Zara Hatke : एक ऐसा गांव जहां हिन्दू भी रखते हैं मुस्लिम सरनेम !

hindu rakhte hain muslim ka surname

सार
नालंदा जिले के सात गांव ऐसे हैं जहां के ग्रामीणों का सरनेम गांव के नाम पर है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी निभायी जा रही है। यहां के लोगों की गांव से मोहब्बत एक मिसाल है। इन गांवों के रहने…

Zara Hatke : नालंदा जिले के सात गांव ऐसे हैं जहां के ग्रामीणों का सरनेम गांव के नाम पर है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को आज भी निभायी जा रही है। यहां के लोगों की गांव से मोहब्बत एक मिसाल है। इन गांवों के रहने वाले बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं, जो दशकों पहले गांव छोड़कर दूसरी जगह जा बसे हैं। बावजूद वे अपने गांव के नाम को अपने नाम पर सरनेम रखते हैं।

5000 की आबादी है गांव में, जहां रहती है आधा दर्जन जातियां
गिलानी गांव में कुल 5000 लोगों की आबादी है। जहां मुस्लिम समुदाय के अलावा हिंदू धर्म के पासवान, कोइरी, यादव, नाई, रविदास, कहार, कुम्हार पंडित जाति के लोग रहते हैं। दोनों धर्म के लोग अपने-अपने नाम के पीछे गिलानी सरनेम का उपयोग करते हैं। यहां के निवासी इमदाद अहसान गिलानी कहते हैं कि वो इस बात पर फक्र महसूस करते हैं कि अपने नाम के बाद गिलानी शब्द का इस्तेमाल करते हैं। यहां हिंदू-मुस्लिम सभी अपने नाम के आगे गिलानी लगाते हैं। पुराने से लेकर अब नए लोग भी इस परंपरा का पालन कर रहे हैं।

एक अंतर यह आया है कि पुराने जनरेशन के लोग जाति का टाइटल लगाने के बाद गिलानी शब्द लगाते थे। यंग जेनरेशन के लोग जाति को हटाकर नाम के साथ सीधे गिलानी लगाते हैं। जैसे- अनिल कुमार गिलानी, इमरान गिलानी, मसूद अजहर गिलानी, डोमन गिलानी, अभिषेक गिलानी नाम के लोग गांव में रहते हैं और सरनेम का उपयोग करते हैं।

इनसबों में सबसे खास अस्थावां प्रखंड का गिलानी गांव है। यहां हिन्दू-मुस्लिम सभी वर्गों के पुरुष व महिला अपने नाम के बाद सरनेम में ‘गिलानी लगाते हैं। अन्य छह गांवों में सिर्फ मुस्लिम समाज के लोग गांव के नाम पर सरनेम रखते हैं। अस्थावां गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग अस्थानवी, हरगावां के हरगानवी, डुमरामा के डुमरानवी, उगांवा के उगानवी, चकदीन के चकदीनवी, देसना के लोग देसनवी सरनेम रखे हैं।

गिलानी गांव के बेनाम गिलानी, एयान गिलानी, रैयान गिलानी, जितेन्द्र राम गिलानी, कैलाश राम गिलानी, राजेन्द्र राम गिलानी व अन्य बताते हैं कि अपने बुजुर्गों से जो उन्हें जानकारी मिली है उसके अनुसार मुगलकाल से ही नाम के बाद गांव का सरनेम रखने की परम्परा चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि विश्व के सबसे बड़े बुजुर्ग हजरत अब्दुल कादिर जिलानी के नाम से ‘गिलानी नाम रखा गया है। अरबी भाषा में ‘ग अक्षर नहीं होता, इसलिए लोग उनको जिलानी कहते हैं। इसकी वजह से गांव का पूरा नाम मोहीउद्दीनपुर गिलानी है। मौलाना मुजफ्फर गिलानी की किताब ‘मजमीन के अनुसार गिलान एक जगह का नाम है। जहां बड़े पीर के अनुयायी रहा करते थे। वहां से किसी कारणवश कुछ लोग मोहीउद्दीनपुर गिलानी आए थे। उनलोगों के सरनेम में भी गिलानी लगा हुआ था। यहां उनलोगों के प्रभाव व आपसी सौहार्द को देख कर लोग अपने नाम के सरनेम में गांव का नाम लगाने लगे।

सदियों पुराना गांव है गिलानी
गांव के लोगों ने बताया कि मोहीउद्दीनपुर गिलानी सदियों पुराना गांव है। यहां एक नहीं, अनेको विद्धान, अदीव, साहित्यकार, कई आईएएस, इंजीनियर, डॉक्टर हुए हैं। इतना ही नहीं, यहां के कई लोग विदेशों में भी परचम लहरा चुके हैं। यहां के रहने वाले मौलाना मनाजिर अहसन गिलानी की किताब विश्व प्रसिद्ध है। इनके द्वारा लिखी गईं 14 किताबें विश्व प्रसिद्ध हुई हैं। यह गांव आम के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। यहां आम के बड़े-बड़े बगीचे हैं। यहां दूसरे जिले के लोग भी आम खरीदने आते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Latest News