अंतिम संस्कार के लिए नहीं मिलेगा आतंकी का शव, SC ने कहा- कोर्ट भावनाओं से नहीं, कानून से चलता है !

sc on terrorist death body

सार
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि एक बार दफनाने के बाद शरीर को कब्र से नहीं निकालना चाहिए। जम्मू-कश्मीर से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार मृतक को पूरे विधि-विधान के साथ दफनाया गया है।

जम्मू-कश्मीर के हैदरपोरा में 15 नवंबर 2021 को सुरक्षाबलों के साथ एनकाउंटर में मारे गए आतंकी आमिर माग्रे का शव कब्र से बाहर निकालने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी है। आमिर के पिता लतीफ ने याचिका दाखिल कर मांग की थी कि अंतिम संस्कार के लिए उसके बेटे के शव को निकालने की मंजूरी दी जाए।

सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बीएस पारदीवाला की बेंच ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आमिर के शव का प्रशासन ने सही तरीके से अंतिम संस्कार नहीं किया। शव निकालने का आदेश तब तक नहीं दिया जा सकता, जब तक यह न दिखे कि इससे न्याय का हित हो रहा है।

कोर्ट भावनाओं से नहीं, कानून से चलता है
बेंच ने कहा- आमिर के पिता की भावनाओं का हम सम्मान करते हैं, लेकिन कोर्ट कानून के अनुसार काम करता है। हालांकि बेंच ने आमिर के पिता लतीफ को उसकी कब्र पर प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।

सुनवाई के दौरान, जम्मू-कश्मीर प्रशासन का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि मृतक एक आतंकवादी था। उसका अंतिम संस्कार इस्लामी रीति-रिवाज के अनुसार ही हुआ था। जम्मू-कश्मीर प्रशासन के वकील ने कहा कि आठ महीने बीत गए, शरीर सड़ चुका होगा और अब शव को निकालने से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा होगी। जम्मू और कश्मीर प्रशासन की ओर से वकील तरुना अर्धेंदुमौली प्रसाद उपस्थित थे। माग्रे ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने उनके बेटे के शरीर को निकालने की अनुमति नहीं दी थी। पिछले साल 15 नवंबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके में हुई मुठभेड़ में आमिर माग्रे समेत चार लोग मारे गए थे। याचिका अधिवक्ता नुपुर कुमार के माध्यम से दायर की गई थी।

 

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