने अपने पड़ोसी के साथ मोटरसाइकिल पर अमृतसर से जालंधर जा रही थी. इसी दौरान वह मोटरसाइकिल से पीछे गिर गईं, जिससे उनके सिर पर गहरी चोट आई और उनकी मौत हो गई.

सुखप्रीत कौर (Sukhpreet Kaur) को सड़क हादसे के बाद इलाज के लिए अमृतसर के महाजन अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां पर उनकी मौत हो गई. शव का पोस्टमार्टम कर परिवार को सौंप दिया गया है. हादसे में उनके सिर के पीछे और सीने में गंभीर चोटें लगी थीं.

पाकिस्तान की जेल में बंद थे सरबजीत
सुखप्रीत कौर का अंतिम संस्कार मंगलवार की सुबह भिखीविंड के श्मशान घाट में ही होगा. भारत के रहने वाले सरबजीत को पाकिस्तान की एक अदालत ने आतंकवाद और जासूसी के लिए दोषी ठहराया था. उन्हें 1991 में मौत की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, सरकार ने 2008 में सरबजीत को फांसी देने पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी थी.

सरबजीत सिंह की बेटी स्वपनदीप कौर राजस्व विभाग में बतौर नायब तहसीलदार जालंधर में तैनात हैं. उनकी बेटी ने ही अपनी मां सुखप्रीत कौर को मिलने के लिए बुलाया था. मां की मौत के बाद अब उनके सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ गया है.

2013 में हुई थी सबरजीत की मौत
बता दें कि अप्रैल 2013 में लाहौर जेल के कैदियों द्वारा किए गए हमले में 49 साल की आयु में सरबजीत की मौत हो गई थी। उन्हें पाकिस्तानी अदालत द्वारा आतंकवाद और जासूसी का दोषी ठहराया गया था और 1991 में मौत की सजा सुनाई गई थी। मौत के बाद सरबजीत का पार्थिव शरीर लाहौर से अमृतसर लाया गया जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।

गलती से पाकिस्तान पहुंचा था सबरजीत
बता दें कि पाकिस्तान में हुए सिलसिलेवार बम हमलों की साजिश रचने के लिए सरबजीत को दोषी ठहराया गया था। सरबजीत को बचाने के लिए भारतीय अधिकारियों के द्वारा तर्क दिया गया था कि सरबजीत केवल एक किसान था और पाकिस्तान में हुए बम धमाकों के तीन महीने बाद अपने खेत में जा रहा था और गलती से भटक कर पाकिस्तान पहुंच गया था। बता दें कि सरबजीत सिंह को बचाने के लिए देशभर में कई अभियान भी चलाए गए थे लेकिन सरबजीत पाकिस्तान से जिंदा वापस नहीं आ पाया था।

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