4 पॉइंट्स में समझिए नीतीश कुमार को इतने आराम से क्यों जाने दे रही है भाजपा !

nitish kumar on bjp

Bihar News : बिहार में 5 साल बाद फिर से नीतीश कुमार की पार्टी JDU और BJP के बीच गठबंधन टूट गया है। मुख्यमंत्री आवास पर JDU के सांसदों और विधायकों की मीटिंग में इसकी घोषणा की गई है। इधर, नीतीश ने राज्यपाल फागू सिंह चौहान से मिलने का समय मांगा है।

अब से थोड़ी में जदयू नेताओं के साथ मुख्यमंत्री राजभवन जाएंगे। तेजस्वी भी उनके साथ होंगे। राजभवन के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग की है। भारी पुलिस फोर्स भी तैनात किया गया है। इधर, राजद, कांग्रेस और वामदलों ने नीतीश सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र तैयार कर लिया है।

आरसीपी प्रकरण के बाद नीतीश कुमार को शायद लगने लगा था कि भाजपा उन्हें ज्यादा समय तक सीएम पद नहीं दे सकेगी। ऐसे में महाराष्ट्र की शिवसेना की तरह पार्टी में बगावत के बीज पनपने से पहले ही उन्होंने सियासी दांव चल दिया। वैसे भी ढाई साल तक जूनियर को कुर्सी सौंपने वाली भाजपा अगले ढाई साल के लिए जरूर तैयारी कर रही होगी।

क्या भाजपा मानकर चल रही है कि बिहार में उसके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं? आइए 4 पॉइंट्स में समझते हैं कि भाजपा के मन में क्या है और वह बड़े आराम से नीतीश कुमार को सेफ पैसेज क्यों दे रही है।

1. JDU को तोड़ने की कोशिश नहीं
कहते हैं सियासी जंग में योद्धा हर दांव आजमाने की कोशिश करता है। लेकिन बिहार की सत्ता से बाहर हो रही भाजपा ने पिछले 24 घंटों में स्पष्ट संकेत दिया कि वह नीतीश कुमार को उनके मन की करने देगी। वह जेडीयू को तोड़ने की कोशिश नहीं करेगी। अंदरखाने से बातें छनकर आईं कि नई सरकार को गिराने का कोई प्रयास नहीं किया जाएगा बल्कि उनसे जवाब मांगा जाएगा।

2. वेट एंड वॉच की रणनीति
दरअसल, नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने, मोदी से पहले की नाराजगी, पहले की महागठबंधन सरकार का हश्र देखते हुए भाजपा के लिए सबसे मुफीद स्थिति यही बन रही है कि वह सियासी घटनाक्रम पर वेट एंड वॉच की भूमिका में बनी रहे। उसे बिहार में फिलहाल अपने लिए कुछ ज्यादा स्कोप नहीं दिख रहा है। यही वजह है कि जैसे गठबंधन टूटने की बात पुख्ता होने लगी और नीतीश कुमार ने राज्यपाल से मिलने का वक्त मांगा, भाजपा कोटे के सभी 16 मंत्रियों के भी इस्तीफा देने की खबरें भी तैरने लगीं।

3. पर आगे शांत नहीं बैठेगी
जब दोस्ती टूटती है तो तल्खी बढ़ती है। फिर जिन मुद्दों पर फायदा होता दिखता है, उन्हें फिर से खोदा जाता है। सरकार की खामियों और कमजोरियों को उछाला जाता है। जाहिर है कि नीतीश की नई सरकार पर भाजपा की तरफ से हमले जोरदार रहेंगे। ढाई साल में चुनाव है और पिछली बार आरजेडी के दामन पर लगे दाग के चलते जिस तरह से नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया था, उस माहौल को भाजपा फिर से उजागर करेगी। वह पीएम मोदी के उन ट्वीट्स का भी जिक्र कर सकती है जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर नीतीश कुमार की प्रशंसा की थी। इससे वह अंतर को भी जनता के सामने पेश करेगी।

4. बिहार में महाराष्ट्र पार्ट-2
नीतीश सरकार से अलग होने के बाद भाजपा के लिए खुलकर खेलने का मौका होगा। वह जोर-शोर से इस बात को प्रचारित करेगी कि नीतीश कुमार ने महाराष्ट्र की उद्धव सरकार की तरह जनादेश का अपमान किया है। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए को 125 सीटें मिली थीं। नीतीश की पार्टी नुकसान में रही थी और उसकी 28 सीटें घट गई थीं। भाजपा को 21 सीटों का फायदा हुआ था। बिहार में भाजपा जेडीयू से बड़ी पार्टी बन गई लेकिन बड़ा दिल दिखाते हुए भगवा पार्टी ने नीतीश को सीएम की कुर्सी सौंप दी। अब इन सब बातों को नैतिकता और गठबंधन धर्म के पैमाने पर कसते हुए भाजपा जेडीयू पर हमले करने से नहीं चूकेगी।

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