Positive Story: सिक्योरिटी गार्ड ने अपने सपने जमीन पर उतारे, पहले अटेंप्ट में NET क्लियर

RANCHI SECURITY GUARAD SUCCESS STORY

सार
Security Guard Success Story : यूजीसी द्वारा आयोजित नेट परीक्षा में पास अमरेन सेठ को अब प्रतिमाह 32 हजार फैलोशिप मिल रहा है। आठ घंटे की ड्यूटी के बाद जो सैलेरी मिलती है उसी से पढ़ाई के साथ-साथ रहने और भोजन का खर्चा भी निकल जाता है।

Security Guard Success Story : सपना पूरा करने की निष्ठा और लगन हाे ताे प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। ऐसे लाेग जब सपना पूरा करने में जुट जाते हैं ताे रास्ते स्वतः बनते जाते हैं। ऐसी ही प्रतिभा के धनी है रांची जिला निवासी अमरेन सेठ। संसाधनों की कमी के बावजूद इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सफलता की नई इबारत लिखी।

बरियातू स्थित एक अपार्टमेंट में सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी करते हुए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा परीक्षा (नेट) में पहली बार में पास हुए। इतना ही नहीं इनका चयन जूनियर रिसर्च फैलोशिप के लिए किया गया है। अब इन्हें प्रतिमाह लगभग 32 हजार रुपए फैलोशिप मिल रहा है।

सोनाहातू प्रखंड स्थित तेलवाडीह गांव के रहने वाले अमरेन सेठ वैसे छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो संसाधनों की कमी बताकर बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। अमरेन बताते हैं कि जिस अपार्टमेंट में गार्ड की नौकरी कर रहा था, उसी में रांची विवि के जूलॉजी विभाग के डॉ. आनंद ठाकुर और फिजिक्स विभाग के डॉ. राजकुमार रहते हैं। इन दोनों शिक्षकों ने न सिर्फ आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया, बल्कि अपेक्षित सहयोग भी किया।

रांची विवि के पीजी हिंदी विभाग में कर रहा है शोध

रांची विवि के पीजी हिंदी विभाग में डॉ. कुमुद कला मेहता की मॉनिटरिंग में अमरेन सेठ शोध कर रहा है। अमरेन बताते हैं कि कुमद कला मेहता से बेहतर मार्गदशन मिल रहा है। इस कारण तय समय के अंदर रिसर्च कार्य पूरा हो जाएगा। उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षक बनना चाहता हूं।

गार्ड की नौकरी से करते हैं जीवन यापन और पढ़ाई
बहरहाल, अमरेन सेठ वैसे छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं, जो आर्थिक कारणों व संसाधनों की कमी का हवाला देकर अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। अमरेन सेठ कहते हैं कि वे खुद सोनाहातू प्रखंड के तेलवाडीह गांव से हैं। इस इलाके में पठन पाठन की कुछ खास सुविधा उपलब्ध नहीं थी। लिहाजा, उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए रांची आना पड़ा। यहां आकर रहने और खाने की समस्या आड़े आने लगी तो उपार्जन के लिए बरियातु के एक अपार्टमेंट में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली। यहां आठ घंटे की ड्यूटी करने के बाद माह के अंत में जो सैलेरी मिलती है, उसी से पढ़ाई के साथ-साथ रहने और भोजन का खर्चा भी निकल जाता है।

वंचितों को पढ़ाई में मदद करुंगा
अमरेन बताते हैं कि अभाव में उच्च शिक्षा की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल होता है। लेकिन, नामुमकिन नहीं है। रिसर्च कार्य पूरा करने के लिए वंचितों को पढ़ाई आगे जारी रखने में हरसंभव मदद करुंगा। मेरे पिता गया प्रसाद सेठ गांव में खेती करते हैं। मां सबरी देवी गृहिणी हैं।

अपार्टमेंट में रहने वाले दो शिक्षकों ने की मदद
अमरेन सेठ बताते हैं कि जिस अपार्टमेंट में गार्ड की नौकरी कर रहे थे, उसी में रांची यूनिवर्सिटी के जूलाजी विभाग के डा आनंद ठाकुर और फिजिक्स विभाग के डा राजकुमार रहते हैं। दोनों शिक्षकों ने न सिर्फ आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया, बल्कि अपेक्षित सहयोग भी किया।

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