स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ रहा था बच्चा; वजन नापने की मशीन से चलाता है घर का खर्च !

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Viral News : अपर पुलिस आयुक्त वाराणसी आइपीएस सुभाष चंद्र दूबे अपनी दरियादिली ही नहीं लोगों के बीच घुल मिलकर पुलिस की छवि को भी निखारने के लिए जाने जाते हैं। इस बार वह स्‍वावलंबी बच्‍चे से प्रभावित हुए तो उसकी आर्थिक तंगी को देखकर उसे स्‍कूल में अपने खर्चे से भर्ती करा दिया। उनकी यह पहल इन दिनों खूब चर्चा में है।

दरअसल एक बच्‍चा ‘पांच रुपये में वजन कराएं, भिक्षा न देकर स्‍वावलंबी बनाएं’ तख्‍ती के साथ वजन करने वाली मशीन लेकर बैठा दिखा तो गश्‍त के दौरान उससे बातचीत कर आर्थिक तंगी के बारे में जानकारी हासिल की।

बच्‍चा भदैनी घाट पर पानी टंकी के पास पोल लाइट के नीचे बैठ कर पढ़ाई लिखाई कर रहा था। उसके साथ ही वजन करने वाली मशी के साथ तख्ती पर लिखा था “पांच रुपये में वजन कराएं, भिक्षा न देकर स्वावलम्बी बनाएं”। यह संदेश देखकर वह सहरा रुक गए और बच्चे की पढ़ने की लगन को देखकर अपने आप को रोक न पाए और उन्होंने बच्चे से बातचीत की। इस क्रम में पता चला कि बच्चे का नाम सोनू है और घर की आर्थिक तंगी के चलते वो यहां घाट पर बैठ कर पढ़ता है और जो लोग वजन कराके कुछ पैसे दे देते हैं उनसे वो अपने घर के खर्चे में सहयोग करता है। इससे घर का खर्चा चलाने में काफी मदद भी मिलती है।

ऑफिस बुलाकर दिया पढ़ाई का सामान
एडिशनल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) सुभाष चंद्र दुबे ने गुरुवार को सोनू को भदैनी स्थित आदर्श विद्यालय के शिक्षकों के साथ अपने कार्यालय बुलवाया। स्कूल यूनिफॉर्म से लेकर कक्षा 6 की पढ़ाई के लिए जो भी जरूरी चीजें थी वह सब उन्होंने सोनू को दिया। स्कूल के शिक्षकों से सोनू की साल भर की फीस पूछ कर उसका पैसा उन्होंने दिया। इसके बाद उन्होंने सोनू से कहा कि बेटा तुम जब तक पढ़ोगे तब तक मैं पढ़ाऊंगा। बस, मन लगाकर पढ़ाई करते रहना।

घाट पर देखा था बच्चे को

एडिशनल पुलिस कमिश्नर सुभाष चंद्र दुबे रोजाना शाम के समय गश्त करने के लिए कमिश्नरेट के अलग-अलग इलाकों में निकलते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग तीन माह पहले वह गंगा किनारे भदैनी घाट पर पैदल गश्त कर रहे थे। उस दौरान उन्होंने स्ट्रीट लाइट के नीचे एक बच्चे को पढ़ते हुए देखा। उस बच्चे के सामने वजन नापने वाली मशीन रखी थी। उसके आगे एक तख्ती पर लिखा था कि 5 रुपए में वजन कराएं। भिक्षा न देकर स्वावलंबी बनाएं।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने कहा कि वह तख्ती से प्रभावित होकर बच्चे के पास खुद गए। बच्चे से उन्होंने बातचीत शुरू की तो पता लगा कि उसका नाम सोनू है। घर में आर्थिक तंगी के कारण कक्षा 6 में एडमिशन लेने का उसका सपना पूरा होते हुए उसे नहीं दिख रहा है। इसी वजह से वह घाट किनारे बैठ कर पढ़ता भी रहता है और वजन नापने की मशीन के सहारे जो रुपए मिलते हैं उन्हें घर में दे देता है।

पढ़ाई के प्रति बच्चे की लगन देख कर उसी समय एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने उससे कहा था कि तुम जितना पढ़ोगे उतना पढ़ाऊंगा। बात आई-गई हो गई और सोनू भी एडिशनल पुलिस कमिश्नर से हुई बातचीत को भूल गया।

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