बच्चों के रेप केस में नाम आया, मठ के पुजारी ने आत्महत्या कर ली, सुसाइड नोट मिला पर वजह साफ नहीं

MATH KE PUJARI NE SUCIDE KIYA

सार
कर्नाटक के बेलगाम मठ में बसव सिद्धलिंग स्वामी का शव मिला है। शिष्यों ने सोमवार को जब मठ का कमरा खोला तो सिद्धलिंग का शव फांसी से लटका था। यहां एक सुसाइड नोट भी मिला है। हालांकि इस सुसाइड नोट में क्या लिखा है, यह साफ नहीं हो पाया है।

लिंगायत मठ में बच्चियों से यौन शोषण मामले में नाम जुड़ने से परेशान एक मठ पुजारी की सुसाइड से मौत हो गई. बसवा सिद्धलिंग स्वामी कर्नाटक के गुरु मदीमलेश्वर मठ के पुजारी थे. एक वायरल ऑडियो क्लिप में उनका नाम आया था, जिसमें यौन शोषण पर बात हो रही थी. बताया जा रहा है कि इसी वजह से सिद्धलिंग स्वामी परेशान चल रहे थे. वो बेलगावी जिले के नेगिनाहला गांव में रहते थे, उनके कमरे में उनका शव मिला.

द फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, बसवा सिद्धलिंग 28 साल के थे. 5 सितंबर को वो अपना फोन नहीं उठा रहे थे. लंबे समय तक उनके कमरे से बाहर नहीं आने पर उनके परिवार ने कमरे का दरवाज़ा धक्का देकर खोला. कमरे में उनका शव मिला. मठ के सूत्रों ने कहा कि सिद्धलिंग एक ऑडियो क्लिप से परेशान चल रहे थे, उस ऑडयो क्लिप में कर्नाटक के कुछ लिंगायत मठों में हुए यौन उत्पीड़न के मामलों पर चर्चा हो रही थी. ये ऑडियो दो महिलाओं का था और इसमें सिद्धलिंग स्वामी का नाम भी लिया गया था.

वायरल ऑडियो क्लिप में महिलाएं कुछ संतों के “चरित्र” और उनके कथित संबंधों पर चर्चा कर रही थीं. जानकारी के मुताबिक, मठ के भक्तों ने बेलगावी जिले के डिप्टी एसपी के सामने इस ऑडियो क्लिप को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी. भक्तों ने लिंगायत संतो के खिलाफ ऑडियो क्लिप बनाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की थी.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि सिद्धलिंग स्वामी ने 4 सितंबर की देर रात तक भक्तों से बात की थी. कथित तौर पर ऑडियो की वजह से दुखी होने की बात भी सिद्धलिंग स्वामी ने कही थी. पुलिस के मुताबिक, मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है.

शिवमूर्ति 14 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में
सेक्स कांड के आरोपी शिवमूर्ति की जमानत याचिका पर आज सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने उसे 14 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले पुलिस ने शनिवार को शिवमूर्ति के पुरुषत्व की जांच कराई है। मैसूर के एनजीओ ओडानाडी के डायरेक्टर स्टैनली के. वर्गीस लिंगायत संत के खिलाफ सीबीआई या अदालत की निगरानी में जांच की मांग कर रहे हैं।

वर्गीस ने कहा था कि प्रशासन में कुछ लोग शिवमूर्ति को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। मठ की ओर से संचालित स्कूलों के हॉस्टल से पहले भी लड़कियों के लापता होने की खबरें आ चुकी हैं। इनमें से कई लड़कियों के साथ दुष्कर्म की बात भी सामने आई थी। कई पीड़िताओं को पैसे देकर चुप कराया गया, जबकि कइयों के परिजनों ने बदनामी के डर से उनकी शादी करवा दी। ऐसे में उसके खिलाफ उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।

गिरफ्तारी के बाद शिवमूर्ति को अस्पताल ले गए थे
कर्नाटक पुलिस ने लिंगायत संत को गुरुवार रात गिरफ्तार किया था, लेकिन शुक्रवार को उन्हें सीने में दर्द के बाद हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। उधर डिस्ट्रिक्ट सेशन कोर्ट जज कोमला ने उन्हें अस्पताल से सीधे कोर्ट लाने का आदेश जारी किया था। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें व्हील चेयर पर कोर्ट में पेश किया था। यहां कोर्ट ने लिंगायत संत को 4 दिन यानी 5 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया था।

मठ के स्कूल में पढ़ती हैं पीड़ित लड़कियां
आरोप लगाने वाली किशोरियों का कहना है कि वे मठ की ओर से संचालित स्कूल में पढ़ती हैं, उनकी उम्र 15 और 16 साल है। संत ने उनका साढ़े तीन साल से अधिक समय तक यौन शोषण किया। पीड़ित 24 जुलाई को हॉस्टल से निकलीं और 25 जुलाई को कॉटनपेट पुलिस स्टेशन पहुंचीं। इसके बाद 26 अगस्त को उन्होंने मैसूर के नजराबाद पुलिस स्टेशन में लिंगायत संत के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी।

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