चीन ने ताइवान के पास दागीं 11 मिसाइलें, 5 जापान में गिरी, चरम पर पहुंचा दोनों देशों के बीच तनाव !

CHINA TAIWAN WAR

सार
चीन की तरफ से ताइवान के पास में मिसाइलें दागीं गई हैं. पांच मिसाइलें तो जापान में जा लैंड हुईं. ताइवान और जापान की सरकार ने इस कार्रवाई की पुष्टि कर दी है.

China Taiwan Tension: चीन और ताइवान के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान से लौटते ही चीन और एग्रेसिव हो गया है। गुरुवार से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान के ईदगिर्द 6 इलाकों में सैन्य अभ्यास शुरू किया है।

इस बीच, ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि PLA ने ताइवान के उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिमी तट के पास 11 डोंगफेंग बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। ताइवान ने कहा है कि हम जंग नहीं चाहते लेकिन इसके लिए तैयार रहेंगे। ताइवान आने-जाने वाली करीब 50 इंटरनेशनल फ्लाइट्स को कैंसिल कर दिया गया है।

इधर, चीन की ओर से दागी गई 5 बैलिस्टिक मिसाइलें जापान के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में गिरी हैं। जापान के रक्षा मंत्री नोबुओ किशी ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है। उन्होंने डिप्लोमौटिक चैनल के जरिए इस घटना का विरोध दर्ज कराया है।

अमेरिका ने लिखी तनाव की स्क्रिप्ट
अब दोनों देशों के बीच शुरू हुए इस तनाव की स्क्रिप्ट अमेरिका द्वारा लिखी गई है. जब से अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने ताइवान का दौरा किया था, चीन द्वारा धमकियों का दौर शुरू हो गया. अब पेलोसी से ताइवान से चली गई हैं, लेकिन अमेरिका के एंट्री मात्र से दोनों देशों के बीच तकरार काफी बढ़ चुकी है. जानकारी के लिए बता दें कि आधिकारिक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी सेना 4 से 7 अगस्त तक 6 अलग-अलग क्षेत्रों में भी सैन्य अभ्यास करेगी, जो ताइवान द्वीप को सभी दिशाओं से घेरते हैं.

अमेरिका पर ताइवान कर सकता भरोसा?
इसके अलावा ग्लोबल टाइम्स ने चीनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि चीन का ये अभ्यास अभूतपूर्व है क्योंकि PLA की मिसाइलों के पहली बार ताइवान द्वीप पर उड़ान भरने की उम्मीद है. ऐसी स्थिति में पहले से ज्यादा चल रहा तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है. वर्तमान में अमेरिका, ताइवान की मदद की बात जरूर कर रहा है, सुरक्षा देने की गारंटी भी दे रहा है. लेकिन जमीन पर जैसी स्थिति चल रही है, उसे देखते हुए ताइवान, अमेरिका पर भी आंख मूंदकर विश्वास नहीं कर सकता है.

इसका सबसे बड़ा उदाहरण रूस-यूक्रेन युद्ध के रूप में देखने को मिलता है जहां पर शुरुआत में अमेरिका लगातार यूक्रेन का समर्थन कर रहा था, उसे रूस के खिलाफ उकसा रहा था. लेकिन जैसे ही युद्ध शुरू हुआ, अमेरिका ने वहां पर भी अपनी सेना भेजने से इनकार कर दिया और सिर्फ रूस पर प्रतिबंध लगाने वाली कार्रवाई की.

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