अपनी तनख्वाह से पढ़ाने वाले सिपाही का हुआ ट्रांसफर, लिपटकर रोए बच्चे, भावुक कर देगा VIDEO

sipahi ke transfer par bachhe roye

सार
उन्नाव में ‘हर हाथ में कलम पाठशाला’ की स्थापना करने वाले जीआरपी सिपाही का तबादला हुआ तो बच्चे भावुक हो गए। गुरु जी को जाते देखकर कई बच्चियां खूब रोईं। ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने गाजे-बाजे के साथ उन्हें विदाई दी।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में छात्रों का टीचर के प्रति प्रेम का एक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में छात्र शिक्षक की विदाई पर रो रहे हैं, उन्नाव में एक जीआरपी में तैनात सिपाही अपनी तनख्वाह से पैसे खर्च करके बच्चों को पढ़ाता था. उसने 5 बच्चों से इसकी शुरुआत की थी. देखते ही देखते भारी तादाद में बच्चे उसके पास पढ़ने आने लगे. बच्चों की आंखों में उस समय आंसू आ गए, जब GRP में तैनात सिपाही का ट्रांसफर किसी और जगह पर हो गया.

टीचर की विदाई में बच्चे उससे लिपटकर फूट-फूटकर रोए. वहीं सिपाही भी बच्चों को रोता देखकर भावुक हो गया. उसका कहना है कि वह जहां पर भी रहेगा, बच्चों को पढ़ाएगा.जिस टीचर की विदाई पर बच्चे रो रहे हैं, उस सिपाही का नाम रोहित है. रोहित उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के तौर पर कार्यरत है. रोहित की साल 2005 में पुलिस सेवा में तैनाती हुई थी.

टीचर की विदाई पर रोये बच्चे
साल 2018 मे रोहित का ट्रांसफर झांसी सिविल पुलिस से GRP मे हो गया. उसके बाद उनकी तैनाती उन्नाव GRP में हो गई. जिसके बाद रोहित ने उन्नाव के कोरारी रेलवे स्टेशन में सेवाए देनी शुरू कर दी. ड्यूटी करने के दौरान रोहित ने देखा कि वहां आस पास के गरीब बच्चे घूम रहे हैं. सिपाही के मन में बच्चों को घूमता देख उनको पढ़ाने का ख्याल आया. सिपाही रोहित ने उन बच्चों से बातचीत की लेकिन परिवार के लोगों ने उनको स्कूल भेजने को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया.

रोहित ने इस तरफ अपना ध्यान आकर्षित करते हुए खुद नाइट शिफ्ट में काम करना शुरू कर दिया. जिसके बाद दिन में वह खुली छत के नीचे बच्चों को पढ़ाने लगा. पहले उनके पास पढ़ने के लिए सिर्फ पांच बच्चे आए. धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने लगी. जब बड़ी तादात में बच्चे उनके पास पढ़ने के लिए आने लगे तो रोहित ने दो टीचर्स को रख लिया. रोहित अपनी तनख्वाह से हर महीने 10 हजार रूपए बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रहा था.

अपनी सैलरी को बच्चों को पढ़ा रहा था सिपाही
कोरारी रेलवे स्टेशन पर खुली छत के नीचे पढ़ाने वाले सिपाही रोहित लगातार बच्चों को शिक्षित कर रहा था. यह जानकारी तत्कालीन डीपीआरओ राजेंद्र को हुई तो उन्होंने पास में बने पंचायत भवन की चाबी रोहित को दे दी. जिसके बाद उन्होंने इसी जगह पर क्लास लगानी शुरू कर दी. जिससे बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था भी हो गई. बच्चों को और बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए सिपाही रोहित ने पास के परिषदीय विद्यालयों में सभी बच्चों का दाखिला करा दिया.

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